बरेली: आज़ादी से पहले 1856 में भारत में विलियम बटलर अमेरिका से आए हुए मिशनरी ने मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च के नाम से भारत मे अपना धार्मिक और समाज सेवा का कार्य शुरू किया था। उतर भारत के अवध और रोहिलखंड मे धार्मिक और समाज सेवा का कार्य मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया या इंडिया मिशन ने अपने कार्य क्षेत्र को 12 क्षेत्रों मे विभाजति किया जिसमे नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस (उत्तर भारत क्षेत्रीय सम्मेलन) सबसे बड़ा क्षेत्रीय सम्मेलन बना जिसकी सीमा सीतापुर से लेकर बरेली मंडल सहित संपूर्ण कुमाऊँ था जिसका मुख्यालय बरेली में था और है। जिसके पास सबसे अधिक जमीन भी थी। ने कई जगह में अपने हॉस्पिटल, कॉलेज, गर्ल्स इंटर कॉलेज, अन्य संस्थान खोले। आधुनिक समय में जब इन जमीनों के दाम बड़े तब नॉर्थ इंडिया रीजनल कांफ्रेंस के पदाधिकारियों के मन मे लालच आया और गैर कानूनी तरीके से मिशन की जमीनों को और संस्थानों को लम्बे समय की लीज पर देकर। अपनी जेबों को भरा जिसमे पादरी सुनील के मसीह, विलियम दिलावर, पादरी परमिंद्र मैसी का नाम सामने आया अदालत से कई की जमानत भी रद्द हुई जिसमे पादरी परमिंद्र मैसी व अन्य के ऊपर कई गंभीर आरोपो मे मुकदमे भी दर्ज हुए। 2025 मे नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस सहित मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया के सभी क्षेत्रीय सम्मेलन का चुनाव हुआ जिसमे नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस के बिशप के पद के लिए “सी जी दयानंद” को चुना जाता है। इसके बाद कई मुकदमों में आरोपी परमिंदर मेसी को नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस का एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी चुन लिया जाता है, कोर्ट से भगोड़ा घोषित फर्जी प्रमाण पत्र देकर के जमानत लेने वाले भूमाफिया सुनील के. मसीह को नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस का ही कोषाध्यक्ष बना दिया जाता है। सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला है की नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस ने बिना किसी अंतरिम सूचना दिए आपस में ही पद बांट लिए गए और घोषणा कर दी गई! 
ऐसे में सवाल उठ खड़ा होता है कि अगर भूमाफिया संपत्तियों को बेचने वाले ही उसके खजांची और पदाधिकारी बनेंगे तो बची हुई संपत्तियां कैसे सुरक्षित रहें! मीडिया द्वारा जब नॉर्थ इंडिया रीजनल कांफ्रेंस के बिशप सी. जी. दयानंद से पूरे मामले पर बात करने का प्रयास किया गया तब उन्होंने बात करने से मना कर दिया।
पूरे घटनाक्रम से कई सवाल खड़े होते हैं जैसे जिनके ऊपर कई मुकदमे हैं जो कोर्ट से भगोड़ा घोसित हैं। इनको ही पदाधिकारी क्यों चुना गया।


