बोधगया, 20 फरवरी 2025: बोधगया स्थित भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त करने के लिए चल रहे बौद्ध भिक्षुओं के आमरण अनशन आंदोलन का 9वां दिन चल रहा है, लेकिन बिहार सरकार और केंद्र सरकार को बौद्ध भिक्षुओं के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। लगातार 9 दिन से अनशन पर बैठे बौद्ध भिक्षुओं के स्वास्थ्य की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। अभी तक सरकार ने महाबोधि महाविहार बुद्ध विहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त कर बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है।

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ विलास खरात ने बताया कि आमरण अनशन आंदोलन को समर्थन देने हजारों लोग आंदोलन स्थल पहुंच रहे हैं और विभिन्न माध्यमों से आंदोलन को देश के करोड़ों लोगों का समर्थन मिल रहा है। इसी के कारण आंदोलन को दबाने के लिए महाबोधि महाविहार मैनेजमेंट कमिटी के ब्राह्मण महंत के लोगों के द्वारा आंदोलन स्थल के सामने जानबूझकर फायर ब्रिगेड की गाड़ी खड़ी कर दी गई है ताकि देश, दुनिया के लोगों को पता न चले।

चकमा कम्युनिटी का मिला समर्थन पहुंचे हजारों लोग
डॉ विलास खरात ने बताया कि महाबोधि महाविहार को ब्राम्हण महंत के कब्जे से मुक्त कराने के लिए चकमा बौद्धों ने भी समर्थन दिया। महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में हजारों की संख्या में चकमा बौद्ध लोग पहुंचे और महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का समर्थन किया। चकमा बौद्ध लोगों ने कहा कि बुद्ध की विरासत में ब्राह्मण लोगों का क्या काम है, सरकार को तुरंत ब्राह्मण पुजारी पंडे लोगों को महाबोधि महाविहार मैनेजमेंट कमेटी से बाहर कर सभी बौद्धों को उसमें स्थान देना चाहिए।

लद्दाख के हजारों बौद्ध लोगों का मिला समर्थन
डॉ विलास खरात ने बताया कि महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त करने के लिए लद्दाख के भी हजारों लोग पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। लद्दाख से आए लोगों ने कहा कि हमारे लिए बुद्ध धर्म की विरासत बहुत महत्वपूर्ण है और हम इसे बचाने के लिए लंबा आंदोलन लड़ने के लिए तैयार हैं। लद्दाख से आए बौद्धों ने यह भी कहा कि देशभर में सभी बौद्ध विरासत पर कब्जा किया जा रहा है, उन लोगों ने कहा कि केसरिया स्तूप, सारनाथ, संकिसा सभी जगह ब्राह्मण पुजारियों के द्वारा बुद्ध विरासत के निकट ब्राह्मण मंदिर बनाकर बुद्ध विरासत पर कब्जा किया जा रहा है।

विलास खरात ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से महाराष्ट्र के हजारों लोगों को किया संबोधित
एक तरफ आंदोलन स्थल पर हजारों लोग पहुंच रहे हैं तो दूसरी तरफ आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए डॉ विलास खरात ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र के हजारों लोगों को संबोधित किया और भगवान बुद्ध की विरासत किस प्रकार बचाई जाए इस पर लोगों को विचार दिए।
डॉ विलास खरात ने लोगों से कहा कि बुद्ध की विरासत बचाने के लिए सभी को सामने आना पड़ेगा। विलास खरात ने सभी बहुजन ओबीसी एससी एसटी बौद्ध लोगों से यह भी कहा कि यह विरासत भारत की विरासत है और बहुजनों की विरासत है ब्राह्मण इसे ध्वस्त करके हमारे इतिहास को बर्बाद करने का काम कर रहे हैं।

बौद्ध भिक्षुओं के स्वास्थ्य में लगातार हो रही गिरावट
डॉ विलास खरात ने कहा कि एक तरफ आमरण अनशन की ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है तो दूसरी तरफ महाबोधि महाविहार मैनेजमेंट कमेटी का ब्राह्मण महंत किसी भी कीमत पर आंदोलन को खत्म करना चाहता है। इसके लिए वह विभिन्न तरीके अपना रहा है। डॉ विलास खरात ने कहा बौद्ध भिक्षुओं का स्वास्थ लगातार गिरता जा रहा है और यदि किसी भी बौद्ध भिक्षु के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके लिए सरकार और महाबोधि महाविहार मैनेजमेंट पर कब्जा करके बैठा ब्राह्मण पुरोहित जिम्मेदार होगा।

भारतीय ओबीसी एससी एसटी बहुजन बौद्धों के साथ होता है अपमानजनक व्यवहार
आंदोलन में पहुंचे लद्दाख के एक बौद्ध भिक्षु ने कहा कि महाबोधि महाविहार में आने वाले विदेशी श्रद्धालुओं के साथ ब्राह्मण पुरोहित ठगई करते हैं। जब कोई भारतीय बौद्ध भिक्षु या भारतीय पिछड़े दलित आदिवासी बहुजन बौद्ध समाज का व्यक्ति मंदिर में पहुंचता है तब उसके साथ ब्राह्मण पण्डो के द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है।
भिक्षु ने कहा कि ब्राह्मण महंत भारतीय बौद्धों को महाविहार में न तो कोई भोजन उपलब्ध कराते हैं और न ही कोई बौद्ध भिक्षुओं के रोकने, ठहरने और भोजन की सुविधा की जाती है। देश भर के ओबीसी, एससी, एसटी बहुजनों, बौद्धों के द्वारा दिया जाने वाला करोड़ों रुपए का दान ब्राह्मण महंत कब्जा कर बैठ जाते हैं और उसका दुरुपयोग करते हैं। बौद्ध भिक्षु ने यह भी कहा कि करोड़ों का दान न तो बौद्ध धर्म के प्रचार में प्रयोग होता है और न ही कभी यह पता चलता है कि हमारा करोड़ों रुपए कहां जा रहा है।



