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Thursday, March 12, 2026
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प्रयागराज:महाकुंभ की भीड़ के आगे दम तोड़ रही व्यवस्थाएं।

प्रयागराज/ उत्तरप्रदेश

 

13 जनवरी से प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ के शाही स्नान अंतिम दौर पर है परंतु श्रद्धालुओं की भीड़ और शहर की व्यवस्थाएं दम तोड़ रही है। सरकार एवं प्रशासन को जैसा अनुमान था, कि शाही स्नान के बाद व्यवस्थाएं सुचारू रूप से काम करने लगेगी परंतु वैसा हुआ नहीं और भीड़ अनुमान से अधिक प्रतीत हो रही है ।ऐसा कहा जा सकता है या तो व्यवस्थाएं उस जनसंख्या के अनुसार तैयार नहीं की गई जिसका सरकार ने दावा किया था कि हम सौ करोड़ की व्यवस्था कर रहे है ;और 40 करोड़ आने का अनुमान है। जैसे कयास लगाए जा रहे थे। उससे ज्यादा लोग इस महाकुंभ में आ चुके हैं या आ रहे हालांकि सरकार पूरी कोशिश कर रही है किसी भी प्रकार से कोई अव्यवस्था उत्पन्न ना हो इसके लिए प्रशासक रात दिन मेहनत कर रहा है और सुरक्षा कर्मचारी, सफाई कर्मचारी , यातायात कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभा रहे परंतु ऐसा देखा गया है इन सभी व्यवस्थाओं के पीछे लोगों की ईमानदारी कर्तव्य निष्ठा और इंसानियत का बहुत बड़ी भूमिका होती है ।जो व्यक्ति अपने काम के प्रति निष्ठा रखते है और जो जिम्मेदारी दी गई है। उसे पूर्ण रूप से निभाने की कोशिश करता है तो वह कार्य पूर्णता सफल हो जाता है परंतु जहां भ्रष्टाचार और बेईमानी का चोला पहने हुई लोग मौजूद होते हैं तो व्यवस्थाएं जवाब दे जाती है। इस महाकुंभ कुछ ऐसा ही है ।जहां भ्रष्टाचार बेईमानी लूट और इंसानियत का पतन होते हुए भी देखा गया है। कुछ लोगों द्वारा श्रद्धालुओं की मजबूरी का गलत फायदा भी उठाया जा रहा है होटल वाले, ढाबा वाले, मोटरसाइकिल चालक ,ऑटो चालक सभी लोग मनमानी पैसे वसूल रहे हैं ।इनमें कुछ ईमानदार भी हैं जो अपनी इंसानियत का परिचय दे रहे हैं और जो बेईमान है जिनको सिर्फ अपने धंधे से मतलब है। वह इस महाकुंभ में करोड़पति बनने का सपना देख रहे हैं कुछ अंश बातचीत के “ भैया दाल कैसे दिए ,जबाव: 500 रुपए प्लेट फ्राई 800 रुपए प्लेट। बाइक चालक से एक श्रद्धालु भैया संगम तक जाने का क्या लेंगे। जवाब: बैंक रोड तक चलेंगे 300 लगता है ।एक लोगों का आप दो लोग हैं 500 रुपए दे दीजिए।(यह किराया फाफामऊ स्टेशन से बैंक रोड का है जो आम दिनों में ₹20 सवारी पड़ता है) होटल का किराया जो आम दिनों में 1500 था वह सीधे 5,000 और जहां 5000 था वहां 10,000 रुपए हो गया। इससे एक सवाल उठता है क्या यह लूट का महाकुंभ है या अमृत स्नान का महाकुंभ है। अब प्रकाश डालते हैं सरकार की व्यवस्थाओं पर सरकार ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से कार्य करें । लगभग डेढ़ लाख से अधिक सुरक्षा कर्मचारी जिसमें पुलिस, आर्मी पैरामिलिट्री फोर्स इत्यादि अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे ही हजारों की संख्या में सफाई कर्मचारी अपना काम कर रहे हैं। परंतु देखा गया है लगभग 30% पुलिस कर्मी और सफाई कर्मचारी जो सिर्फ भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं। और अपना काम ईमानदारी से नहीं निभा रहे हैं कुछ कर्मचारी जो सिर्फ खड़े रहते हैं ।फोन पर बात करते रहते हैं कोई देख लेता है तो काम करने लगते हैं ।वरना उनको भीड़ से या अव्यवस्था से कोई मतलब नहीं दिखता है सेना के जवान अपना काम ईमानदारी से निभा रहे हैं। कुछ पुलिस कर्मचारी और सेना के जवान इतनी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं ;कि उनके गले बैठ गए हैं आवाज नहीं निकल रही है ।आंखे लाल पड़ गई है परन्तु डटे हुए हैं। घाटों पर तैनात निषाद बंधु, विद्युत व्यवस्था देख रहे विद्युत कर्मचारी भी अपना काम कर रहे हैं परंतु इतनी जनसंख्या को देखते हुए व्यवस्थाएं तो कम पड़ ही जाएंगी।(Mahakumbh, Prayagraj)

  • महाकुंभ/दिल्ली स्टेशन
प्रयागराज स्टेशन रोड

महाकुंभ की भगदड़, जागरूकता और ईमानदारी का दामन छूट जाता है। और व्यवस्थापक गलत सूचनाओं प्रेषित करता है या वीआईपी मोमेंट जैसी गतिविधियां होती हैं उसमें सारा प्रशासन मुस्तैद हो जाता है ।और जहां करोड़ों की भीड़ जमा हो रही है उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है तो लोगों को मौत के घाट उतारना ही पड़ेगा है। इसका जिम्मेदार कौन होगा? इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या यह महाकुंभ मौत का पैगाम लेकर आया था ? उन श्रद्धालुओं के लिए जो स्नान करने के लिए आए थे। जब से महाकुंभ शुरू हुआ है उस दिन से आज तक प्रतिदिन किसी न किसी की मौत हो रही है जो भगदड़ हुई है उसमें हजारों की संख्या में लोग लापता हो गए ।कितनों की मौत हुई ,उनका कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं मिल रही है ।लोगों का पता नहीं चल रहा है महाकुंभ में अभी भी कुछ गाड़ियां खड़ी हुई है उनके मालिकों का कुछ पता नहीं कौन थे  वे लोग । लोग कितनी संख्या में लोग मरे हैं। सरकार के पास इसका कोई भी रिकॉर्ड नहीं है; परंतु सरकार कितने लोग महाकुंभ में स्नान कर चुके हैं इसके दावे बहुत ही गर्व से कर रही है। छोटी- छोटी भगदड़ कई अन्य क्षेत्रों में देखी गई है – झूंसी की तरफ, संगम क्षेत्र में, नैनी के क्षेत्र में, तेलियरगंज के क्षेत्र में ऐसी भगदड़ हुई है ।ऐसे ही अन्य जिलों एवं अन्य प्रदेशों में भी कई हादसे हुए हैं ।महाकुंभ की भीड़ से संबंधित दिल्ली में स्टेशन पर जो हादसा हुआ उसमें भी कई लोगों की मौत हुई और बहुत से घायल हुए। कितने लोग हादसे का शिकार हुए कितने लोगों की मौतें हुई इसका कोई भी डेटा मौजूद नहीं है ।जाम में फंसे लोगों से लूट पाट हुई चोरी हुई। भगदड़ में हुई मौतों पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री में कोई विशेष मंथन नहीं किया बस शब्दों के माध्यम से क्षणिक संवेदनाएं व्यक्त की गई और उसके बाद सफलता का जश्न मनाया जा रहा है।अगर कोई सवाल व्यवस्था और मौत से जुड़ा पूछेगा तो उसे देशद्रोही की संज्ञा दी जायेगी सवाल करना हमारा अधिकार है ।क्योंकि यह महाकुंभ आमजन मानस के पैसे से ही हो रहा है सरकार के पास पैसा कहां से आता है। यह सब को पता होना चाहिए। क्योंकि लोगों के अंदर ऐसा डर पैदा किया गया है कि जो सरकार कर रही है उसी के गुणगान करो सरकार से सवाल मत करना। आप अपने अधिकार और जनता के अधिकारों के लिए कोई सवाल सरकार से नहीं कर सकते हैं। यह कैसा लोकतंत्र जहां सही गलत की परिभाषाएं बदल दी जाती है जो हमारे लिए सही है वह सही है और जो दूसरे के लिए सही है वह गलत है।

प्रयागराज महाकुंभ की भीड़ को सहन करने की क्षमता से प्रयागराज वासियों में ही अन्य शहरों के लोग की हिम्मत जवाब दे जाती यहां के सभी बंधुओं ने धैर्य का परिचय दिया है यहां के मुस्लिम बंधुओं ने भी जो हो सका श्रद्धालुओं की सेवा की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र, छात्रों ने और अंत:वासियों श्रद्धालुओं को जलपान कराया। शहर की कुछ समाजसेवी और कुछ छात्रों ने मुफ़्त में लोगों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचा तथा उनके अल्पाहार की व्यवस्था की ।शहर के हर गली मोहल्ले से लोगों अपनी सुविधा के अनुसार मदद की । पूरा शहर अभी भी जाम की चपेट में है अब स्थिति यह बन चुकी है कि शहर की गली मोहल्ले जाम से ग्रसित है और आमजन को घर से निकलने में मुश्किल हो रही है। 90% खाने पीने के सामान के स्टॉक खत्म हो चुके हैं। शहरवासी हाउस अरेस्ट हो चुके हैं।इस महाकुंभ ने 300 किलोमीटर लंबे जाम का विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है ; तो किसी ने इसी जाम का फायदा उठाया सामान को मनमाने दामों में बेचा तो किसी ने मनमाना किराया वसूला। जो कुछ लोगों के लिए खुशी की बात होगी कि हम रिकॉर्ड बना रहे है कैसे रिकॉर्ड है उससे कुछ नहीं मतलब परंतु उस महा जाम में कितने लोगों का दम घुट गया मौत के घाट उतर गए यह किसी को अंदाजा भी नहीं होगा कुछ लोगों चलने में असमर्थ थे कुछ लोग बीमारी से ग्रसित थे कुछ ने तो रास्ते में दम तोड़ दिया बच्चे ,महिलाएं, बुजुर्ग इस आस्था के संगम में डुबकियां लगाने के लिए कतार दर कतार चले जा रहे हैं। सरकार कर प्रचार प्रसार और किसी को 144 साल की कहानी तो किसी को अमृत स्नान की लालसा तो किसी को संचित पुण्य कर्म की कामना यहां तक की खींच लाई। भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही इसी को देखते हुए सरकार ने 5 मार्च तक महाकुंभ बढ़ा दिया है। ज्ञान विज्ञान के दौर में धार्मिक आस्था का चोला पहनाकर लोगों को किसी और भी मोड़ा जा सकता है लोगों में तार्किक शक्ति का अभाव हो जाता जहां बात धर्म की आ जाती है। गंगा भी यही, यमुना भी यही और यह संगम भी यही रहेगा यह शहर भी यही रहेगा भीड़ का हिस्सा न बनिए कुछ समय बाद ही प्रयागराज आएं तो अच्छा होगा मौत का मातम देखना हो तो भीड़ का हिस्सा बनिए।

(आशीष कुमार,शोधार्थी ,इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज)

लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र हैं और सामाजिक विज्ञान में शोध कार्य कर रहे हैं। विभिन्न सामाजिक,राजनैतिक मुद्दों पर लेखक की अच्छी समझ और पकड़ है। इससे पूर्व लेखक के कई पत्र पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित हो चुके हैं।विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर लगातार लिखते रहते हैं।

 

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