तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं: इप्टा के तराशे एक्टर संजीव कुमार की याद में
फिल्म अभिनेता संजीव कुमार की फिल्में जिन्होंने भी देखी हैं, वे उनके अभिनय को शायद ही भूल पाए हों। संजीव कुमार जन्मजात दिल की बीमारी का शिकार होकर कम उम्र में ही चल बसे थे, लेकिन उतनी ही उम्र में उन्होंने अभिनय कला में ऐसी छाप छोड़ी, जो बेजोड़ है। आज के दिन उन्होंने आखिरी सांस ली। (Shikwa Tere Bina Zindagi)
संजीव कुमार का जन्म जन्मजात हृदय रोग के साथ 9 जुलाई 1938 को हरिहर जेठालाल जरीवाला के रूप में हुआ था। उनके परिवार की खास बात यह भी थी कि कई सदस्य 50 साल से ज्यादा नहीं जीते थे। अपने पहले दिल के दौरे के बाद, संजीव कुमार ने अमेरिका में एक बाईपास सर्जरी कराई, इसके बावजूद 6 नवंबर 1985 को महज 47 साल की उम्र में उन्हें गंभीर स्तर का दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौत हो गई। वह एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने कई बुजुर्ग भूमिकाएं निभाई थीं, लेकिन 50 की उम्र तक पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

इसका अंदाजा इससे भी लगता है कि उनकी दस से ज्यादा फिल्में उनके निधन के बाद रिलीज़ हुईं। एक वक्त ऐसा आया कि उनका परिवार सूरत गुजरात से मुंबई में बस गया था। वहीं पर संजीव कुमार ने एक थियेटर कलाकार बतौर अभिनय कॅरियर शुरू किया। मुंबई में इप्टा से जुड़ने के बाद भारतीय राष्ट्रीय रंगमंच में शामिल हो गए। उन्हें बड़ी उम्र वाले की भूमिकाएं निभाने का शौक था। (Shikwa Tere Bina Zindagi)
22 साल की उम्र में आर्थर मिलर के ऑल माई सन्स के में एक बूढ़े की भूमिका निभाई। एके हंगल द्वारा निर्देशित नाटक डमरू में छह बच्चों के साथ 60 वर्षीय इंसान की भूमिका निभाई। संजीव कुमार ने 1960 में हम हिंदुस्तानी में एक छोटी भूमिका के साथ फिल्म की शुरुआत की। नायक के रूप में उनकी पहली फिल्म निशान (1965) थी। 1968 में उन्होंने प्रसिद्ध अभिनेता दिलीप कुमार के साथ अभिनय किया।

उन्होंने 1966 की गुजराती फिल्म कालापी में भी मुख्य भूमिका में अभिनय किया। 1970 में फिल्म खिलौना, जो तमिल फिल्म एंगरिंदो वंधल की रीमेक थी, ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। 1972 में, उन्होंने एक इंडो-ईरानी फिल्म सुबह और शाम में अभिनय किया। तब निर्देशक गुलजार ने उन्हें पहली बार देखा था। बाद में उन्होंने 4 फिल्मों परिचय, कोशिश (1973), अंधे (1975) और मौसम (1975) में कास्ट किया। (Shikwa Tere Bina Zindagi)
गुलज़ार ने अंगूर (1981) और नमकीन (1982) फ़िल्मों में युवक की भूमिका में कास्ट किया। उन्होंने बॉक्स ऑफिस की हिट फिल्म सीता और गीता (1972), मनचली (1973) और आप की कसम (1974) में अभिनय किया। गुलजार द्वारा निर्देशित नौ फिल्मों में अभिनय किया।

हृषिकेश मुखर्जी ने उन्हें अर्जुन पंडित में निर्देशित किया, जिसके लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। कुमार जीवन भर अविवाहित रहे। उन्होंने 1973 में हेमा मालिनी को प्रपोज किया था और 1976 में पहला दिल का दौरा पड़ने के बाद भी वे संपर्क में रहे। (Shikwa Tere Bina Zindagi)
उन्होंने प्रसिद्ध तमिल अभिनेत्री एल. विजया लक्ष्मी के साथ हुस्न और इश्क और बादल सहित तीन फिल्में कीं, जो हिट रहीं। उन्हें अंगारे, पारस, तृष्णा, श्रीमान श्रीमती और हमारे तुम्हारे में राखी के साथ काम किया। उलझन और वक्त की दीवार जैसी फिल्मों में सुलक्षणा पंडित के साथ रहे। कुमार ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सुलक्षणा ने कभी किसी से शादी नहीं करने की कसम खाई। उन्होंने मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, सिंधी और गुजराती सहित विभिन्न भाषाओं में कई क्षेत्रीय फिल्में की हैं। (Shikwa Tere Bina Zindagi)