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Thursday, March 12, 2026
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अबू होरैरा की कविता: चमार टोला का चमार

चमार टोला का चमार


उसी टोला का हलालखोर
एक हिन्दू, दूसरा मुसलमान (Partiality With Pasmanda Muslim) 
एक को ताली दूसरे को गाली
पहले की नई पीढ़ी हाकिम होकर
अब अपने घर का कचरा
हलालखोर से उठवा रहा है।
इसी तरह कई सदियाँ गुज़र गयी हैं
और गुज़रती रहेंगी
एक की पदोन्नति होती जा रही है
और दूसरे की लगातार अवनति
एक को अनेकों सुविधाएं
दूसरे को ठेंगा
एक पर अत्याचार के लिए कानून
दूसरे पर हुए अत्याचार का कोई मोल नहीं
विभिन्नताओं के इस महान देश में
आह! ऐसा तिरस्कार।
सोचता हूँ
काश! इस देश में केवल ईश्वर होता
अल्लाह न होता
तो आज दोनों ही हाकिम होते।

 

~डॉ. अबू होरैरा
अतिथि प्राध्यापक
हिन्दी विभाग
मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद (तेलंगाना) 500032
पसमांदा कार्यकर्ता


यह भी पढ़ें: आरक्षण: दलित मुसलमानों पर डॉ.अबू होरैरा की कविता

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