डॉ .सोमनाथ आर्य
शाहकुंड में बड़े पैमाने पर बौद्ध प्रतिमा और बौद्ध स्तूप को जान बूझ कर तोड़ा गया। शाहकुंड से लगातार बौद्ध कालीन मूर्तियों का खुदाई से मिलना इस बात का संकेत देता है। तथागत बुद्ध की काले ग्रेनाइट की अमिताभ मुद्रा वाली प्रतिमा आज भी शाहकुंड तालाब के पास शिवालय के बाहर बरामदे पर रखी हुई है। इसी जगह पर दूसरी शाक्यसिंह अर्थात सिंहनाद की बौद्ध प्रतिमा भी रखी हुई है जो धूल धूसरित हो रही है। (Buddhist Stupas And Statues)

बौद्धकालीन ऐसे अनगिनत स्तूप, तोरण द्वार के हिस्से शाहकुंड में कई अलग अलग जगहों पर नजर आती है। अब बड़ा सवाल है कि शाहकुंड में बड़े पैमाने पर बौद्ध प्रतिमा और बौद्ध स्तूप को किसने तोड़ा होगा ? तो इसका जबाब हमें प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर की बहुचर्चित पुस्तक अशोक और मौर्य साम्राज्य का पतन में मिलता है। जिसमें लिखा गया है कि अशोक ब्राह्मणों के विरोध का सामना करने में पर्याप्त रूप से समर्थ था लेकिन उसकी मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों और ब्राह्मणों के बीच एक संघर्ष उठ खड़ा हुआ। (Buddhist Stupas And Statues)

यह संघर्ष पुष्यमित्र के शक्ति ग्रहण करने तक जारी रहा और यह महान ब्राह्मण विद्रोह का प्रतीक था। पुष्यमित्र का बौद्ध धर्म के उग्र विरोधी होने का बहुत बार उल्लेख किया गया है। बौद्ध साहित्य का कहना है कि ख्याति प्राप्त करने के उद्देश्य से पुष्यमित्र ने निश्चय किया कि अगर एक कुकर्म भी उसे प्रसिद्ध बनाए तो वह क्षम्य है। लोगों से यह पूछने पर कि अशोक को कीर्ति क्यों मिली, उसे उत्तर मिला कि इसका कारण अशोक का बौद्ध धर्म के लिए 84,000 स्तूपों का निर्माण करवाना था। (Buddhist Stupas And Statues)

इसके बाद पुष्यमित्र ने निश्चय किया कि वह इन 84,000 स्तूपों को नष्ट कर ख्याति प्राप्त करेगा। इतना ही नहीं मौर्य सम्राट बृहद्रथ को सेना का निरीक्षण करते समय पुष्यमित्र द्वारा छल से उसकी हत्या की गई। इस हत्या के बाद पुष्यमित्र ने कहा कि मौर्य काल में बौद्ध धर्म के प्रचार ने ब्राह्मण सामजिक और धार्मिक व्यवस्था को धक्का पहुँचाया। एक शुद्र को सम्राट वे नहीं मान सकते। पुष्यमित्र के सिंहासन पर बैठने के बाद कई बौद्ध विहार और मूर्तियों को तोड़ा गया। संभव है कि शाहकुंड भी पुष्यमित्र के कोपभाजन का शिकार हो गया। (Buddhist Stupas And Statues)


