कौन सी बामसेफ असली, उलझन में दलित आंदोलन
बामसेफ का 39वां अधिवेशन होने जा रहा है
लेकिन दो जगह
एक मुंबई में और एक लखनऊ में (Which BAMCEF is real)
दोनों जगह भीड़ जुटाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है
दोनों जगह विशाल तंबू लग रहे हैं
हजारों कार्यकर्ता दोनों ही जगह जुटने जा रहे हैं
वहीं, लाखों बहुजन इस कन्फ्यूजन में हैं कि इनमें असली है कौन
कहां जाएं, कहां न जाएं
किसे चंदा दें, किसे न दें
दोनों के मिशन भी एक जैसे हैं और विचार भी समान हैं
आखिर असली नकली का फैसला कैसे हो?
दशकों में बामसेफ ने बहुजन समुदाय में यह पहचान बनाई है कि दलित आंदोलन की रीढ़ यही है। इस संगठन के इर्द गिर्द आंदोलन के कई अंग तैयार हुए हैं, यहीं से बसपा जैसी पार्टियां तैयार हुईं, जिन्होंने देश के सबसे बड़े सूबे में सत्ता हासिल की और राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन गई। यही रीढ़ हटते ही बसपा की मट्टी पलीद हो गई।(Which BAMCEF is real)
बामसेफ ने बीते कुछ बरसों में कुछ ऐसाी शैली अपनाई, जिसने बहुजन आंदोलन का साहस बढ़ाया। इस बामसेफ का मुख्य चेहरा रहे वामन मेश्राम। उत्तरप्रदेश के बीते विधानसभा चुनाव तक इस संगठन ने अपनी ऊर्जा उत्तरप्रदेश में ज्यादा लगाई। लेकिन, अंदर ही अंदर कुछ कसमसाहट थी, जो चुनाव बाद फूट पड़ी और बामसेफ दो फाड़ हो गया।
एक धड़े के नेता वामन मेश्राम हो गए और एक धड़े के नेता कमलाकांत काले। दोनों बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित हो गए। फिर शुरू हुआ आरोप प्रत्यारोप का दौर, जो जारी है वामन मेश्राम पर कई आरोप लगे, जिनमें एक प्रमुख कार्यकर्ता युवती का था, जिसकी काफी चर्चा रही। हाल ही में एक मैसेज वायरल हुआ, जिसमें वामन मेश्राम के चाल चरित्र को सवालों के घेरे में लाया गया है। इस वायरल मैसेज में लिखा है- (Which BAMCEF is real)
बाबा साहब की हत्या करवाने वाली पार्टी कांग्रेस से सन् 2024 तक समझौता किया, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम
आपने ही सीनियर कार्यकर्ताओं एवं अपना पूरा घर बार छोड़कर बहुजन मिशन के लिए काम करने वाले समर्पित पूर्णकालिन कार्यकर्ताओं को गाली-गलौच किया और सोशल मीडिया पर उनका नंगा नाच करवाया, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम
डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर जी ने महिलाओं के लिए हिन्दु कोड बिल लाया ताकि महिलाओं शोषण ना हो, वामन मेश्राम साथ काम कर रही मैडम सुजाता काले को 200 लोगों को भेजकर मरवाने का प्लान बनाने वाला, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम (Which BAMCEF is real)
समाज से बामसेफ संगठन के नाम पर पैसा लेकर सारी प्रापर्टी अपने संग, सम्बन्धि और रिश्तेदारों के नाम किया, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम
समाज से बामसेफ संगठन के नाम पर पैसा लेकर बिना किसी सीईसी कमीटि में चर्चा किए बगैर 8 प्रतिशत ब्याज पर पैसा बाट रहा है, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम
सन 2021 में बामसेफ संगठन को खत्म करने की बात करने वाला और उस पर वर्तमान में अमल कर रहा है, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम (Which BAMCEF is real)
समाज से बामसेफ संगठन के नाम पर पैसा लेकर अपनी बीबी को राजनीति में चमकाने के लिए करोड़ो रूपये बर्बाद किया, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम
डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर हमेशा अपने जन्म दिन का विरोध करते रहे लेकिन वामन मेश्राम ने अपने प्रसनल सचिवालय लेटर निकाल कर जन्म दिन मनाने के लिए लोगों कहा और बिना कुछ किए डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर से भी बड़ा बनने का दिखवा करने वाला, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम (Which BAMCEF is real)
बामसेफ मतलब वामन मेश्राम-वामन मेश्राम मतलब बामसेफ, वामन मेश्राम द्वारा यह कहना, क्या बाकी कार्यकर्ता, डोनर, सपोर्टर, वेलविशर द्वारा दिया गया समय, पैसा, हुनर, बुद्धि, त्याग सर्म्पण यह सब कुछ नही है ऐसा कहना वाला, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम
एक लड़की के चक्कर में अपने कई भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को गाली-गलौच करके निकालना और उनके लेटर सोशल मीडिया पर वायरल करके उनको धमकी देना और उनका मनोबल गिराने का काम करने वाला, ये है वामन चिंधुजी मेश्राम (Which BAMCEF is real)
लिखने के लिए और भी बहुत कुछ है, आने वाले समय में वामन चिंधुजी मेश्राम सामजिक गद्दार पर किताब लिखी जाएगी, ताकि बहुजन समाज इससे बच सके।
ऐसा नहीं है, कि यह सब दूसरी ओर से नहीं है।
वामन मेश्राम वाली बामसेफ से नियंत्रित मीडिया एमएन न्यूज ने अपनी वेबसाइट पर एक आर्टिकल छापा है, जिसका शीर्षक है- गद्दार वी.एल.मातंग को साथ देने वाले गद्दार कमलाकांत काले का बामसेफ में रहकर किया आर्थिक भ्रष्टाचार आया सामने! (Which BAMCEF is real)
आठ जुलाई 2022 को प्रकाशित लेख में कहा गया है- हाल ही में बामसेफ संगठन में जो तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई है, उसके पीछे केंद्र की भाजपा सरकार का बड़ा हाथ दिखाई दे रहा है। जो लोग लालन (वी.एल.मातंग) के साथ संगठन से बाहर चले गए उनमें पहला नाम कमलाकांत काले का है। कमलाकांत काले जो अब 11 लोगों के समर्थन से कथित तौर से बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन बैठे है, उनका भी पैसों को लेकर आचरण सही नहीं था।
ओबीसी के नाम पर वह संगठन से अलग हो गए लेकिन जब ओबीसी कि जाति आधारित गिनती के लिए बीते 25 मई को भारत बंद जैसा बड़ा आंदोलन किया गया, इसका उन्होंने विरोध करने का काम किया. इस वजह से एक जगह उनकी पिटाई भी हो चुकी है. पैसों को लेकर उनका व्यवहार शुरू से ही सही नहीं था. बामसेफ का पूर्णकालिक प्रचारक बनने के बाद कुछ साल तक उन्होंने अपने कार्यक्रम तथा प्रशिक्षण शिबिरों द्वारा आए हुए निधि का लेखा-जोखा पेश किया था। (Which BAMCEF is real)
मगर उसमें नियमितता नहीं थी और उनका खर्च अन्य किसी भी पूर्णकालिक प्रचारकों से ज्यादा ही होता था। इतना ही नहीं बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम से भी ज्यादा का खर्च कमलाकांत काले का होता था। उसमें भी खाने-पीने व रहने का खर्च ज्यादा होता था. उन्होंने अपने खर्चे का लेखा-जोखा साल 2014 तक ही संगठन के पास जमा किया है। उसके बाद उन्होंने वह भी नहीं किया.
उन्होंने बामसेफ के 36वें राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारी के लिए जो निधी समाज से इकठ्ठा किया जा रहा था, उसके अंतर्गत मुंबई के एक अधिकारी से 1 लाख रुपयों का निधी लिया था. लेकिन वह संगठन के पास जमा नहीं किया। इसके उलट कमलाकांत काले के धड़े के कई आरोप वामन मेश्राम पर हैं, कि उन्होंने चंदा इकट्टा करने के मकसद से अपना फर्जी जन्मदिन मनवाया। (Which BAMCEF is real)
इसके साथ ही उन्होंने संगठन को अपनी बपौती बना दिया और बाकी लोगों की मेहनत को दरकिनार कर दिया। बामसेफ ने जो साझी मेहनत से किया, उसका श्रेय उन्होंने व्यक्तिगत लिया, इससे बाकी लोगों का वजूद ही खत्म हो गया। खैर, अभी एक खास चीज तो साफ हो गई है कि दोनों धड़े अलग-अलग तरह के रास्ते पर चल पड़े हैं। आर्थिक मोर्चे को मजबूत करने के साथ ही वामन मेश्राम धड़ा लाेकप्रियतावाद की ओर बढ़ चला है.
बामसेफ के सैद्धांतिक मामलों से ज्यादा जोर भारत मुक्ति मोर्चा पर जोर रहेगा, जिसके तहत आंदोलनात्मक गतिविधियां बढ़ेंगी। वहीं, कमलाकांत काले के धड़े का जोर अभी सैद्धांतिक मामलों पर रहेगा और उनके जनसंगठन यूनिटी ऑफ मूलनिवासी का पहला अधिवेशन इस बीच होगा। आने वाले समय में दोनों धड़े फिर एक होंगे या नहीं, या फिर कोई एक अपने को सही साबित करेगा, इस इंतजार में तमाम लोग हैं। (Which BAMCEF is real)