Indus News TV Live

Thursday, March 12, 2026
spot_img

बरेली: इज्जतनगर रेलवे कैंटीन ध्वस्त होने की घटना सुनकर युवा दुकानदार की दिल का दौरा पड़ने से मौत

बरेली:  इज्जतनगर रेलवे कैंटीन बाजार प्रकरण पर चल रही रस्साकसी के बीच एक सितंबर शाम लगभग सात बजे बाजार के युवा दुकानदार की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। बाजार बचाने को दुकानदार नेताओं और अफसरों से लगातार गुहार लगा रहे हैं। 31 अगस्त को दुकानदारों की मदद के लिए समाजवादी पार्टी से शहर विधानसभा प्रत्याशी रहे नगर निगम पार्षद राजेश अग्रवाल पहुंचे थे। उसी दिन देर शाम कमलेश की तबीयत बिगड़ी। परिजन उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दरम्यान उन्होंने दम तोड़ दिया। खबर लगते ही पूरे बाजार में शोक की लहर दौड़ गई। दुकानदारों का कहना है कि बाजार हटने के आदेश से सभी गहरे मानसिक तनाव में हैं, कमलेश इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए। आजीविका छिन जाने पर परिवार पर आने वाले संकट की चिंता कुछ भी करा सकती है।

 

परतापुर निवासी कमलेश की चना, परमल आदि की दुकान उनके दादा के समय की है, उनके पिता भी इस दुकान पर बैठते थे और बाद में कमलेश संभालते थे।

 

कमलेश की मृत्यु की खबर सुनकर सभी दुकानदार मंगलवार सुबह शोकाकुल परिवार से मिलने कमलेश के घर पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया।सिटी श्मशान भूमि पर कमलेश का अंतिम संस्कार किया गया।

 

सोमवार को सपा नेता राजेश अग्रवाल की अगुवाई में दुकानदार डीआरएम से भी मिले थे, लेकिन डीआरएम ने स्थानीय स्तर पर कोई समाधान न निकल पाने की मजबूरी बताकर हाथ खड़े कर दिए। इससे पहले दुकानदार सांसद छत्रपाल गंगवार और शहर विधायक डॉ अरुण कुमार सक्सेना से भी मदद की गुहार लगा चुके हैं। हाई कोर्ट का रुख करने पर भी विचार किया जा रहा है।

 

इज्जतनगर रेलवे कैंटीन बाजार लगभग 47 साल पुराना है, जहां जरूरत का लगभग हर सामान मिलता है। पहले यह बाजार रेलकर्मियों के लिए सहूलियत थी, लेकिन बाद में यह आसपास के इलाके के लोगों का महत्वपूर्ण बाजार बन गया और इज्जतनगर रेलवे मंडल से तहबाजारी का ठेका होने लगा।

 

तहबाजारी के ठेके में रेलवे एक निश्चित एरिया को खाली स्थान बताकर आवंटित करता रहा है, जिसके एवज में ठेकेदार को मोटी रकम एडवांस जमा करने के साथ ही सिक्योरिटी मनी भी जमा करना होती थी। ठेकेदार को यह छूट थी कि वह अपनी मर्जी से दुकानदारों से रोजाना जगह का किराया वसूल सकता है।

 

बताया जा रहा है कि पिछला तहबाजारी ठेका 45 लाख रुपए से ज्यादा का हुआ और 12 लाख रुपए सिक्योरिटी मनी जमा कराई गई।

 

ठेकेदार असलम रजा ने बताया कि कच्ची फड़ वाले दुकानदारों से रोजाना 75 रुपए और टिन शेड वाले दुकानदारों से रोजाना सौ रुपए लिए जाते थे। सालभर की कुल तहबाजारी वसूली और ठेके की रकम में मामूली ही अंतर है। उन्होंने यह भी बताया कि बाजार खाली न होने की सूरत में सिक्योरिटी मनी जब्त हो जाएगी।

 

असलम रजा ने कहा, रेलवे कैंटीन बाजार की ठेकेदारी कोई मुनाफे का सौदा नहीं है, बस मान सम्मान के लिए लेकर बरसों से बने बाजार को टिकाए रखने कोशिश है। इससे अब रेलवे को ही फायदा हुआ है और दुकानदारों की आजीविका चलती रही है। फिलहाल सब बहुत निराश हैं और अवसाद से घिर गए हैं।

Related Articles

Recent