मानव तस्करी : सुरेश की आंखें फोड़ी, हाथों के पंजे तोड़े और जिस्म दागकर भिखारी गैंग के हाथों 70 हज़ार में बेच दिया
हट्टे-कट्टे इंसान को अपाहिज बनाकर, उससे भीख मंगवाने का धंधा कितना डरावना है. एक ज़िंदा लाश में बदल दिए गए सुरेश माझी की हालत से इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है. कानपुर के सुरेश माझी, जो छह महीने पहले एक हस्ट-पुष्ट नौजवान हुआ करते थे. बेरोज़गारी में काम की तलाश उन्हें एक ऐसे नर्क की तरफ़ लेकर गई, जिसे जल्लादों ने बनाया है. (Human smuggling Suresh’s eyes)
सुरेश माझी को नौकरी देने के लिए एक घर पर ले जाया गया. और वहां उन्हें बंधक बना लिया और क़रीब 12 दिन तक क़ैद रखा. फिर आंखों में कैमिकल झोंककर अंधा कर दिया. सुरेश के शरीर को आग से जलाया. हाथों के पंजे तोड़ दिए. तमाम यातना के बाद उन्हें दिल्ली के एक भिखारी गैंग के हाथों 70 हज़ार रुपये में बेच दिया गया.
कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र के काली मठिया के रहने वाले सुरेश को यातना के ज़ख़्मों ने मरने की हालत में पहुंचा दिया. तब गिरोह ने उन्हें कानपुर में फिंकवा दिया. मानव तस्करी की इस घटना ने हर आम और ख़ास इंसान को हिलाकर रख दिया. काफ़ी हंगामे के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया. सुरेश मौत ज़िंदगी से जूझ रहे हैं. उनका इलाज़ चल रहा है. एक आंख की रौशनी पूरी तरह से जा चुकी है तो दूसरी आंख की रौशनी वापस आने की थोड़ी बहुत संभावना है. लेकिन 30 साल के सुरेश अब एक ज़िंदा लाश बन चुके हैं. उनके केस में बस यही हक़ीक़त है. (Human smuggling Suresh’s eyes)
मानव तस्करी यानी इंसानों की ख़रीद-फ़रोख़्त दुनिया के सबसे घिनौने और परेशान करने वाले मामलों में से एक है. भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में ऐसे कई गिरोह हैं, जो इंसानों का बाज़ार चलाते हैं. रिसर्च गेट पर प्रकाशित ग्लोवर स्टडी के मुताबिक, थाईलैंड में क़रीब 8 लाख बच्चों को सेक्स धंधें में ढकलने के लिए खरीदा और बेचा गया. इसी तरह श्रीलंका में दो लाख और भारत में भी.
मानव तस्करी के शिकार बच्चों, महिलाओं को सेक्स, गुलामी, भीख मंगवाने, मज़दूरी और मानव अंगों की तस्करी के लिए खरीदा-बेचा जाता है. नेशल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB)की इसी साल की रिपोर्ट बताती है कि साल 2021 में मानव तस्करी के क़रीब 2189 केस दर्ज किए गए. जिनमें 6533 पीड़ितों की मानव तस्करी का आरोप लगा. इंवेस्टिगेशन के दौरान 6,213 बच्चों को रिकवर किया गया, जबकि 320 बच्चों का कोई सुराग़ नहीं है. (Human smuggling Suresh’s eyes)
मानव तस्करी के सबसे ज़्यादा मामले उड़ीसा से सामने आए, जहां करीब 1500 बच्चों की सौदेबाजी हुई. दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है यहां 918 पीड़ितों के परिवारों ने रिपोर्ट लिखाई. मानव तस्करी के मामलों में सज़ा की रफ़्तार काफ़ी धीमी है. साल 2021 में महज 64 आरोपी कंविक्टेड हो पाए हैं.
ये ऐसे मामले हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़े हैं. लेकिन भारत में मिसिंग यानी ग़ायब होने वाले बच्चों का आंकड़ा काफ़ी बड़ा है. तब, जब देश के अलग-अलग हिस्सों से बच्चा चोरी गैंग के सक्रिय होने की ख़बरें और अफ़वाहें दोनों एक साथ सामने आती रहती हैं. हाल ही में यूपी के कई हिस्सों में बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की सूचना फैली. हालांकि यूपी पुलिस ने इसका खंडन करते हुए महज अफ़वाह बताया. लेकिन इसी बीच में मथुरा और एक-दो अन्य जगहों से चोरी किए गए बच्चों को रिकवर भी किया गया.
भारत में साल 2021 में कुल 1.21 हज़ार से ज़्यादा बच्चों के ग़ायब होने का आंकड़ा है. इनमें 77 हज़ार से अधिक बच्चे पिछले साल गायब हुए थे, जबकि 43 हज़ार बच्चे ऐसे हैं, जो पिछले सालों से मिसिंग चल रहे हैं. मिसिंग और रिकवरी के डाटा को देखें तो साल दर साल ग़ायब होने वाले औसतन 40 हज़ार ऐसे बच्चे हैं, जो रिकवर ही नहीं हो पाते हैं. (Human smuggling Suresh’s eyes)
अब सवाल ये है कि हर साल जो लाखों बच्चे लापता होते हैं और उनमें से कुछ हज़ार बच्चे रिकवर नहीं हो पाते हैं. आख़िर वो हैं कहां. उनका क्या होता है. वे ज़िंदा भी हैं या नहीं. हैं तो किस हाल में और किस काम में लगे हैं. मानव तस्करी और ग़ायब बच्चों की रिपोर्ट को मिलाकर देखने पर ऐसे बहुतेरे सवाल पैदा होते हैं, जो पैरेंट्स को परेशान करते हैं.
इंसानों का बाज़ार चलाने वालों ने जब 30 साल के सुरेश माझी को अपाहिज बनाकर भीख मांगने के लिए सड़क पर डाल दिया. तो क्या इनकी क्रूरता की कोई थाह हो सकती है. सुरेश माझी मामले में कानपुर के विजय और दिल्ली के राज नागर के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है. इनकी धरपकड़ के लिए पुलिस दबिश दे रही है. सुरेश माझी की घटना के बहाने स्थानीय मीडिया ने कुछ पुराने मामलों को रिपोर्ट्स में जगह दी है, जिनमें से अकेले कानपुर में ही पिछले दस सालों में से 100 से ज्यादा मिसिंग के मामले हैं.