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Saturday, April 25, 2026
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शिल्पी कुशवाहा हत्याकांड में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई, 12 नामजद और 10 अज्ञात पर FIR दर्ज, मौर्य समाज में आक्रोश

हरदोई, 25 अप्रैल 2025। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं… मामला हरदोई के मल्लावां थाने के शिल्पी कुशवाहा हत्याकांड से जुड़ा है, जहां आरोप है कि हत्या के बाद भी पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
बताया जा रहा है कि जब तक मामला सीमित रहा, तब तक सिस्टम खामोश रहा… लेकिन जैसे ही 23 अप्रैल को बड़ी संख्या में लोगों ने गांव पहुंचकर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग का आवाहन किया, उसके बाद अचानक पुलिस की सक्रियता बढ़ती नजर आई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों ने न्याय की मांग को लेकर गांव का रुख किया, वे शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचे थे। न कहीं पथराव हुआ… न किसी प्रकार की हिंसा… और न ही कोई अप्रिय घटना सामने आई। लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हीं लोगों पर मुकदमा दर्ज कर दिया, जो न्याय की मांग कर रहे थे।
एफआईआर के मुताबिक, 23 अप्रैल को गांव के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी करने के आरोप में कई लोगों को नामजद किया गया है। जिनमें अंजली सैनी, राजेश सैनी, लक्ष्मी मौर्य, रोहित कुशवाहा, अंकुर मौर्य, आदित्य मौर्य, सम्राट प्रमोद मौर्य उर्फ सुनील जायस, पियूष कुशवाहा, संदीप मौर्य, पप्पन मौर्य, अमन मौर्य और पप्पू कुमार मौर्य शामिल हैं, इसके अलावा 9-10 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, गांव में आंदोलन कर रहे अधिकांश लोग मौर्य समाज से आते हैं और न्याय की आवाज बुलंद करने गए लोगों का नेतृत्व युवा नेत्री एडवोकेट अंजली सैनी कर रही थीं।
यही वह बिंदु है, जहां से मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। मौर्य समाज को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का कोर वोटर माना जाता रहा है… लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि जब यही समाज न्याय की मांग करता है, तो उसके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना तेज हो गई है और बड़ी संख्या में लोग आक्रोशित नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस तरह के मामलों को समय रहते नहीं संभाला गया, तो इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है और प्रदेश में 9 से 10% संख्या रखने वाला मौर्य समाज और उसके साथ पिछड़े वर्ग की अन्य जातियां भारतीय जनता पार्टी से किनारा कर सकती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है… क्या न्याय की मांग करने वालों को ही आरोपी बनाया जाएगा… या फिर पीड़िता को इंसाफ दिलाने की दिशा में निष्पक्ष कार्रवाई होगी?
फिलहाल, यह मामला कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है… और आने वाले समय में इसका असर कितना बड़ा होगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
Santosh Shakya
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संतोष शाक्य Indus News TV के Special Correspondent हैं। संतोष शाक्य उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखण्ड यूनिवर्सिटी बरेली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। विज्ञान के साथ इतिहास, सामाजिक विज्ञान, राजनीति, धम्म, दर्शन एवं अध्यात्म आदि संतोष शाक्य के पसंदीदा विषय हैं। इसके साथ संतोष शाक्य एक एंटरप्रेन्योर, मोटिवेशनल स्पीकर, लेखक, विचारक, पत्रकार, Life कोच, आध्यात्मिक शिक्षक भी हैं। जो मोटिवेशन, बिजनेस प्रमोशन, वेलनेस टॉक & Meditation के जरिए लोगों की मदद करते हैं। इसके साथ संतोष शाक्य एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी के संचालक भी हैं। संतोष शाक्य के द्वारा कवर की गयी प्रमुख स्टोरी एवं उनके लेख पढ़ने के लिए आप Indus News TV की वेबसाइट https://www.indusnewstv.com को लॉग-ऑन कर सकते हैं। संतोष शाक्य के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप उनकी वेबसाइट https://www.santoshshakya.com भी विजिट कर सकते हैं।
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