रांची। मोरहाबादी मैदान में चल रहे खादी और सरस मेले में कर्नाटक के आदिवासी बने चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वे जड़ी बूटियों से बनाते है औषधीय तेल। भारत सरकार ने औषधीय गुणों से युक्त तेल को पेटेंट कर ट्रेड मार्क भी जारी कर दिया है। आजकल आदिवासी समुदाय के द्वारा निर्मित यह तेल सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रहा है।आदिवासियों के वर्षों पुरानी सभ्यता द्वारा प्राकृतिक जड़ी बूटी से निर्मित तेल सरस मेले में देखने को मिल रहा है। कर्नाटक मैसूर के ओमकारा आदिवासी हर्बल हेयर आयल का दावा है इस तेल से बाल और सर की त्वचा पर काफी फायदे होते हैं। (Magic Tribal Hair Oil)

Highlights
- प्राचीन पद्धति से बने तेल की करामात दिखा रहे कर्नाटक के आदिवासी
- आदिवासियों के हेयर ऑयल के करिश्मे को देखने क्यों उमड़ रही भीड़
- प्राकृतिक जड़ी बूटी से बने हेयर ऑयल सिर की त्वचा का करता है ट्रीटमेंट
- चर्चा का केंद्र बने मोरहाबादी मैदान में चल रहे मेले में कर्नाटक के आदिवासी
- 80 प्रतिशत से ज्यादा हेयर फॉल कंट्रोल होने का किया जा रहा दावा
- आमदनी के रास्ते तलाश करते रांची पहुंचे हैं कर्नाटक के आदिवासी
- परंपरागत औषधीय दवाई और प्राचीन चिकित्सा पद्यति से झड़ते बालों का इलाज
ओमकारा आदिवासी हर्बल हेयर आयल से जुडी अरुणी ने बताया, ‘आजकल प्राकृतिक जड़ी-बूटियां विलुप्त होती जा रही है। यूँ तो बाजारों में कई सारे महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स उपलब्ध है, लेकिन ग्राहकों के मन में विश्वसनीयता को लेकर हमेशा एक सवाल रहता है। हम आदिवासी समुदाय के लोग अपने साथ अपनी सभ्यता से जुड़ा एक तेल लेकर आए हैं। कर्नाटक के मैसूर आदिवासी अक्सर प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बने सामान को ही इस्तेमाल करते है। यह तेल कुल 101 जड़ी-बूटीयों को मिलाकर हाथों से ही बनाया जाता है।’ (Magic Tribal Hair Oil)

कैसे हाथों से बनाया जाता है जड़ी-बूटी का तेल
ओमकारा आदिवासी हर्बल हेयर आयल से जुडी अरुणी ने बताया कि पहले हम आदिवासी इन जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करते है। इसके बाद इन जड़ी बूटियों की कटाई होती है और फिर इनको धोया जाता है। इसके बाद इन जड़ी बूटियां को सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। जब जड़ी-बूटियां सूख जाती है तो फिर उन्हें अलग-अलग प्रकार के तेल में मिलाया जाता है। जैसे नारियल, अरंरन्डी, सरसों आदि में इसको घोल दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 6 से 7 घंटे का समय लग जाता है। (Magic Tribal Hair Oil)
पुरुष और महिला दोनों के लिए ही बनाया जाता है ये तेल
अरुणी ने बताया, ‘झारखण्ड में हम आदिवासी तेल लेकर आए हैं। जिसमें आदिवासी जड़ी-बूटियां शामिल होती हैं। जंगल से जड़ी-बूटी लाने के बाद इसको घर में ही बनाया जाता है फिर पैक करके इस तेल को बेचा जाता है। लगभग इस औषधि तेल को बाजार में आये चार दशक से ज्यादा वक़्त हो गया है। इस तेल को हम ऑल ओवर इंडिया बेचते हैं। यह सिर के ऊपर के बाल को काला नहीं करता लेकिन जड़ से बाल को काला जरूर कर देता है। इसका कोई एक्सपाइरी डेट नहीं है, इसमें नारियल तेल का इस्तेमाल किया गया है। इसके रत्ती भर का केमिकल नहीं है। इसके रक्तजड़ औषधि का दिव्य गुण है।’ (Magic Tribal Hair Oil)
गांव की महिलाएं कंपनी को बेचती है बाल
अरुणी ने बताया कि इस तेल को महिला और पुरुष दोनों लगाते हैं। वर्षो से मैसूर गांव की महिलाएं इस तेल को लगा रही है। गांव की ज्यादातर महिलाए अपने बाल बढ़ाकर उन्हें कंपनी में बेच देती है फिर तेल लगाने से तीन महीने में ही लंबे बाल आने लगते हैं। गांव में लोग इसको एक तेल की तरह नहीं बल्कि दवा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
”आदिवासी हेयर ऑयल का दूसरा सबसे बड़ा फायदा जो आपको देखने को मिलेगा वो ये की इसके एक ही इस्तेमाल से आपके 80 प्रतिशत से ज्यादा हेयर फॉल कंट्रोल हो जाएगा। ये तेल पूरी तरह से आपको बालों का झड़ना रोक देगा।”
कर्नाटक बन रहा है आयुर्वेदिक उद्योग का केंद्र
भारत के दक्षिण पश्चिम क्षेत्र का राज्य कर्नाटक भारत के आईटी केंद्र होने के साथ-साथ आयुर्वेदिक उद्योग में भी अपना नाम कमा चुका है। कर्नाटक में कई सारी आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियां बस चुकी है। गांव के आदिवासी अक्सर जंगल की जड़ी बूटियों से तेल बनाकर बेचते हैं। इनमें मुख्य रूप सेमेथी, भृंगराज, आंवला लैवेंडर, एलोवीरा, ब्राह्मी, चिरायता, लाजवंती आदि शामिल होते है। तेल के अलावा भी कई प्रकार की औषधीय दवाई कर्नाटक राज्य में बनाई जाती है।


