तुलसीदास की लिखी काव्य रचना रामचरित मानस को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। इस काव्य में मौजूद जातिवादी भेदभाव के अंशों को लेकर सामाजिक तौर पर वंचित वर्ग में बेहद नाराजगी है। इस नाराजगी के कारणों पर इंडस न्यूज ने बहुजन आंदोलन के बुद्धिजीवियों में से एक, व बामसेफ के कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रजापति से बातचीत की। उन्होंने हिंदू धार्मिक ग्रंथों पर अपनी जो राय रखी, उसे आप भी सुनें और कमेंट करके अपनी राय से अवगत कराएं। (Tulsidas insulted like this)


