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Tuesday, March 10, 2026
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सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानि सीबीआई का परिचय

आजकल सीबीआई, ईडी आदि जांच एजेंसियां अक्सर चर्चा में रहती हैं. कोई इनके निष्पक्ष जांच एजेंसी होने की बात करता है तो कोई इसे सरकार के इशारों पर काम करने वाला बताता है. इन चर्चाओं के बीच आज परिचित होते हैं सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानि सीबीआई के बारे में कुछ दिलचस्प बातें. (Central Bureau of Investigation)

1941 में भारत की अंग्रेज सरकार ने ‘स्पेशल पुलिस प्रतिष्ठान’ की स्थापना की. इसका मकसद था दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुए भारतीय युद्ध एवं आपूर्ति विभाग के भ्रष्टाचार और घूसखोरी की जांच करना. युद्ध ख़त्म होने के बाद माना गया कि इस संस्था को शांति काल में होने वाले सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मसलों की भी जांच करनी चाहिए इसलिए  स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत इसका सञ्चालन जारी रखा गया. आज़ाद भारत में भी इन्हीं प्रावधानों के तहत यह एजेंसी काम करती रही. 1946 में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम लागू हुआ. इस अधिनियम के तहत विशेष पुलिस प्रतिष्ठान गृह विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया इससे पहले यह युद्ध विभाग के जिम्मे था.  इसी के साथ इसके कामकाज का दायरा सभी सरकारी विभागों तक बढ़ा दिया गया.

1963 में स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट का नाम बदलकर सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानि सीबीआई कर दिया गया. धीरे-धीरे भ्रष्टाचार के अलावा अन्य अपराधों की जांच भी विशेष आग्रह पर सीबीआई को सौंपी जाने लगी, खास तौर पर धोखाधड़ी और हाई प्रोफाइल अपराध. इस तरह सीबीआई के काम का दायरा बढ़ता चला गया. एजेंसी अपना काम ठीक से कर सके इसके लिए 1987 में इसकी दो शाखाएं बना दी गयी. पहली भ्रष्टाचार निरोधक डिविजन, दूसरी स्पेशल क्राइम डिविजन.

सीबीआई भारतीय गणराज्य की केंद्र सरकार के मातहत काम करती है. अगर राज्य सरकार किसी मामले की सीबीआई जांच करवाना चाहती है तो उसे केंद्र सरकार से इसकी मंजूरी लेनी होती है. इसके अलावा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायलय भी किसी मामले की जांच सीबीआई को सौंप सकते हैं.

इसके अलावा सीबीआई अंतर्राष्ट्रीय जांच एजेंसी इंटरपोल की भी आधिकारिक यूनिट है. इंटरपोल या इसके सदस्य देशों के आग्रह पर भी सीबीआई किसी मामले की छानबीन कर सकती है.

प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनका कोई प्रतिनिधि जज से बनी कमिटी सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति करती है.

1997 में विनीत नारायण मामले के बाद से सीबीआई निदेशक का कार्यकाल कम से कम दो साल का कर दिया गया. इससे पहले सरकार कभी भी निदेशक को अपने पद से हटा सकती थी.  

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