आजकल सीबीआई के अलावा एनआईए और ईडी की भी खूब चर्चा है. विपक्षी पार्टियाँ और क्षेत्रीय दल सात पक्ष पर आरोप लगाते रहे हैं कि इन केन्द्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल सरकार द्वारा खूब किया जा रहा है. सरकार इस बात से साफ इनकार करती है. आज जानते हैं इन संस्थाओं में से एक एनआईए के बारे में. एनआईए के नाम से जानी जाने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी का पूरा नाम है ‘नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी.’ (National Investigation Agency)
एनआईए का गठन हुआ 31 दिसंबर 2008 को. तब राधा विनोद राजू इस एजेंसी के पहले महानिदेशक नियुक्त हुए. इस जांच एजेंसी के गठन के लिये बाकायदा संसद में एक अधिनियम पास किया गया, जिसका नाम था राष्ट्रीय जाँच एजेंसी विधेयक-2008. इस तरह की किसी जांच एजेंसी की जरूरत महसूस हुई मुम्बई आतंकवादी हमले के बाद.
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एनआईए का काम है आतंकवादी घटनाओं की जांच करना. ठीक उसी तरह जिस तरह सीबीआई भ्रष्टाचार, अन्य अर्तिक अपराध और गंभीर संगठित अपराधों की जांच करती है ठीक उसी तरह एनआईए का काम है आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखना, उनके नेटवर्क और आर्थिक स्रोतों की पड़ताल करना.
एनआईए की अधिकारिक वेबसाइट में खुद के बारे में कुछ इस तरह लिखा गया है—
पिछले कई वर्षों में, भारत बड़े पैमाने पर सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का शिकार रहा है. न केवल उग्रवाद और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में, बल्कि भीतरी इलाकों और प्रमुख शहरों के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी हमलों और बम विस्फोटों आदि के रूप में आतंकवादी हमलों की असंख्य घटनाएं हुई हैं.
ऐसी घटनाओं में बड़ी संख्या में जटिल अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध पाए जाते हैं. अन्य गतिविधियों जैसे हथियारों और ड्रग्स की तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा को धकेलना और उसका प्रचलन, सीमाओं से घुसपैठ आदि को ध्यान में रखते हुए, यह महसूस किया गया कि आतंकवाद और कुछ अन्य अधिनियमों से संबंधित अपराधों की जांच के लिए केंद्रीय स्तर पर एक एजेंसी की स्थापना की आवश्यकता है, जिसका राष्ट्रीय प्रभाव हो. प्रशासनिक सुधार आयोग सहित कई विशेषज्ञों और समितियों ने अपनी रिपोर्ट में ऐसी एजेंसी की स्थापना के लिए सिफारिशें की थीं.
सरकार ने शामिल मुद्दों पर उचित विचार और जांच के बाद, जांच के लिए विशिष्ट अधिनियमों के तहत विशिष्ट मामलों को लेने के प्रावधानों के साथ एक समवर्ती क्षेत्राधिकार ढांचे में एक राष्ट्रीय जांच एजेंसी की स्थापना के प्रावधान करने के लिए एक कानून बनाने का प्रस्ताव दिया.
तब एनआईए अधिनियम 31-12-08 को लाया गया और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का जन्म हुआ. वर्तमान में एनआईए भारत में केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है. (एनआईए की अधिकारिक वेबसाइट से अनुवादित)
एनआईए एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है, जो आतंकवाद, आतंकवाद के समर्थकों, जाली मुद्रा, अवैध हथियार, नशीली दवाओं और मानव तस्करी जैसे मामलों की जांच और इनसे संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं गुप्त रूप से जुटाती है. अपनी जांच पूरी होने के बाद एनआईए मामले से जुड़े सबूतों को विशेष एनआईए कोर्ट में पेश करती है.
एनआईए देश की अन्य जांच एजेंसियों की तरह नहीं है. एनआईए को विशेष अधिकार मिले हुए हैं. यह देश के किसी भी राज्य में किसी भी वक्त आतंकवाद से जुड़े मामले की जांच कर सकती है. इसे राज्य सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. एनआईए को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था, संगठन की जांच करने का अधिकार है. (National Investigation Agency)
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