हैकर क्रिप्टो क्यों मांगते हैं ?
– सच्चिदानंद सिंह
यदि कंप्यूटर को एक वायुयान मानें तो हैकर उस यान के हाईजैकर हैं. जैसे हाईजैकर यान को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं वैसे ही हैकर कंप्यूटर को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं. जैसे हाईजैकर कहते हैं कि यदि उनकी मांगे पूरी नहीं की गयीं तो वे यान के यात्रियों की ह्त्या कर देंगे वैसे ही हैकर कहते हैं कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गयीं तो वे कंप्यूटर के सारे फाइल, उसके अंदर जमा सभी आँकड़े डिलीट कर देंगे. (Why hackers ask crypto)
हाईजैकर प्रायः राजनैतिक मांगें करते हैं – कभी कभी साथ में आर्थिक भी. दो दशक से कुछ अधिक हुए, काठमांडू से दिल्ली आते एक यान पर पाकिस्तान के आईएसआई से मदद पाते हाईजैकरों ने कब्जा कर लिया था. उनकी मांग, तीन आतंकवादियों की रिहाई, पूरी की गयी फिर भी पूरे हादसे में एक मृत्यु भी हुई.
तत्कालीन विदेशमंत्री जसवंत सिंह कांधार गए थे. उनके साथ एक बहुत बड़ा ‘डब्बा’ भी था – करीब पाँच फ़ीट से अधिक ऊंचा. कहा गया था कि वे उसमे चाय ले जा रहे थे अफ़ग़ानी राजनेताओं के लिए. अफवाह गर्म थी कि उसमे नोट भरे थे – शायद डॉलर. (Why hackers ask crypto)
हाईजैकर नोट मांगते हैं, अमूमन हमेशा डॉलर. हैकर भी पैसे मांगते हैं, अमूमन हमेशा क्रिप्टो.
० क्रिप्टो वॉलेट
यदि क्रिप्टो नहीं मांगेंगे तो तो कोई मुद्रा मांगेंगे. मुद्रा को एक जगह से दूसरी जगह या तो उनके भौतिक रूप में ले जाया जा सकता है, जैसे शायद जसवंत जी ले गए थे, या एलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर. भौतिक रूप में ले जाना आसान नहीं होता विशेषकर यदि बड़ी राशि हो. और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर बस बैंक खाते में हो सकता है जिसे खोलने के लिए हाईजैकर को केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी जो स्पष्ट कारणों से वे नहीं चाहते.
क्रिप्टो के बस इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर ही हो सकते हैं – क्रिप्टो वॉलेट में. क्रिप्टो वॉलेट के लिए कोई केवाईसी की जरूरत नहीं होती. क्रिप्टो वॉलेट को मोटे तौर पर एक कंप्यूटर प्रोग्राम समझा जा सकता है जिसकी दो कुंजियाँ होती हैं – एक आम कुंजी जो सबों को पता है जो उस वॉलेट का इंटरनेट पर ‘पता’ है. यदि किसी को कुछ क्रिप्टो भेजने हैं तो वह आम कुंजी के पते से भेज सकता है. दूसरी ख़ास कुंजी, निजी कुंजी जो बस उस वॉलेट के स्वामी के पास रहती है. वॉलेट से निकासी इस ख़ास कुंजी के बिना नहीं हो सकती. (Why hackers ask crypto)
पहला क्रिप्टो, बिटकॉइन, बनाने वाले का छद्म नाम है सातोशी नाकामोतो. सातोशी का ही पहला क्रिप्टो वॉलेट था. दूसरा सातोशी के मित्र हैल फिने का. सातोशी द्वारा विकसित किये बिटकॉइन क्लाइंट वॉलेट को पहली बार आजमाने वाले हैल ही थे. वॉलेट को जाँचने के लिए सातोशी ने हैल के वॉलेट में दस बिटकॉइन भेजे थे – पहला क्रिप्टो ट्रांजैक्शन. उसके बाद दावानल की तरह क्रिप्टो दुनिया भर में छा गया.
० बड़ी रकम नहीं मांगते
इस पृष्ठभूमि के बाद आते हैं ऐइम्स के कम्प्यूटर सिस्टम को मुक्त करने के लिए तथाकथित फिरौती पर – कहते हैं 200 करोड़ रूपये. कुछ कहते हैं यह गलत बात है! ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. दो सौ करोड़ बड़ी रकम है. जब पिछले वर्ष एक हैकर ग्रुप आरईविल ने पचास मिलियन डॉलर फिरौती की मांग की थी तब इन मामलो के विशेषज्ञों ने आश्चर्य प्रकट किया था.
आम तौर पर हैकर बहुत बड़ी रकम नहीं मांगते. बस इतनी कि कंपनियां चुप चाप दे दें और मामला पुलिस अधिकारियों तक नहीं पँहुचे; क्योंकि लाख गोपनीयता के बाद भी ब्लॉकचैन – क्रिप्टो के लेजर – देखे जा सकते हैं, फिरौती की रकम पहचान में आ सकती है और फिर वह रकम किसी काम की नहीं रहती. (Why hackers ask crypto)
क्रिप्टो की लेन देन में अधिकतर अपराधी पहचान में आ जाते हैं, अपनी चोरी की कमाई से हाथ धो बैठते हैं और गिरफ्तारी से बस इस लिए बच पाते हैं क्योंकि वे चीन / उत्तरी कोरिया जैसे देशों में छुपे रहते हैं.
० फिर भी हैकर क्रिप्टो ही क्यों मांगते हैं?
पिछले साल अमेरिका की एक ईंधन आपूर्ति पाइपलाइन कंपनी ‘कोलोनियल पाइपलाइन’ के कम्प्यूटर सिस्टम पर रैनसमवेयर आक्रमण हुआ था – वैसा ही जैसा ऐइम्स के मामले में सुना जा रहा है / था: हैकर कम्प्यूटर सिस्टम में कोई कूट (एन्क्रिप्शन) डाल कर उसे बंद कर देते हैं फिर कूट हटाने (डेक्रिप्शन) के लिए पैसे मांगते हैं. कोलोनियल से चार मिलियन डॉलर क्रिप्टो में मांगे गए थे. कोलोनियल ने दिए. एक महीने में एफबीआई तेईस क्रिप्टो वॉलेट को खंगालते हुए अपराधियों तक पंहुच गयी और अधिकतर राशि की वसूली हो सकी. (Why hackers ask crypto)
क्रिप्टो वॉलेट में क्या है इसे जान पाना बहुत कठिन नहीं है. फिर क्रिप्टो को जब भी दूसरी मुद्रा (डॉलर या रुपया) में बदला जाएगा अपराधियों को क्रिप्टो एक्सचेंज में जाना पडेगा जहाँ केवाईसी लागू होता है. यदि कोई व्यक्ति चोरी के क्रिप्टो को बस अपने वॉलेट में रहने दे तो शायद वह पकड़ में नहीं आएगा. लेकिन यदि उसे बस वॉलेट में ही रखना है तो उसे मांगना ही क्यों?
एक ही कारण दीखता है अपराधियों द्वारा क्रिप्टो मांगने का – क्रिप्टो को दुनिया में कहीं भी भेजा जा सकता है – किसी सेन्ट्रल बैंक को कोई खबर नहीं जाएगी. (Why hackers ask crypto)
(ये लेखक के निजी विचार हैं, सोशल मीडिया से साभार)