बोधगया, 23 फरवरी 2025: बोधगया स्थित भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त करने के लिए चल रहे बौद्ध भिक्षुओं के आमरण अनशन आंदोलन का 12 वां दिन है, लेकिन बिहार सरकार और केंद्र सरकार मूकदर्शक बनकर बैठी हुई है। ऐसा लगता है सरकार ने आमरण अनशन पर बैठे लोगों को मारने की योजना बना ली है। आंदोलन के संयोजक डॉ विलास खरात, उनके सहयोगी आकाश लामा एवं भिक्षुओं की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है।

दुनिया भर से बौद्ध देशों के लोग आंदोलन को समर्थन करने पहुंच रहे हैं और बौद्ध मंदिर को बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की मांग पूरी न होने के कारण भारत की छवि विश्व स्तर पर खराब हो रही है। अभी तक सरकार ने महाबोधि महाविहार बुद्ध विहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त कर बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है। बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी के द्वारा लगातार आंदोलनकारियों के खिलाफ षडयंत्र किए जा रहे हैं। डॉ विलास खरात ने बताया कि 3 दिन पहले आंदोलन को दबाने के लिए कमिटी के ब्राह्मण महंत के लोगों के द्वारा आंदोलन स्थल के सामने जानबूझकर फायर ब्रिगेड की गाड़ी खड़ी कर दी गई थी ताकि देश, दुनिया के लोगों को पता न चले।

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ विलास खरात ने हमें बताया कि केंद्र और राज्य सरकार महाबोधि महाबिहार कब्जा जमाए बैठे ब्राह्मण महंत के इशारे पर काम कर रही है इसलिए उसे लाखों लोगों का यह आंदोलन दिखाई नहीं दे रहा है। डॉ खरात ने बताया कि आमरण अनशन आंदोलन को समर्थन देने हजारों लोग आंदोलन स्थल पहुंच रहे हैं और विभिन्न माध्यमों से आंदोलन को देश के करोड़ों लोगों का समर्थन मिल रहा है। आज भी देश के विभिन्न राज्यों से हजारों लोग आंदोलन को समर्थन करने पहुंचे।

वंचित बहुजन आघाडी ने किया समर्थन
आमरण अनशन आंदोलन को पहले राजद विधायक सतीश दास उसके बाद आजाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद समर्थन दे चुके हैं, अब बहुजन वंचित आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने आंदोलन का समर्थन किया है। डॉ विलास खरात ने बताया कि आंदोलन को देश दुनिया के सभी जागरूक लोगों का समर्थन मिल रहा है इसी कड़ी में वंचित बहुजन अघाड़ी जो कि महाराष्ट्र की एक बड़ी पॉलीटिकल पार्टी है उनके द्वारा आंदोलन को समर्थन दिया गया है। वंचित बहुजन आघाडी का समर्थन मिलने के बाद महाराष्ट्र के हजारों लोग रोज आंदोलन को समर्थन करने पहुंच रहे हैं।
महाविहार के मुक्त होने तक चलेगा आंदोलन
डॉ विलास खरात ने बताया कि हम किसी भी कीमत पर महाबोधि महाविहार को विदेशी ब्राह्मण के कब्जे से मुक्त करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसके लिए हमें अपनी जान देनी पड़े तो उसके लिए भी तैयार हैं।



