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Thursday, March 12, 2026
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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री नए नहीं हैं, कोई नहीं स्वीकार पाया ये चुनौतियां

महाराष्ट्र की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति एक बार फिर चर्चा में है, जब इस समिति के श्याम मानव ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री को साधारण चुनौती दे दी। इस तरह की चुनौती का सिलसिला नया नहीं है तर्कशील आंदोलन में। कुछ चुनौतियां तो दशकों से कायम हैं और उनको स्वीकारकर चमत्कार करने वाले शख्स को पुरस्कार की राशि भी करोड़ों में पहुंच चुकी है। (Dhirendra Shastri Bageshwar Dham)

चलिए, पहले उन चुनौतियों का जान लें, जिनको किसी ने नहीं स्वीकारा। डॉ.कोवूर ने दशकों पहले ये चैलेंज दिए थे दुनियाभर के पीर-फकीर, ज्योतिषी, सिद्ध पुरुषों, बाबाओं, जादूगरों को, कि इनमें से कोई एक भी काम कर दें तो उनको नकद इनाम दिया जाएगा। यह चैलेंज बाद में बसावा प्रेमानंद ने और उनके आंदोलन से जुड़ी तमाम तर्कशील संस्थाओं ने जारी रखा है।

Pandit Dhirendra Shastri, Bageshwar Dham, Image: Internet

ये हैं करोड़ों के चैलेंज

1. भूत-प्रेत, जिन्न साबित करने वाले को।
2. तांत्रिक, स्याणा (घुड़ल्या) झाड़-फूंक द्वारा शक्ति दिखाना।
3. किसी शक्ति द्वारा किसी भी व्यक्ति पर मूठ (चौकी) छोड़ना।
4. किसी भी गंडा, ताबीज, लॉकेट, अंगूठी आदि द्वारा शक्ति दिखाना।
5. नजर, टोक लगाने व उतारने वाले को।
6. यंत्र, मंत्र, तंत्र, द्वारा कोई भी शक्ति साबित करने वाले को।
7. गुम हुई वस्तु को खोज सके।
8. पानी को शराब/पेट्रोल में बदल सके।
9. पानी के ऊपर पैदल चल सके।
10. योग/देव शक्ति से हवा में उड़ सके।
11. सील बंद नोट का नंबर पढ़ सके।
12. ताला लगे कमरे में से शक्ति से बाहर आ सके।
13. अपने शरीर को एक स्थान पर छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर प्रकट हो सके।
14. जलती हुई आग पर अपने देवता की सहायता से 1 मिनट तक खड़ा हो सके।
15. ऐसी वस्तु, जिसे मांगें, उसे हवा में से प्रस्तुत कर सकता हो।
16. प्रार्थना, आत्मिक शक्ति, गंगा जल, या पवित्र राख (भभूत) से अपने शरीर के अंग को पांच इंच बढ़ा सकता हो और शरीर का भार (वजन) बढ़ा सकता हो।
17. पुनर्जन्म के कारण कोई अद्भुत भाषा बोल सकता हो।
18. ऐसी आत्मा या भूत-प्रेत को पेश कर सके, जिसकी फोटो ली जा सकती हो और फोटो लेने के बाद फोटो से गायब हो सकता हो। ऐसे ज्योतिषी जो यह कहकर लोगों को गुमराह करते हैं कि ज्योतिष और हस्त रेखा एक विज्ञान है, उपरोक्त इनाम को जीत सकते हैं, यदि वे दस हस्त चित्रों व दस ज्योतिष पत्रिकाओं (जन्म कुण्डली) को देखकर आदमी और औरत की अलग-अलग संख्या व जन्म का ठीक समय व स्थान अक्षांस रेखा के साथ बता दें।
Narendra Dabholkar -Dr. Narendra Dabholkar (Marathi) is a prominent rationalist in Maharashtra, India and author of several books. Express photo
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने दरअसल अपना काम कानूनी दायरे में किया है और महाराष्ट्र में लागू कानून के आधार पर धीरज शास्त्री पर एफआईआर दर्ज कराई है। संविधान भी समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने की बात करता है, लेकिन इस मामले को अब ऐसा रंग दिया जा रहा है, जिसके नतीजे घातक हो सकते हैं। यही समिति अपने प्रमुख अगुवा डॉ.नरेंद्र दाभोलकर को खो चुकी है, उनकी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी, जिसमें ये सामने आ चुका है कि हत्यारे कौन थे।

इस समिति को महाराष्ट्र से बाहर के लोग शायद खास जानते न हों। जबकि सच यह है कि एक बड़े आंदोलन का हिस्सा है यह समिति। यह है तर्कशील आंदोलन। इस आंदोलन में देश के लगभग सभी राज्यों से ऐसे संगठन जुड़े हैं, जो अंधविश्वास, अंधश्रद्धा फैलाने वालों की पोल खोलते हैं और वैज्ञानिक नियमों से सच्चाई बताते हैं। उनका सामूहिक संगठन है फीरा- FIRA यानी फेडरेशन ऑफ रैशनलिस्ट एसोसिएशंस। (Dhirendra Shastri Bageshwar Dham)

आधुनिक तर्कशील आंदोलन के जनक कहे जाने वाले अब्राहम टी कोवूर के बाद बसावा प्रेमानंद ने इस अभियान की कमान संभाली, खासतौर पर भारत में। 17 फरवरी, 1930 को कोझीकोड (केरल) में जन्मे और उनका देहांत 79 साल की उम्र चार अक्टूबर 2009 में हुआ। उनकी इच्छा के अनुसार उनका पार्थिव शरीर स्थानीय मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया। बसावा प्रेमानंद को उत्तर भारतीय बहुत कम जानते हैं। उनकी मुहिम से जुड़कर आज देश में खामोशी से तर्कशील आंदोलन तैयार हो गया है, जिससे झूठ, फरेब, पाखंड की बुनियाद पर समाज को पीछे धकेलने वाले घबराते हैं।

BASAVA PREMANAND

किशोरावस्था में प्रेमानंद ने आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि हासिल करने को कई स्वामी और गुरुओं से संपर्क किया, लेकिन जल्द ही उनका भ्रम टूट गया जब पता चला कि वे पाखंड करते थे। फिर 1969 में, उनकी मुलाकात श्रीलंकाई तर्कवादी डॉ. अब्राहम कोवूर से हुई, जो ‘चमत्कारों का पर्दाफाश’ व्याख्यान दौरे के लिए भारत में थे। यह प्रेमानंद के जीवन का अहम मोड़ था, जो आध्यात्मिक चालबाजों को भगाने के अभियान में मील का पत्थर साबित हुआ।

1978 में डॉ. अब्राहम कोवूर के देहांत के बाद्र प्रेमानंद ने कोवूर की प्रसिद्ध चुनौती को जारी रखा, जो धोखाधड़ी-सबूत शर्तों के तहत मानसिक क्षमताओं का प्रदर्शन करने वाले किसी भी व्यक्ति को एक लाख रुपये की पेशकश करता था।

तीन दशकों से ज्यादा समय तक प्रेमानंद ने भारत के तमाम गांव और कस्बों का दौरा किया और पांखडी संतों और उनके चमत्कारों का पर्दाफाश किया, शिक्षितों और आम लोगों के लिए विज्ञान कार्यशालाओं का आयोजन किया, सार्वजनिक व्याख्यान और प्रदर्शन दिए। (Dhirendra Shastri Bageshwar Dham)

उन्होंने तर्कशील सोच फैलाने के मिशन के साथ तकरीबन 49 देशों का दौरा किया। वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें भारत सरकार के राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद ने फैलोशिप दी।

श्याम मानव ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर एफआईआर दर्ज कराई है, लेकिन प्रेमानंद का सबसे सनसनीखेज पर्दाफाश पुट्टपर्थी साईं बाबा की पोल खोलना रहा।

एक बार उन्होंने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में साईं बाबा के खिलाफ इंडियन गोल्ड कंट्रोल एक्ट के तहत एक दीवानी रिट याचिका भी दायर की थी। वह चाहते थे कि सरकार साईं बाबा के खिलाफ ‘हवा से सोना बनाने’ के दावे और चमत्मकार पर कार्रवाई करे, क्योंकि यह गोल्ड कंट्रोल एक्ट की धारा 11 का उल्लंघन था, जिसमें सोने के निर्माण के लिए गोल्ड कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेटर की अनुमति अनिवार्य थी।

यह देखते हुए कि भारतीय समाज के सभी वर्गों में संतों का दबदबा है, यह बिल्कुल भी आश्चर्य की बात नहीं है कि इस मामले को अदालत ने खारिज कर दिया। मौजूदा समय में भी कुछ ऐसा ही दिखाई देता है, जिसमें इस समय मेनस्ट्रीम मीडिया बाकायदा तर्क और विज्ञान की जगह अंधविश्वास का खुलेआम प्रचार-प्रसार कर रहा दिखाई दे रहा है। इस बहाने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को भी हवा देने की कोशिश हो रही है। (Dhirendra Shastri Bageshwar Dham)

बहरहाल, अपने समय में प्रेमानंद ने 6 जून 1993 को साईं बाबा के आश्रम में छह व्यक्तियों की कुख्यात हत्या पर अभिलेखों का एक विशाल संग्रह संकलित किया और इसे 800 से अधिक पृष्ठों की किताब ‘साईं बाबा के बेडरूम में हत्या’ को प्रकाशित किया।

यह किताब उन लोगों के लिए बेहतरीन तथ्य संग्रह है, जो आश्रम में संदिग्ध व्यवहार के पीछे की सच्चाई जानना चाहते हैं।

दो दशकों से ज्यादा समय तक प्रेमानंद ने तर्कवाद और वैज्ञानिकता के प्रसार को समर्पित मासिक पत्रिका ‘इंडियन स्केप्टिक’ प्रकाशित की। यह पत्रिका बेहिसाब धार्मिक देश में विभिन्न तर्कवादी समूहों और व्यक्तियों के बीच अनमोल थी।

‘स्केप्टिक बुक क्लब’ के माध्यम से उन्होंने संतों और उनकी हरकतों को उजागर करने वाली कई किताबें निकाली। उनकी सबसे लोकप्रिय पुस्तक, साइंस वर्सेस मिरेकल, लगभग 150 कथित चमत्कारों की प्राकृतिक व्याख्या देती है, जिनमें भारत में आमतौर पर भगवानों द्वारा किए जाने वाले चमत्कार शामिल हैं।

अप्रैल 2007 में पुणे में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, महाराष्ट्र ने भारत में तर्कवादी आंदोलन में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।

प्रेमानंद ने 2008 के अंत तक मिशन को आगे बढ़ाने का एक भी मौका नहीं छोड़ा। हर महीने इंडियन स्केप्टिक को प्रकाशित करना जारी रखा और अपने स्केप्टिक बुक क्लब के माध्यम से तर्कवाद पर पुस्तकें प्रकाशित करते रहे। दिसंबर 2007 में तिरुवनंतपुरम में आयोजित केरल युक्तिवादी संगम (केरल तर्कवादी संघ) के 25वें राज्य सम्मेलन में और FIRA के छठवें सम्मेलन में भाग लिया। (Dhirendra Shastri Bageshwar Dham)

यहां तक कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने 5 मार्च 2009 को तमिलनाडु के पोदन्नूर में विज्ञान की विधि पर एक स्थायी प्रदर्शनी को पूरा कराया और सार्वजनिक रूप से खोला।

तर्कवादी विश्वासों पर उनकी प्रतिबद्धता एक प्रेरक दस्तावेज है, जो कई तर्कवादी और विज्ञान से जुड़ी वेबसाइटों और पत्र-पत्रिकाओं में मौजूद हैं। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के लिए इस आंदोलन का सामना तब तक मुश्किल रहेगा, जब तक वह चमत्कार का दावा करते रहेंगे। दूसरी ओर खतरे तर्कवादियों के लिए भी हैं, जिन्होंने डॉ.दाभोलकर के बलिदान को देखा है।

Source : Indian Sceptics


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