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Tuesday, May 5, 2026
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बरेली: ISWA कथित दुर्व्यवहार में पीड़िता के पास सबूत, डॉक्टर पर धमकी के आरोप; FIR अब तक नहीं, दूसरी तरफ आरोपी डॉ. अयूब अंसारी ने SSP से की मुलाकात

बरेली: बरेली में 18 अप्रैल के ISWA के ईद मिलन कार्यक्रम से जुड़े कथित महिला पत्रकार से कथित दुर्व्यवहार मामले में घटनाक्रम लगातार तेज होता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ित कथित महिला पत्रकार का पक्ष मजबूत होता नजर आ रहा है, क्योंकि उसके पास अपने आरोपों के समर्थन में कई साक्ष्य मौजूद बताए जा रहे हैं, पीड़िता के अनुसार साक्ष्य वह पुलिस को भी सौंप चुकी है।
डॉ अयूब अंसारी (फाइल फोटो)
पीड़िता का आरोप है कि डॉ. अयूब अंसारी द्वारा उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और शिकायत करने पर उसे मामला वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, पीड़िता के पास इसके सबूत मौजूद हैं, पीड़िता के अनुसार उसके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के बाद कथित तौर पर आरोपी डॉक्टर उसे विभिन्न अखबारों के माध्यम से बदनाम करने की बात कही। पीड़िता का आरोप है कि उसे विभिन्न समाचार माध्यमों से बदनाम भी किया गया। पीड़िता का कहना है कि उसने इसके साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध करा दिए गए हैं।
इसके बावजूद, पीड़िता की FIR अब तक दर्ज नहीं हुई है, जिसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि उसे लगातार न्याय मिलने में देरी हो रही है, जबकि उसने जांच में सहयोग करते हुए सभी आवश्यक जानकारी और प्रमाण उपलब्ध करा दिए हैं।
वहीं दूसरी ओर, डॉ. अयूब अंसारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात कर महिला पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए हैं और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। हालांकि, उनके द्वारा इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस संबंध में डॉ. अयूब अंसारी द्वारा इंडस न्यूज टीवी से कोई संपर्क नहीं किया गया है।

कई चैनलों पर चली खबर के अनुसार, एसएसपी कार्यालय पहुंचने के दौरान उनके साथ कई अन्य डॉक्टर भी मौजूद रहे, जिन्होंने उनके पक्ष में बयान दिए, लेकिन पूरे घटनाक्रम में ब्लैकमेलिंग के आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया।
ऐसे में पूरे मामले में एक तरफ जहां पीड़िता द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत करने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष के आरोप बिना प्रमाण के सामने आने से मामला और अधिक गंभीर होता जा रहा है। अब देखना यह है कि पुलिस जांच कर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कब तक कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय कब मिलता है।

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