संतोष शाक्य, सहसंपादक, Indus News TV
1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई जिसके बाद ईरान एक कट्टर शिया इस्लामिक देश बन गया। ईरान की क्रांति के बाद से ही ईरान के शिया मुसलमान बड़ी संख्या में ईसाई बन रहे हैं। इस लेख में मैं आपको ऐसी ही दो ईरानी महिलाओं की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिनका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ लेकिन ईरान की कट्टर शिया इस्लामिक सरकार एवं ईरान के कट्टर इस्लाम से त्रस्त होकर ईसाई बन गईं।
कभी ईरान एक खूबसूरत देश हुआ करता था जहाँ महिलाओं को पुरुषों को बराबर अधिकार प्राप्त थे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई जिसका उद्देश्य ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप को कम करना था लेकिन क्रांति की सफलता के बाद अमेरिका का हस्तक्षेप कम हुआ या नहीं हुआ इसपर लम्बी चर्चा की जा सकती है, लेकिन एक चीज़ जो अच्छी नहीं हुई वह है महिलाओं के अधिकार का ख़त्म हो जाना। 2022 में ही आपने देखा था की नक़ाब न पहनने के कारण 22 वर्षीय माशा अमिनी को गिरफ्तार किया गया और पुलिस कस्टडी में माशा अमिनी की मौत हो गयी जिसको लेकर महिलाओं ने पूरे ईरान में नक़ाब के खिलाफ एवं सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस कस्टडी में माशा अमिनी की मौत के बाद सैंकड़ों ऐसे मामले हो चुके हैं जहाँ मोरल पुलिस शरीया कानून का पालन न करने पर महिलाओं को प्रताड़ित करती है।
लेख में हम जिन दो महिलाओं की बात कर रहे हैं वे हैं मरियम रूस्तमपोर एवं मर्जिया अमीरज़ादा। इन दोनों महिलाओं का जन्म ईरान में हुआ, इसके साथ ही मुस्लिम परिवार में हुआ, लेकिन ईरान की सरकार के नजरिये से असहमत होकर एवं इस्लामिक मान्यताओं से अलग होकर इन दोनों ने ईसाई धर्म अपना लिया। ईसाई धर्म अपनाने एवं ईरान में ईसाई धर्म प्रचार करने के कारण इनको ईरान की जेल में भी रहना पड़ा। मरियम एवं मर्जिया बताती हैं की ईरान में आप इस्लाम के अलावा किसी धर्म का प्रचार नहीं कर सकते, खुले में चर्च चलाने की भी अनुमति नहीं है, मरियम और मार्जिया का ईसाई धर्म से परिचय अंडरग्राउंड चर्च के माध्यम से हुआ।”
मरियम बताती हैं की ईरान में आपको पब्लिक में इस्लाम फॉलो करना ही पड़ता है क्यूंकि यह एक इस्लामिक देश है लेकिन मरियम का परिवार कोई बहुत धार्मिक नहीं था लेकिन मरियम को हमेशा ईश्वर को जानने, समझने और उसके साथ एक आद्यात्मिक सम्बन्ध रखने की इच्छा थी। मरियम ने सभी इस्लामिक नियमों का पालन किया, सभी धार्मिक किताबों को पढ़ा लेकिन उनको लगा ही नहीं की इससे कुछ होगा। मरियम बताती हैं की यह पूरी तरह एक तरफ़ा कनेक्शन था जहाँ ईश्वर कही नजर नहीं आ रहा था फिर उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में सभी इस्लामिक धार्मिक नियमों का पालन करना बंद कर दिया। इसके बाद वह आसमान में देखकर बात करने लगी वह कहती खुदा मुझे रास्ता दिखाओ।
मरियम के लिए सभी रास्ते बंद हो गए थे तभी एक दिन उनकी बहन एक छोटी बाइबिल की पुस्तक लेकर घर आयी जो लगभग 30 पेज की थी, उसने बताया यह ईसाईयत के बारे में है तुम चाहो तो पढ़ सकती हो लेकिन लास्ट पेज मत पढ़ना क्यूंकि यह धर्मान्तरण की प्रार्थना है। मरियम ने अपनी बहन से पुस्तक ले ली और अपने कमरे में जाकर तीन घंटे में उसे पूरा पढ़ डाला और पुस्तक पढ़ने के बाद उसने फील किया की जीसस उससे बात कर रहे हैं, उसे लगा की उसने ईश्वर को पा लिया है। इसके बाद वह 3 घंटे तक रोती रही और जब लास्ट पेज पर पहुंची तो उसने कन्वर्शन प्रेयर पढ़ ली और क्रिस्चियन बन गयी।
लेकिन ईसाई बनना मरियम के लिए कोई फूलों भरा रास्ता नहीं था बल्कि उसने एक ऐसा फैसला ले लिए था जिसमें आगे क्या होगा उसको भी नहीं पता था। वह कहती है कि जीसस के माध्यम से उसने जो पाया था उसको लेकर वह बहुत उत्साहित थी। इसके बाद मरियम ने चर्च जाना शुरू कर दिया और लोगों को ईसाई धर्म और ईसा मसीह के बारे में बताना शुरू कर दिया। इसी बीच मरियम की मुलाकात मार्जिया से हुई और दोनों को लगा की दोनों ही एक जैसे थे और दोनों में ही ईसाइयत को लेकर उसके प्रचार को लेकर उत्साह है।(Maryam and Marziyeh sent to jail in Iran)
मरियम और मार्जिया जानती थीं की बुक स्टोर में बाइबिल बेचना प्रतिबंधित है इसलिए दोनों ने मिलकर ईरान में बाइबिल बांटने का निर्णय लिया और दोनों ने मिलकर 20000 बाइबिल लोगों को वितरित कीं। मरियम और मार्जिया लोगों से बात करतीं लोगों को क्राइस्ट के बारे में बताने के लिए अपने घर पर आमंत्रित करतीं, अपने अपार्टमेंट में ही हाउस चर्च लगातीं। कई वर्षों तक इसी तरह दोनों मिलकर प्रचार करती रहीं। मरियम बताती हैं की ऐसा करते समय उन्हें कभी कोई बुरा अनुभव नहीं हुआ लोग उनकी बात को ध्यान से सुनते थे। दोनों की आस्था इतनी प्रबल थी की कई बार वे मुस्लिम पूजा स्थलों पर जाकर बाइबिल बांटती थीं।
मरियम और मार्जिया अपना काम कर रही थीं लेकिन यह उनके लिए नए खतरे की आहट भी थी इस्लामिक रेवोलुशनरी गार्ड महीनों से उनकी जासूसी कर रहे थे। दोनों को तब बड़ा झटका लगा जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने उनके अपार्टमेंट में पहुंची। मार्च 2009 में मरियम और मार्जिया को ईरान में ईसाई धर्म अपनांने और ईसाईयत का प्रचार करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उनको एक दिन पुलिस स्टेशन में रखा गया और बाद में उन दोनों को Even जेल में भेज दिया गया, यह जेल ईरान की एक खतरनाक जेल मानी जाती है।
जेल में पूंछताछ के दौरान मरियम और मार्जिया को डराया धमकाया गया। दोनों को बेसमेंट की काली कोठरी में रखा गया। जब उनको पुलिस स्टेशन में रखा गया तब रात को उनको सोने के लिए गीले कम्बल दिए गए जिनमें पेशाब की बदबू आ रही थी। तब मरियम को समझ आया कि अधिकतर महिलाएं जो इस पुलिस डिटेंशन सेंटर में आती हैं वे प्रोस्टीटूईट हैं या ड्रग एडिक्ट हैं जो ब्लैंकेट में ही पेशाब कर देती हैं। सोने के लिए कोई बेड नहीं था दोनों को गीले कम्बल के फर्श पर सोना पड़ा।
मरियम बताती हैं की ऐसे समय में जब वह बहुत डरी सहमी हुई थीं उस समय जीसस और ईश्वर के प्रति उनकी आस्था ने हालात से लड़ने में उनकी मदद की। Even जेल में मरियम को बहुत सी महिलाएं मिलीं जिन्होंने उन्हें बताया कि किस तरह सरकार के कट्टर धार्मिक नियमों ने उनके जीवन को बर्बाद कर दिया। महिलाओं ने बताया की ईरान में उनको द्वितीय श्रेणी का नागरिक बना दिया गया है जहाँ उनका कोई महत्व नहीं है।



