रामपुर में आज़म ख़ान का चैप्टर ख़त्म या पिक्चर अभी बाक़ी है-दोस्त
आज़म ख़ान रामपुर हार गए आज़म ख़ान के रामपुर को फ़तह कर लिया रामपुर में आज़म ख़ान का चैप्टर ख़त्म समाजवादी पार्टी का सबसे मज़बूत क़िला रामपुर ढह गया रामपुर उप-चुनाव में समाजवादी पार्टी के आसिम राजा की हार के बाद कुछ ऐसा ही माहौल है. भाजपा के आकाश सक्सेना रामपुर के नए विधायक बन गए हैं. उन्होंने आसिम राजा को 34,136 वोटों के फासले से हराया है. (Azam Khan chapter over)
हार का अंतर बड़ा है. लेकिन क्यों और कैसे? समाजवादी पार्टी और आज़म ख़ान के आरोपों को अलग रखकर इसे समझने की कोशिश करते हैं. ये भी समझेंगे कि क्या वाकई में रामपुर में आज़म ख़ान का चैप्टर ख़त्म हो गया है.
नौ महीने पीछे चलते हैं. इसी साल 2022 के मार्च में यूपी का विधानसभा चुनाव हुआ. तब आज़म ख़ान जेल में थे. सांसद थे. जेल से विधायकी का चुनाव लड़ा. इसमें आज़म ख़ान को 1 लाख 31 हज़ार 225 वोट हासिल हुए थे. जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने 76 हज़ार 84 वोट प्राप्त किए थे. क़रीब 55 हज़ार के अंतर से आज़म ख़ान से आकाश सक्सेना को हराया था. (Azam Khan chapter over)
नौ महीने बाद फिर 5 दिसंबर को इसी रामपुर सदर सीट पर उप-चुनाव के लिए दोबारा वाेट डाले गए. तो यहां कुल 1 लाख 31 हज़ार 208 ही वोट पड़ सके. यानी क़रीब 33.94 प्रतिशत मतदात हुआ, जो रामपुर के इतिहास में शायद अब तक का सबसे कम मतदान दर्ज किया गया होगा.
इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि, पिछले चुनाव में आज़म ख़ान को जितने वोट मिले थे–1 एक लाख 31 हज़ार 225. इस बार उससे भी 17 वोट कम का कुल मतदान हुआ है.
रामपुर शहर विधानसभा सीट पर 3 लाख 87 हज़ार वोटर हैं. फिर ऐसी क्या वजह रही कि पिछले चुनाव में जहां 59 प्रतिशत मतदान हुआ था, नौ महीने बाद 26 फीसदी घटकर वो केवल 33.94 प्रतिशत यानी पासिंग मार्क्स के जितना रह गया. रामपुर में वोटिंग प्रतिशत क्यों घटा? क्या रामपुर के लोगों में वोट डालने को लेकर अब कोई दिलचस्पी नहीं रह गई… या फिर किसी तरह के दबाव में घर से नहीं निकले. (Azam Khan chapter over)
जैसा कि विपक्षी सपा का आरोप है. कम से इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को स्थानीय टीम से ये तथ्य ज़रूर जान लेना चाहिए. ये लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक रहेगा. क्योंकि अगर लोगों में मतदान को लेकर रुचि घट रही है तो भी ये लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है और अगर मतदाता किसी तरह के दबाव में वोट डालने नहीं जा रहे हैं तो भी ये लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है. दोनों सवाल गंभीर हैं.
आज़म ख़ान, आसिम राजा और ख़ुद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर उप-चुनाव में पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप का आरोप लगा चुके हैं. दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन का कहना है कि चुनाव और मतगणना शांतिपूर्वक हुई. और चुनाव के दरम्यान कहीं से कोई शिकायत नहीं मिली. (Azam Khan chapter over)
जहां तक रामपुर से आज़म ख़ान के चैप्टर ख़त्म होने का सवाल है, तो अभी इसका जवाब वोटिंग प्रतिशत के ईदगिर्द टिका है. भाजपा के निर्वाचित विधायक आकाश सक्सेना का वोट ज़रूर बढ़ा है. पिछले चुनाव में जहां उन्हें 76 हज़ार वोट मिले थे, इस बार पांच हज़ार की बढ़त के साथ 81 हज़ार से अधिक वोट प्राप्त हुए हैं. आकाश सक्सेना की जीत बड़ी है. लेकिन वोटों का अंतर उतना बड़ा नहीं है, जिससे ये समझा जा सके कि रामपुर में आज़म ख़ान का चैप्टर अब ख़त्म हो गया है.
इंडस न्यूज़ ने रामपुर उप-चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट की थी. आज़म ख़ान की जोशीली जनसभाओं को समझने का भी प्रयास किया. इसलिए भी क्योंकि जिस तरह से आज़म खान आक्रामक और एग्रेसिव होकर बोल रहे थे. भावुक स्पीच दे रहे थे. उनके क़रीबियों ने इसका कारण यही बताया था कि दरअसल, वो लोगों के मन से डर निकाल रहे हैं और उन्हें बूथ तक खींचने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि इससे पहले लोकसभा के उप-चुनाव में कम वोटिंग के कारण आसिम राजा, भाजपा प्रत्याशी से हार चुके थे. (Azam Khan chapter over)