तेहरान/नई दिल्ली। ईरान में सरकार विरोधी विरोध-प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
ईरान में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़ी हैं। शुरुआती आर्थिक विरोध अब व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले चुका है। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं।
भारतीय नागरिकों पर असर
ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, व्यापारी और पेशेवर कार्यरत हैं। खासकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की संख्या अधिक है। हालात बिगड़ने के बाद तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने नागरिकों से अनावश्यक आवाजाही से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। दूतावास ने आपात स्थिति में संपर्क के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और कहा है कि स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
भारत-ईरान संबंधों पर नजर
ईरान भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। चाबहार बंदरगाह परियोजना, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में ईरान की अहम भूमिका रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान में अस्थिरता लंबी चली तो इसका असर भारत-ईरान व्यापार और रणनीतिक परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि भारत ने अब तक इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से परहेज़ किया है और शांति व संवाद के जरिए समाधान की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान में जारी घटनाक्रम पर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है और मानवाधिकारों के सम्मान की मांग की है। वहीं ईरानी सरकार ने विरोध-प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार देते हुए सख्त कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।
आगे की स्थिति
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और संवेदनशील हो सकते हैं। भारत सरकार की प्राथमिकता फिलहाल ईरान में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।