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Thursday, March 12, 2026
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क्या लाहौर हाईकोर्ट तोड़ देगा शिहाब का ख़्वाब, वीजा की अपील करने वाले को यह कहकर फटकारा

भारत के आख़िरी छाेर केरल से लगातार चार महीनों तक 3000 किलोमीटर पैदल चलकर पंजाब के बाघा बॉर्डर पहुंचे शिहाब चित्तूर को पाकिस्तान की हुकूमत के बाद अदालत से भी मायूसी मिली है. लाहौर हाईकोर्ट ने सरवर ताज की वो याचिका ख़ारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने शिहाब को पाकिस्तान का वीज़ा दिए जाने की अपील की थी. हाईकोर्ट ने सरवर ताज को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की. कहा, ऐसा लगता है कि आप भारत के जासूस हैं. (Lahore High Court Shihab)

शिहाब चित्तूर पिछले 2 जून को केरल के मल्लापुरम से पैदल हज के लिए निकले थे. सऊदी अरब की उनकी यात्रा का रूट बाघा बॉर्डर होकर वाया पाकिस्तान, इराक, ईरान, कुवैत- सऊदी अरब तक करीब 8640 किलाेमीटर का था. शिहाब की यात्रा के दरम्यान ये दावा सामने आया कि सभी पांचों देशों से उनका वीज़ा क्लियर हो चुका है. लेकिन अक्टूबर की शुरूआत में जब वह बाघा बॉर्डर पहुंचे, तो पाकिस्तान में दाख़िल नहीं हो पाए. इसलिए क्योंकि उनके पास वीज़ा नहीं था.

चूंकि भारत में चार महीनों में शिहाब की पैदल हज यात्रा ने देश-दुनिया की मुस्लिम बिरादरी में सुर्खियां बंटोरी हैं. इसलिए जब वह बाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान से वीज़ा मिलने की उम्मीद में बैठे हैं. तो उनकी एंट्री के लिए पाकिस्तान के सरवर ताज लाहौर हाईकोर्ट पहुंच गए. इस मांग के साथ कि भारतीय नागरिक शिहाब चित्तूर, जोकि पैदल हज पर जा रहे हैं. तीन हज़ार किलोमीटर का सफ़र तय करके बाघा बॉर्डर पहुंचे हैं. लेकिन पाकिस्तान से वीज़ा न मिलने के कारण बॉर्डर पर ही हैं. पाकिस्तान सरकार को वीज़ा जारी करने का आदेश दिया जाए.

लाहौर हाईकोर्ट के जस्टिस शाहिद वहीद ने याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सरवर ताज से शिहाब के पिता का नाम पूछा. सरवर ने कहा, उन्होंने एक मुस्लिम की हैसियत से याचिका लगाई है. इस पर जस्टिस वहीद ने कहा, ऐसा लगता है कि आप भारत के जासूस हैं. इस कठोर टिप्पणी के साथ लाहौर हाईकोर्ट ने शिहाब के वीज़ा से जुड़ी सरवर ताज की याचिका ख़ारिज कर दी. (Lahore High Court Shihab)

हालांकि सरवर ताज ने भारतीय हज यात्री शिहाब चित्तूर के लिए पाकिस्तान का बॉर्डर खोले जाने की मांग बुलंद रखने का इरादा ज़ाहिर किया है. उन्होंने कहा कि सिंगल बेंच के आदेश को हाईकोर्ट की अपर बेंच के सामने रखेंगे. जल्द ही इस संबंध में वह एक अपील दायर करेंगे.

आपको बता दें कि शिहाब चित्तूर पेशे से डॉक्टर हैं. 29 साल के शिहाब की बचपन की एक ख़्वाहिश थी कि वह पैदल हज करेंगे. हज इस्लाम के पांच फर्जों में से एक है. शिहाब के पैदल हज पर जाने को लेकर शुरुआत में भारत में ही उनकी आलोचना भी हुई कि ये सब शोहरत पाने के लिए कर रहे हैं. लेकिन बाद में उनकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई. और भारत-पाकिस्तान के आम मुसलमानों ने उन्हें बेइंतहां प्यार दिया.

भारत में केरल से होकर कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा होकर शिहाब पंजाब के बाघा बॉर्डर पहुंचे हैं. ये सफर बेहद ख़ास है. इस मायने में भी कि भारत ही नहीं बल्कि एशिया में 21वीं सदी में शिहाब ऐसे इकलौते शख़्स हैं, जिन्होंने पैदल हज का इरादा किया. और तीन हज़ार किलोमीटर का सफर तय करके बाघा बॉर्डर पहुंचे हैं. लेकिन उनकी यात्रा का यही आख़िरी पड़ाव बनता दिखाई दे रहा है.

चूंकि पुलवामा कांड के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच वीज़ा प्रक्रिया ठहरी चल रही है. इससे दोनों देशों के आम लोग परेशान हैं, जो एक-दूसरे देश में आना-जाना चाहते हैं. (Lahore High Court Shihab)

शिहाब को वीज़ा न मिलने पर पाकिस्तान को लेकर भारत के आम मुसलमानों में नाराज़गी भी दिखाई दे रही है. तो कुछ सवाल भी हैं. वो ये कि क्या शिहाब बिना वीज़ा कंफर्मेंशन के इस यात्रा के लिए निकल पड़े थे. शिहाब जब पैदल हज के लिए निकले थे, उसी दरम्यान कई और लोग भी सामन लेकर चल पड़े थे, तब उनकी आलोचना हुई और इस तरह वह शांत होकर बैठ गए. लेकिन शिहाब जिस तरह से आगे बढ़ रहे थे. वो सब कुछ वेल प्लान्ड था. तो फिर आखिर में पाकिस्तान से वीज़ा न मिलने की अड़चन कैसे आ गई?

सवाल और भी हैं. शिहाब की इस यात्रा के लीगल पहलुओं पर हम अगली वीडियो में बात करेंगे. आपसे अपील है कि इंडस न्यूज़ चैनल को सब्सक्राइब करें. फेसबुक पेज पर हमें फॉलो करेंगे.

शिहाब चित्तूर बाघा बॉर्डर पर हैं. पिछले दस दिनों से बस इसी इंतज़ार में किसी तरह से पाकिस्तान का वीज़ा मिल जाए.


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