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Thursday, March 12, 2026
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संत बाबा गाडगे जयंती : अस्पताल में 100 बच्चों का ऐसे बदला ब्रेन

उत्तरप्रदेश के बरेली जिले के गांधीनगर में स्थित सरस्वती फॉउन्डेशन मॉर्डन क्लासेज के सैकड़ों बच्चों के साथ बाबा संत गाडगे जी की 147बी जयंती बड़े धूमधाम के साथ मनाई गयी(Sant Baba Gadge Jayanti)

बाबा संत गाडगे का जन्म 23 फ़रवरी 1876 को महाराष्ट्र में हुआ था. उन्होंने अपना पूरा जीवन पीड़ित मानवता बहुजनों बंचितों की सेवा में लगा दिया वह एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे। वह पूर्ण रूप से अनपढ़ थे उन्होंने महाराष्ट्र के कोने कोने में 60 संस्थाओं का निर्माण कराया जैसे विद्यालय, चिकित्सालय, धर्मशालाएं एवं छात्रावासों का निर्माण कराया इस मौके पर आज शुक्रवार को गांधीनगर में स्थित सरस्वती फॉउन्डेशन मॉर्डन क्लासेज स्कूल में बाबा गाडगे सेवा संघ के बैनर तले बाबा गाडगे की जयंती स्कूली बच्चों के साथ बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई गयी।(Sant Baba Gadge Jayanti)

 

इस मौके पर बाबा गाडगे सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने कहा बाबा संत गाडगे आम साधुओं जैसे साधु नहीं थे वे पीड़ित मानवता के मसीहा थे। बाबा अपने कष्टों को भूलकर दींन दुखियों की सेवा में लीन रहते थे।

बाबा गाडगे ने शिक्षा की महत्वता पर जोर दिया साथ ही उन्होंने गरीबों को शिक्षा प्राप्त कराने के लिए 60 संस्थाएं जिसमे विद्यालय, चिकित्सालय,धर्मशालाएं,छात्रावास आदि संस्थाएं खुलवाई।(Sant Baba Gadge Jayanti)

बाबा अपने भजन कीर्तन के माध्यम से कहा करते थे बिना शिक्षा के मत रहो शिक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण है। शिक्षा को ग्रहण करने का हर एक को अधिकार है और वह कहते थे संत समाज बोझ न होकर उसे तो समाज का हित साधक होना चाहिए।

इस मौके पर सुभाष चौधरी ने सभी बच्चों से काफी सवाल जवाब किये और बच्चों ने बड़े ही बेबाकी के साथ सवालों के जवाब दिए और सभी बच्चों ने संकल्प लिया की देश की तरक्की के लिए शिक्षा से जुड़कर अपने माता पिता व अपने शिक्षकों द्वारा दी गयी शिक्षा को प्राप्त कर राष्ट्र का नाम ऊंचा करने को कहा।(Sant Baba Gadge Jayanti)

इस मौके पर संस्था के द्वारा बच्चों को बड़ी संख्या में स्कूली बैग के अलावा कॉपी, पेन, जिओमेट्री बॉक्स और बिस्किट के पैकेट देकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया गया।

इस दौरान आर्थोपेडिक सर्जन डाक्टर प्रवीन अग्रवाल और गायनीकोलोजिस्ट डाक्टर स्वाति अग्रवाल एवं स्कूल के सभी शिक्षक और शिक्षिकायें मौजूद रही। जयंती मनाने वालों में मुख्य रूप से वी.पी. सिंह, आशीष आनंद, सुजीत कुमार, मानवेन्द्र सिंह , अनुराग सिंह , हमज़ा नदीम, अनुभव सक्सेना आदि का मुख्य रूप से सहयोग रहा।


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