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Thursday, March 12, 2026
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रामगंगा कटरी के कुख्यात डकैत से मुलाकात, जिसकी दहाड़ से कांपता था इलाका

केके-


सीमा पर देश के दुश्मनों से मोर्चा लेने वाले एक फौजी की जिंदगी में ऐसी उथल-पुथल हो गई कि वह एक डाकू बन गया। घर लौटकर पहले उसने अपनों का खून बहाया फिर पुलिस की गोली से बचने के लिए रामगंगा नदी के किनारे कटरी में पनाह ली। इसके बाद वह कटरी का सरताज बन गया। फौज में दुश्मनों से बचने के लिए दी गई ट्रेनिंग कटरी में उसके लिए सुरक्षा कवच साबित हुई। एक दशक लगा पुलिस को उसे पकड़ने में। (Katri Daku Omkar Fauji)

हम बात कर रहे हैं, उत्तरप्रदेश के बरेली जिले में भमोरा क्षेत्र के त्रिकुनिया गांव में रहने वाले ओमकार फौजी की। जो बाद में फौजी डाकू के नाम से जाना जाने लगा।

बात 2002 की है। मैं एक अखबार में रिपोर्टर था। एक घटना के बाद ओमकार फौजी को डकैत लिख दिया। खबर प्रकाशित होने के बाद फोन आया। तब लैंडलाइन फोन चला करते थे। रिसेप्शन से फोन ट्रांसफर होकर मेरे पास आया। इसके बाद दूसरी तरफ से बात करने वाले ने कहा मैं ओमकार फौजी बोल रहा हूं। आपने खबर तो सही छापी है लेकिन उसमें एक बात गलत है। मैं डकैत नहीं हूं।

हमने भी जवाब दिया कि लूटपाट डकैती का आरोप है डकैत न लिखें तो क्या लिखें? उसने कहा जो आरोप लगा रहे हैं, वे झूठे हैं, आप गांवों और कटरी में जाकर सच्चाई पता लगाइए। इसके बाद उसने कहा, मैं आपको खुद ले चलूंगा। आप बेखौफ चले आइएगा। (Katri Daku Omkar Fauji)

मुझे उम्मीद नहीं थी कि खुद को पाक-साफ बताने वाला यह कथित डाकू दोबारा मुझसे संपर्क करेगा। लेकिन कुछ ऐसा हुआ जो मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। शायद अक्तूबर-नवंबर माह रहा होगा। सुबह करीब सात-साढ़े सात बजे एक व्यक्ति सुभाषनगर में मेरे घर पर आया। कंबल ओढ़े इस शख्स ने मुझसे कहा कि आपको ओमकार फौजी बुला रहे हैं। कुछ दूर आगे ही सड़क पर खड़े हैं।

दरअसल, इस शख्स को मेरा घर पता नहीं था। तब मेरे घर के पास ही एक नामचीन पत्रकार रहा करते थे। धोखे से यह शख्स उनके घर चला गया। उन्होंने पता बताया तो मेरे घर आ पहुंचा। मैं हलका सा हिचका, तब उसने कहा, बस दस मिनट लगेंगे। आप चलिए । मेरी छठी इंद्री ने काम किया, मैंने अपनी बाइक निकाली और उसके साथ चल पड़ा। वह खुद मेरी बाइक के पीछे बैठ गया। पहले बदायूं रोड चुंगी फिर करगैना चौकी के बाद रामगंगा।

ऐसे करते-करते वह शख्स मुझे बुखारा रोड तक ले गया। बुखारा से फरीदपुर की तरफ करीब एक-डेढ़ किलोमीटर चलने पर उसने एक जगह बाइक खड़ी करवा दी। बोला- आइए थोड़ा आगे, बस वहीं पहुंच गए हैं वो। मेरे पास अब उसकी बात मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। बाइक खड़ी कर करीब दो किलोमीटर तक पैदल चला। जब रुके तो करीब 10 फीट नीचे गंगा की धार बह रही थी। (Katri Daku Omkar Fauji)

अखबार में लिखा तो कई बार था, लेकिन जिंदगी में पहली बार कटरी देखी थी। इसके साथ ही दिमाग में यह विचार भी कौंध गया कि बेटा, अगर यहां मार के डाल दिए गए तो घर वालों को लाश तक नहीं मिलेगी। इसी दौरान पास में एक चरवाहा पीपल के पेड़ के नीचे जानवर चराता दिखा। साथ चल रहे शख्स ने दहाड़ लगाई और उसे भगा दिया।

इसके बाद हम दो लोग रह गए वहां। धीरे-धीरे पीपल के पेड़ के नीचे पहुंचे। यहां इस शख्स ने दोनों हाथों से कंबल उतारा और बेहद सादगी से कहा, मैं ही ओमकार फौजी हूं। सच मानिए उसके इस परिचय में मुझे अपनी मौत दिखाई दे रही थी। मेरी हालत बिल्कुल ऐसी थी जैसे शेर के सामने मेमने की। आगे का अंजाम सोचकर ही माथे पर पसीना आ चुका था। तभी उसने कहा आप डरिए नहीं, आपको कोई नुकसान नहीं होगा।

इसके बाद पेड़ के नीचे पुआल पर दोनों लोग बैठ गए। फिर, ओमकार ने कहा- अब पूछिए, क्या पूछना चाहते हैं मेरे बारे में! सामने बैठा था, इसलिए डाकू बोलने की हिम्मत नहीं हुई। पूछा- आप फौजी हैं तो ये लोग आपको डाकू क्यों कहते हैं, अपने बारे में बताइए।

इसके बाद ओमकार फौजी बेबाक अंदाज में बोलता गया। जो उसने बताया किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। बताया कि वह सेना में था, छुट्टी पर अपने गांव त्रिकुनिया आया। यहां आकर पता चला कि ससुराल वालों ने यह कहकर कि कारगिल युद्ध में वह मारा गया उसकी पत्नी की दूसरी जगह शादी करा दी। उसकी जमीन भी रिश्तेदारों ने हड़प ली। बस, यहीं से एक फौजी के डाकू बनने का सिलसिला शुरू हुआ।

सबसे पहले अपने ससुर को मौत के घाट उतारा फिर पत्नी को। ओमकार का आरोप है कि त्रिकुनिया गांव के ही रहने वाले एक चर्चित नेता ( जिन्हें वह चाचा कहता है) ने उसकी जमीन हड़प ली। नेता से उसका कई बार मुचैटा हो चुका है। पुलिस उसके पीछे पड़ी थी। ओमकार जानता था कि अगर पकड़ा गया तो पुलिस की गोली का निशाना बन जाएगा। तब बचने के लिए एक ही जगह मुफीद थी और वह थी रामगंगा की कटरी। इसके बाद कटरी ही ओमकार का घर बन गई।

करीब एक-डेढ़ घंटे बीतने के बाद बातचीत का दौर खत्म हुआ तब चलने की बारी आई। अब कुछ राहत भी महसूस हो रही थी। तब एक बात पसंद आई थी ओमकार की। कहा- अब आप मेरे साथ चलते समय किसी से भी पूछ लेना ओमकार फौजी को जानते हो… कैसा आदमी है। पूछना तो था ही लिहाजा राह में चलते दो-तीन लोगों से पूछा भी। जो जवाब मिला उसकी तो अपेक्षा तक नहीं थी। इन गांव वालों के लिए ओमकार फौजी डाकू नहीं बल्कि कटरी का रॉबिनहुड था।

ओमकार के आने के बाद कटरी में पशु चोरी होना बंद हो गई थी। कटरी के आसपास के गांव के लोगों को उसने कभी नहीं लूटा बल्कि उनको समय-समय पर अनाज- गल्ला और देता था। गरीबों के घर में बेटियों की शादी पर मदद की जाती थी। उम्मीद से विपरीत था यह सब सुनना। (Katri Daku Omkar Fauji)

फिलहाल आगे बढ़कर गांव पहुंचे यहां से मोटरसाइिकल उठाने वाले ही थे तभी पीछे से आवाज आई… ओ ओंकारा…। यह सुनते ही चीते की तरह पीछे मुड़ा ओमकार फौजी। देखा तो एक बुजुर्ग थे। दरअसल, वह बुजुर्ग ओमकार को पहचान गए थे। बाकी जितने भी राहगीर मिले कोई उसे नहीं जानता था। बुजुर्ग ने अपने घर में चारपाई पर बैठाया। पीतल के बड़े-बड़े गिलासों में पहले मट्ठा पिलाया फिर घर पर चूल्हे पर खाना बनवाकर खिलाकर ससम्मान विदा किया।

अब इतना तो समझ आ ही चुका था कि जो कुछ ओमकार बता रहा था वह सच था। इसके बाद वह हमारी ही बाइक पर पीछे बैठकर आया और बदायूं रोड पर हम दोनों अलग हो गए। लौटकर आने के बाद हमने दूसरे दिन खबर छापी कटरी का रॉबिनहुड ओमकार फौजी।

हालांकि, यह खबर उन नेता जी को नागवार गुजरी, जिनसे ओमकार की दुश्मनी चल रही थी। आरोप लगाया गया कि आप एक डाकू का महिमामंडन कर रह हैं। तब यह सच्चाई किसी ने नहीं मानी कि हमें ओमकार जैसा कुख्यात डाकू घर से ले गया, हम कटरी तक गए। सबको लगा कि ढींग हांक रहा होगा। हम भी संस्था में नए थे, लिहाजा ज्यादा कुछ बोलने का मतलब ही नहीं।

जेल में दी गईं यातनाएं

बकौल ओमकार पकड़े जाने के बाद एक नेता के इशारे पर उसे जेल में मारने की साजिश रची गई। जेल में पानी के घड़े के अंदर सांप तक रखा गया। तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। चूंकि, वह पढ़ा लिखा था और उसने जेल मैन्युअल पढ़ रखा था, बंदियों के अधिकार के बारे में जानता था, इसलिए जेल अधिकारियों ने उसे बागी घोषित कर दिया। इसके बाद से उसे एक जेल से दूसरे जेल में शिफ्ट किया जाता रहा।

बताया जाता है कि ओमकार ने अपने दुश्मन नेता को मारने की कसम खाई थी। कई बार उसने नेता पर हमला करने के मौके ढूंढे। नेता को मारने के लिए शूटर तक बुलवाने की बात चर्चा में आई। जेल में रहकर नेता की हत्या के लिए सुपारी देने तक का मामला सामने आया। (Katri Daku Omkar Fauji)

बच्चों से कुकर्म का दावा

बरसों बाद अब जब फिर ओमकार फौजी के बारे में पड़ताल शुरू की तो एक ऐसा आरोप सामने आया, जिसका अंदाजा पहले कभी नहीं लगा। एक युवा नेता, जिसके पिता कभी पुलिस में रहे, उन्होंने बताया कि बरेली के मढ़ीनाथ मुहल्ले में रहने के दौरान हमने ओमकार फौजी को देखा था। उसको वहां आसपास के लोग पहले अच्छा मानते थे, क्योंकि चार-पांच बच्चे उसके साथ रहते थे और वह उनकी पढ़ाई कराता था।

आसपास के और बच्चों को भी वह बहलाता रहता था, खाने की चीजें देकर, कभी खिलौना देकर। उन्हीं में सात-आठ साल के एक बच्चे को उसने साइकिल भी दी, लेकिन बाद में उसके साथ कुकर्म किया। यह बात तब खुली जब बच्चे को असहनीय दर्द हुआ और घरवालों ने उससे पूछा। (Katri Daku Omkar Fauji)

बाद में मुहल्ले के लोगों ने ओमकार फौजी को वहां से जाने को कहा, वह सामान लेकर चला भी गया। डर की वजह से शायद किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। युवा नेता ने कहा कि जिस बच्चे के साथ उसने ऐसा कि, वह मेरा दोस्त था, और आज भी ओमकार फौजी मेरे सामने आ जाए तो मैं उसे जान से मार दूंगा।

फतेहगढ़ जेल में बंद है ओमकार फौजी

इन दिनों ओमकार फौजी फतेहगढ़ जेल में बंद है। उसे बरेली की सेंट्रल जेल से फतेहगढ़ भेजा गया। यहां उसने जेल में अधिकारियों की नींद हराम कर दी थी। उस पर आरोप लगे कि वह बंदियों को भड़काता है। भूख हड़ताल के लिए उन्हें उकसाता है। इसके बहकावे में आकर बंदी जेल में प्रदर्शन करने लगते हैं।

इन आरोपों के बाद शासन ने ओमकार को फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया था। वहां के जेल अधिकारी उसे लेने को तैयार नहीं थे। तब उसे दोबारा बरेली भेजा जाने लगा। इस पर सेंट्रल जेल अधीक्षक एके राय जो अब रिटायर्ड हो चुके हैं ने, ओमकार को अपनी जेल में लेने से साफ मना कर दिया था, लिहाजा उसे फतेहगढ़ जेल में ही रखना पड़ा।

(लेखक रुहेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार हैं, यह उनके पत्रकारीय जीवन की घटना है, इंडस न्यूज तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है)

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