बरेली: चंद्रमणि बुद्ध विहार बरेली में प्रबुद्ध महिला संघ के द्वारा माता सावित्रीबाई फुले जयंती और पौष पूर्णिमा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। माता सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारत की प्रथम महिला शिक्षिका थीं उनकी याद में शिक्षा को प्रसारित करने के लिए सर्वप्रथम गरीब बच्चों को पेंसिल, कलम और कॉपी वितरित की गईं। कार्यक्रम में माता सावित्री बाई फुले के जीवन चरित्र पर नाटक का मंचन भी किया गया।

कार्यक्रम में बोलते हुए भारतीय बौद्ध धर्म दर्शन सार सोसाइटी के अध्यक्ष जागन सिंह राकेश ने कहा कि आज माता सावित्रीबाई फुले की जयंती है और पूर्णिमा का दिन भी है और यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन भारत में शिक्षा की अलख जगाने वाली आधुनिक भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले का जन्म हुआ था।

कार्यक्रम में बोलते हुए समिति के महासचिव ओम प्रकाश बौद्ध ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को सतारा में हुआ था। 9 वर्ष की आयु में उनका विवाह महात्मा ज्योतिबा राव फुले के साथ हो गया। शिक्षा के अभाव के कारण उन्हें शिक्षा नहीं मिल सकी, महात्मा ज्योतिबा राव फुले ने उन्हें पढ़ाया और 1848 में महिलाओं, पिछड़ों और अछूतों को शिक्षित करने के लिए उन्होंने 18 विद्यालय खोलें। जिसमें माता सावित्रीबाई फुले स्वयं शिक्षण कार्य करती थीं। विरोधी उनका विरोध करते थे उन पर गोबर फेंका जाता था तो वह स्कूल जाते समय दो साड़ियां लेकर जाती थीं। माता सावित्री आई फुले ने भारत में मौजूद तमाम गलत कुरीतियों का विरोध किया।

कार्यक्रम में बोलते हुए सुमन लता सिंह ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका थीं और उन्होंने महिलाओं के जीवन में शिक्षा की लौ जलाई, उन्होंने कहा कि शिक्षा की असली देवी माता सावित्रीबाई फुले हैं जबकि इस देश में उनका प्रचार न करके दूसरे लोगों का प्रचार शिक्षा की देवी के रूप में किया जाता है।

कार्यक्रम में सुमन लता सिंह, लक्ष्मी बौद्ध, पुष्पा भान सिंह, शशि प्रभा, प्रेम गौतम, रेखा वर्मा, सुनीता फूल सिंह के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।


