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Thursday, March 12, 2026
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मिलिए देश की पहली बधिर वकील से

कोट्टायम, केरला की रहने वाली सारा सनी की तर्क-वितर्क करने की क्षमता को देखकर उनके पिता अक्सर कहा करते कि तुम वकील बनोगी. इस उलाहने ने न जाने कब सारा के दिल में वकील बनने का ख्वाब बो दिया पता नहीं. लेकिन जैसे-जैसे सारा बड़ी होती गयीं वकील बनने का उनका ख्वाब और पक्का होता चला गया. (Sarah Sunny First Deaf Lawyer of India)

सारा के बुलंद इरादे और सपने पूरा करने के दृढ़संकल्प ने देश को पहला बधिर वकील दिया. सारा जन्म से ही श्रवन बाधित थीं. माँ बेट्टी और पिता सन्नी की 2 अन्य संताने भी सुन नहीं सकती. सारा का भाई प्रतीक फिलहाल टैक्सास में आईटी सेक्टर में कार्यरत है और उनकी जुड़वाँ बहन मारिया एक फ्रेंच ऑडिट फर्म में चार्टेड एकाउंटेंट है. सनी और बेट्टी ने अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पर सारा ध्यान फोकस किया और नतीजा सामने है.

सारा ने बैंगलोर के सेंट जोसेफ़ कॉलेज ऑफ लॉ से एलएलबी की डिग्री हासिल करने से पहले ज्योति निवास कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई की. फिलहाल सारा बैंगलौर के ही ‘सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी रिसर्च’ में प्रेक्टिस करती हैं.

सारा कई न्यायाधिकरणों और मध्यस्थ कार्यवाहियों में वकील के तौर पर प्रस्तुत हो चुकी हैं. सतत अभ्यास के साथ सारा दूसरों के होंठों को पढ़कर उनकी बात समझ लेती हैं. हालांकि सामने वाला तेज गति से बोले तो उन्हें समझने में दिक्कत होती है और इसके लिए वे दुभाषिये का इस्तेमाल करती हैं. सारा के काम का तौर तरीका न्यायिक प्रक्रिया को थोड़ा धीमा जरूर करता है लेकिन जज उनके तर्कों के कायल हुए बिना नहीं रह पाते. न्यायिक प्रक्रिया में शामिल सभी लोग सारा के लिए धैर्य का परिचय देते हैं.

सारा का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया को उन जैसे लोगों के लिए सुगम बनाया जाए तो अन्य लोग भी इस पेशे में आयेंगे. वे कहती हैं कि न्यायलय में दुभाषियों की अच्छी व्यवस्था हो. इस तरह के मामलों में जजों और वकीलों के बीच कम्युनिकेशन गैप को कम करने वाले सॉफ्टवेयर विकसित किये जाएँ.

सारा का सोचना है— विकलांगों को मायूस होने के बजाय अन्य बच्चों की तरह पढ़ना चाहिए. उन्हें हमेशा कुछ बड़ा करने के बारे में सोचना चाहिए और वे ऐसा कर सकते हैं. ऐसा हुआ तो एक दिन उनकी अक्षमताओं के बावजूद लोग उनसे बराबरी का व्यवहार करने को मजबूर हो जायेंगे. इस तरह एक दिन यह दुनिया समावेशी बन जाएगी. मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए, सारा यही सिखाती हैं. (Sarah Sunny First Deaf Lawyer of India)   

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