बरेली बार एसोसिएशन बरेली में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं तानाशाही के खिलाफ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज भी धरना प्रदर्शन जारी रहा धरना प्रदर्शन शंकर कुमार सक्सेना एडवोकेट,संजय वर्मा एडवोकेट,अंगन सिंह एडवोकेट की अगुआई में जारी रहा आज धरना प्रदर्शन में लगभग ढाई सौ अधिवक्ताओं ने धरना स्थल पर आकर अपना समर्थन दिया ( Protest against Bareilly Bar Association)

बार एसोसिएशन के निर्वाचित कोषाध्यक्ष जयपाल सिंह एडवोकेट ने धरना स्थल पर आकर समर्थन दिया एवं बार के खातों में हो रही गड़बड़ियों पर खुलकर बताया उन्होंने बताया “लगभग बीस लाख की निकासी बिना किसी प्रस्ताव के हुई जिस कारण खातों की निकासी पर मेरे द्वारा रोक लगवाई गई ।लेकिन रोज की आमदनी को भी जमा नहीं किया जा रहा है और सचिव के पास कोई हिसाब किताब भी नहीं है बार के पैसों का क्या हो रहा है इसकी जानकारी किसी भी कमेटी सदस्य को नहीं दी जाती है ( Protest against Bareilly Bar Association)

वरिष्ठ अधिवक्ता अजय सक्सेना निर्मोही ने समर्थन देते हुए कहा कि धरना प्रदर्शन शुरू करके एक सराहनीय कार्य किया है। बार के अध्यक्ष और सचिव भाग क्यों रहे है मांगो पर जवाब दे और बार का हिसाब सार्वजानिक करे ,बार एसोसिएशन का ऑडिट करवाए।सबको मालूम है कि कौन क्या है। उन्होंने कहा कि हम पत्थर है, हम सबको पता है कौन गद्दार है किसने बार को लूटा है धरना स्थल पर साथियों के लिए फल का भी वितरण कराया गया। और हौसला अफजाई की।

वरिष्ठतम अधिवक्ता शशिकांत शर्मा ने समर्थन देते हुए कहा बार में व्याप्त गंदगी को दूर करना ही लक्ष्य है सबको पता है कि चुनाव के समय फाइव स्टार होटल में पार्टी में क्या होता है ।जब धुआं निकलता है तो निश्चित ही आग लगी है।चुनाव में हुई धांधली और वोटर लिस्ट में फर्जी मतदाता बढ़ाने के संबंध में एस.डी.एम की अदालत में एक मुकदमा भी किया है जो विचाराधीन है”विशेष पाल सिंह एडवोकेट ने समर्थन देते हुए कहा कि धरना प्रदर्शन बिल्कुल सही मांगों को लेकर किया गया है इन मांगो को पूरा किया जाना चाहिए।
आंदोलन कर रहे अधिवक्ता श्री शंकर कुमार सक्सेना ने मंच से कहा कि सचिव साहब आ कर मुझ से बायलॉज पर डिबेट करे और हम उन्हें बताएंगे कि बरेली बार में कब कब कितन गबन उनके ही कार्यकाल में हुआ है , पिछली सी.ए की रिपोर्ट में तो साफ़ लिखा है कि बार के वकालतनाम के रिकॉड नहीं बनाए गए है, सचिव साहब आए और बताए कि रिकॉड नहीं है तो वो पैसा कहा गया, कौन सी योजनाओं पे खर्च हुआ।


