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Thursday, March 12, 2026
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अफ़सरों की फैक्ट्री-इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फ़ायरिंग, आगजनी और पत्थरब़ाजी-क्यों बिगड़े हालात

इलाहाबाद विश्वविद्यालय को आईएएस-आईपीएस, पीसीएस अफ़सरों की फैक्ट्री और पूर्व का ऑक्सफ़ोर्ड कहा जाता था. ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ, जब यूपीएससी और पीसीएस के रिज़ल्ट में इसकी धाक हुआ करती थी लेकिन हालात अब वैसे नहीं हैं. आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक अपने बच्चों को यहां भेजने से कतराने लगे हैं. इसलिए क्योंकि न तो यहां पढ़ाई का वैसा स्तर रहा और न ही माहौल. यूनिवर्सिटी में 400 फ़ीसदी तक फीस बढ़ोत्तरी को लेकर पिछले सितंबर से बवाल मचा है, जो सोमवार को टकराव में बदल गया. (Allahabad University why worsened)

फ़ीस बढ़ोत्तरी का आदेश वापस करने की मांग लेकर पिछले 100 दिनों से छात्र कैंपस में धरने पर बैठे हैं. जिससे प्रशासन ने पूरी तरह से नज़रंदाज कर रखा है. सोमवार को पूर्व छात्रनेता विवेकानंद पाठक कैंपस में जाना चाहते थे लेकिन गार्ड ने उन्हें रोक दिया. दोनों के बीच विवाद हुआ. आरोप है कि सुरक्षागार्ड ने छात्रनेता के साथ मारपीट कर दी. इसी को लेकर कैंपस में बखेड़ा मच गया. छात्र और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हो गया.

कैंपस का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें छात्रों को दौड़ाकर पीटते देखा जा रहा है. विवेकानंद पाठक समेत कई छात्रों को चोटें भी आई हैं. हवाई फ़ायरिंग, आगजनी और पत्थरबाज़ी के भी आरोप हैं. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रोटेस्ट को दबा रहा है. यहां अघोषित आपातकाल लगा रखा है. बहरहाल हालात अब सामान्य हैं. इलाहाबाद के पुलिस आयुक्त रमित शर्मा का बयान है कि दोनों पक्षों से संवाद किया जा रहा है. (Allahabad University why worsened)

कैंपस में हिंसक झड़प को लेकर कई लोगों की कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कहा जा रहा है कि, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी उस फ़ेहरिस्त में शामिल हो गया है, जिनके शैक्षिक वजूद को ढकने के लिए विवादों का लेवल चस्पा कर दिया गया.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फ़ीस बढ़ोत्तरी का मुद्​दा कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने संसद में उठाया था. छात्रनेता विवेकानंद पाठक कांग्रेस से जुड़े हैं. उनका आरोप है कि गार्ड ने उन्हें बंदकू की बट से पीटा और सिर फाड़ दिया. यूनिवर्सिटी प्रशासन का दावा है कि छात्रनेता ने ही गार्ड के थप्पड़ मारा जिससे हालात बिगड़ गए. (Allahabad University why worsened)

फ़ीस बढ़ोत्तरी पर यूनिवर्सिटी प्रशासन का तर्क है कि साल 1922 के बाद यानी 100 साल बाद फ़ीस बढ़ाई गई है. ये ठीक है कि 1987 में स्थापित इलाहाबाद विश्वविद्यालय की फ़ीस दूसरे केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में काफ़ी कम थी और अभी भी कम ही है. बीए-बीकॉम की फ़ीस 975 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 3901 रुपये कर दिया गया. बीएससी की फ़ीस 1125 रुपये से बढ़ाकर 4151 कर दी है. बाक़ी कोर्सेज में भी इसी तरह से रिकॉर्ड फ़ीस बढ़ी है. तब, जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हॉस्टल की फ़ीस एमएमयू, जामिया और जेएनयू से कई गुना अधिक है.

मुफ़्त राशन देंगे लेकिन शिक्षा नहीं

पिछले दो वर्ष से भारत सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन खिला रही है. इसलिए, क्योंकि कोविड में लोगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है. जब सरकार ख़ुद ही मान रही है कि लोगों के सामने आर्थिक संकट है, तो उनके बच्चों की शिक्षा पर 400 गुना फ़ीस बढ़ाने की क्या तुक? फ्री में भोजन कराने वाली सरकार आख़िर बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाने का क्रेडिट क्यों नहीं ले सकती. सवाल यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए भी है.100 सालों में जब फ़ीस नहीं बढ़ी तो सौ फ़ीसदी बढ़ाकर ही ठहरा जा सकता है. एक ही बार में 400 गुना तक फ़ीस बढ़ना, कैसे और कहां तक जस्टिफ़ाई है. (Allahabad University why worsened)

विश्वविद्यालयों का बजट घटा रही सरकार

केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों को ये इंस्ट्रक्शन से मिल रहे हैं कि उन्हें ख़ुद ही फंड का इंतज़ाम करना होगा. फ़ीस बढ़ोत्तरी को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन का यही तर्क है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बजट में कटौती को लेकर भी जुलाई में प्रोटेस्ट हो चुके हैं. छात्रों का कहना है कि 2018 से साल दर साल लगातार उसका बजट घटाया जा रहा है. इस बार केंद्र से महज 9 करोड़ रुपये का बजट मिला है. विश्वविद्यालयों के अपने फंड पर निर्भरता के कारण यहां बेलगाम फ़ीस बढ़ने लगी है. (Allahabad University why worsened)

कैंपस में हर तरफ़ से बढ़ती सख़्ती

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का ये दावा कि यहां प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है. बाहरी छात्रों की एंट्री बंद की जा रही है. बेशक वे छात्रनेता ही क्यों न हों या पुरातन छात्र हों. ये केवल इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है. बल्कि राज्य विश्वविद्यालयों तक इसी तरह के आदेश-निर्देश सामने आ रहे हैं. पिछले दिनों यूपी के ही बरेली स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भी इसी तरह का एक आदेश जारी हुआ था.

जिसमें बाहरी छात्रों की एंट्री पर रोक और प्रदर्शनों के लिए एक जगह निर्धारित की गई थी. इसमें स्पष्ट किया गया था कि प्रशासनिक भवन के बाहर कोई प्रदर्शन नहीं होगा. तय जगह पर ही प्रोटेस्ट कर सकेंगे. समाजवादी छात्रसभा के छात्र उखड़ गए और इसी आदेश के विरोध में प्रदर्शन किया था. (Allahabad University why worsened)

जामिया की तस्वीरें हो रहीं वायरल

इलाहाबाद विश्वविद्यालय विवाद के बीच जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की साल 2019 की वो तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं. जब जामिया में निहत्थे छात्रों को बंदूक के ज़ोर पर बाहर निकाला गया था. कैंपस के अंदर घुसकर लाठियां और गोलियां चली थीं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सारी रात छात्रों पर लाठियां बरसी थीं. इसलिए क्योंकि वो सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे. इस बीच जेएनयू नक़ाबपोश गुंडों की दहशत देख चुका है और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का ये टकराव. विषय-मुद्​दे बेशक़ अलग हैं. लेकिन छात्रों की पिटाई की तस्वीरें काफ़ी हद तक मेल खाती हैं. (Allahabad University why worsened)


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