भाजपा राज में महिलाएं असुरक्षित और हत्यारों व बलात्कारियों की मौज
Shyam Singh Rawat
देश की राजधानी दिल्ली के नजफगढ़ में 9 फरवरी, 2012 को किरण नेगी के सामूहिक बलात्कार के बाद हरियाणा में की गई नृशंस हत्या में लिप्त तीनों आरोपियों को द्वारका सेशन कोर्ट द्वारा सुनाये गये फांसी के फैसले और फिर उसे दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखने वाले फैसले को पलटते हुए 7 नवंबर को उच्चतम न्यायालय ने बरी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने किरण नेगी के माता-पिता और पूरे उत्तराखंडी समाज को भीतर से बुरी तरह झकजोर दिया है। (Women unsafe under BJP)
किरण नेगी अपने परिवार का खर्च चलाने वाली एकमात्र सदस्य थी। उसे 9 फरवरी, 2012 को दिल्ली में क़ुतुब विहार नजफगढ़ से तीन युवक अपनी गाड़ी में अपहृत कर हरियाणा ले गये। वहां ले जाकर उसका न सर्फ बेदर्दी से सामूहिक बलात्कार किया बल्कि उसके शरीर में 21 गंभीर घाव करने के अलावा गुप्तांग में नुकीली चीजें भरकर जघन्य तरीके से मौत के घाट उतार दिया था।
इस मामले को गैर सरकारी संस्था संजीवनी, उत्तराखंड पत्रकार फोरम, दिल्ली के कई संगठनों तथा क़ुतुब विहार की संघर्षशील महिलाओं ने जंतर-मंतर और द्वारका सेशन कोर्ट के सम्मुख आंदोलन चलाया, कई प्रदर्शन और कैंडल मार्च किये। किरण नेगी के माता-पिता सुप्रीम कोर्ट में वर्षों तक ऐड़ियां रगड़ते रहे, उनकी नौकरी भी चली गयी, इससे परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। (Women unsafe under BJP)
यह अत्यंत दुखदाई है कि सुप्रीम कोर्ट ने किरण नेगी के साथ वीभत्स बलात्कार और उसकी हत्या के लिए जिम्मेदार अभियुक्तों को, जिन्हें जिला न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने सजा-ए-मौत दी थी, उनको बरी कर दिया। जबकि हत्याकांड के वीभत्स तरीके, मेडिकल रिपोर्ट, सारे साक्ष्यों के होते हुए भी जिन्हें फांसी पर झूलना चाहिए था, वे बरी हो गए! यह अत्यधिक अविश्वसनीय लगता है।
आज देश की राजधानी समेत कोई ऐसी जगह नहीं है जहां महिलाएं सुरक्षित हों। बलात्कारियों के समर्थन में तिरंगा लहराते हुए जुलूस निकालकर, उनका फूल मालाएं पहनाकर, मिठाई खिलाकर स्वागत-सत्कार करने और उन्हें जेलों से रिहा कर उनको प्रोत्साहित करने वाले भाजपाइयों के राज में महिलाएं असुरक्षित हैं और हत्यारों व बलात्कारियों की मौज है। (Women unsafe under BJP)
(ये लेखक के निजी विचार हैं, फेसबुक वॉल से साभार)