बरेली: ISWA दुर्व्यवहार पीड़िता पर FIR, डॉ अयूब अंसारी पर अब तक कार्रवाई नहीं, पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
बरेली में चर्चित ISWA दुर्व्यवहार प्रकरण अब लगातार नए मोड़ लेता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां पीड़िता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब तक कोई स्पष्ट पुलिस कार्रवाई सामने नहीं आई है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के खिलाफ ही FIR दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।

पीड़िता का आरोप है कि 18 अप्रैल 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार और गलत तरीके से छूने जैसी घटना हुई थी, जिसके संबंध में उसने थाना बारादरी में तहरीर दी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की और राज्य महिला आयोग तक गुहार लगाई। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद उस पर समझौते का दबाव बनाया गया और विभिन्न माध्यमों से उसे बदनाम करने की कोशिश की गई।

मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे डॉक्टर अयूब अंसारी पर पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि उसके पास ऐसे ऑडियो रिकॉर्ड मौजूद हैं जिनमें कथित रूप से मामले को दबाने, “छोटी बात” बताने और मीडिया के माध्यम से बदनाम करने जैसी बातें सुनाई देती हैं। हालांकि इन ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है।
दूसरी ओर, पीड़िता की पहचान उजागर करने और उसके खिलाफ खबरें चलाने को लेकर पत्रकार कामरान अली और जहरा खान के नाम भी विवादों में आए हैं। पीड़िता का आरोप है कि उसकी पहचान सार्वजनिक किए जाने से उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और लगातार सामाजिक दबाव बनाया गया।

इसी बीच, बरेली के ही इज्जत नगर थाने में पीड़िता पर एक FIR दर्ज होने के बाद मामला और गरमा गया है। आरोप है कि पीड़िता ने पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले कामरान अली और जरा खान से गुस्से में फोन पर आपत्तिजनक बातें कहीं, जिसके बाद उसके खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई कर दी। हालांकि जहरा खान और कामरान अली के द्वारा दी गई रिकॉर्डिंग की पुष्टि कैसे हुई है इसकी जानकारी हमें भी नहीं है।अब सवाल यह उठ रहे हैं कि जिस महिला की मूल शिकायत लंबे समय तक लंबित रही, उसी के खिलाफ कार्रवाई इतनी तेजी से कैसे हो गई?
स्थानीय स्तर पर पुलिस की निष्पक्षता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि पीड़िता लगातार 20 से अधिक दिनों तक न्याय की मांग करती रही, तो उसकी शिकायत पर अब तक FIR क्यों नहीं हुई? वहीं दूसरी तरफ उसके खिलाफ कार्रवाई में तेजी क्यों दिखाई गई?
फिलहाल पूरे मामले पर निगाहें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि पुलिस मुख्य आरोपों पर क्या कदम उठाती है, महिला आयोग क्या रुख अपनाता है और क्या पीड़िता को उसकी शिकायत पर विधिक कार्रवाई एवं न्याय मिल पाता है।