बरेली। मरीजों के इलाज और आयुष्मान योजना से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं को लेकर पहले से सवालों के घेरे में रहे सनराइज अस्पताल, पीलीभीत रोड, बरेली पर अब एक परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। थाना इज्जतनगर में दी गई तहरीर में परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके बहन-बहनोई को बहेड़ी से एंबुलेंस के जरिए उठाकर सनराइज अस्पताल लाया गया, जबकि आसपास कई अस्पताल मौजूद थे। परिवार का कहना है कि मरीजों को उनकी इच्छा के अनुसार किसी अन्य अस्पताल में ले जाने के बजाय सीधे सनराइज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शिकायतकर्ता हरीश कुमार मौर्य एवं उसका भाई सुनील मौर्य
शिकायतकर्ता हरीश कुमार और उनके भाई सुनील कुमार ने बताया कि उनके बहन और बहनोई को दुर्घटना में गंभीर चोटें नहीं लगी थीं और मुख्य रूप से फ्रैक्चर था। इसके बावजूद आरोप है कि मरीज को ICU में भर्ती कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती हुए करीब एक घंटे ही हुए थे और जब उन्होंने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए छुट्टी मांगी तो अस्पताल की ओर से तहरीर में ₹41 हजार की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया। परिवार के अनुसार यह राशि करीब ₹50 हजार के बराबर बताई जा रही थी।
परिजनों का कहना है कि वे अस्पताल में पहले ही ₹6,400 जमा कर चुके थे। इसके अलावा दवाइयां भी उन्होंने अपने पैसे से खरीदीं। परिवार का आरोप है कि दवाइयों का भुगतान करने के बावजूद बाद में कुछ दवाइयां मेडिकल स्टोर पर वापस रखवा दी गईं। परिजनों के अनुसार वे मरीज को अपनी इच्छा से दूसरे अस्पताल में ले जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें छुट्टी देने के लिए अतिरिक्त धनराशि देने को कहा गया।
एंबुलेंस से मरीजों को लाने पर भी गंभीर आरोप
परिजनों ने अस्पताल के मैनेजर सोहेल खान को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि सोहेल खान से जुड़ी एंबुलेंस के माध्यम से दुर्घटना के मरीजों को बहेड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से उठाकर सीधे सनराइज अस्पताल लाया जाता है। परिवार का दावा है कि उनके मरीजों को भी इसी तरह बहेड़ी से एंबुलेंस के माध्यम से सनराइज अस्पताल लाया गया। परिजनों ने बताया कि मरीज की स्थिति सामान्य थी और वह लगातार जिला अस्पताल ले जाने की बात करते रहे लेकिन जबरदस्ती एंबुलेंस वाला सनराइज अस्पताल ले गया।
सोहेल खान, कथित मैनेजर
कथित मैनेजर पर धमकाने और गाली-गलौज के आरोप
परिजनों ने कथित मैनेजर सोहेल खान पर धमकाने और गाली-गलौज करने के भी आरोप लगाए हैं। परिवार के मुताबिक मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कहने पर उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया। अब पुलिस के सामने यह जांच का विषय है कि ₹41 हजार की मांग किस मद में की गई और मरीज को छुट्टी देने से इनकार करने के पीछे अस्पताल का क्या आधार था।
डॉ विश्राम सिंह, CMO, बरेली
कथित मैनेजर सोहेल खान को अस्पताल से निकाले जाने का दावा सवालों में
टीटू वाल्मीकि की मौत के बाद इंडस न्यूज़ टीवी के वरिष्ठ पत्रकार संतोष शाक्य पर हुए हमले की बाद CMO बरेली को दी गई शिकायत के बाद अस्पताल की डॉ. सबीना खान द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिए गए पत्र में मैनेजर सोहेल खान को अस्पताल से बाहर किए जाने का दावा किया था। लेकिन अब सामने आई जानकारी और नए मामले में सोहेल खान की अस्पताल में मौजूदगी को लेकर यह दावा सवालों के घेरे में है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि सोहेल खान को वास्तव में अस्पताल से हटा दिया गया था, तो वह दोबारा अस्पताल में किस हैसियत से काम कर रहा है? क्या अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को दी गई सूचना महज कागजी कार्रवाई थी या बाद में सोहेल खान को पुनः अस्पताल में काम पर रख लिया गया? इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा CMO को दिए गए पत्र और सोहेल खान की वर्तमान भूमिका का स्वास्थ्य विभाग द्वारा सत्यापन किया जाना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर अस्पताल पर क्या कार्रवाई करता है यह देखना होगा।
पुराने मामलों से जुड़ रहे नए सवाल
सनराइज अस्पताल का यह नया मामला ऐसे समय सामने आया है जब अस्पताल पहले से ही कई गंभीर मामलों को लेकर सवालों के घेरे में है। 31 वर्षीय उर्वेश की मौत और आयुष्मान योजना में करीब ₹2.70 लाख की अनियमितता के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच हो चुकी है। इसके अलावा टीटू वाल्मीकि की संदिग्ध मृत्यु, पत्रकार संतोष शाक्य पर कथित हमला, तसलीम खान के उपचार में कथित गड़बड़ी सहित अस्पताल से जुड़े अन्य मामले भी सामने आ चुके हैं। पहले गंभीर आरोप लगने पर अस्पताल की डॉक्टर सबीना खान के द्वारा कहा गया था कि उनके द्वारा सोहेल खान को अस्पताल से निकाल दिया गया है और उनके द्वारा चिकित्सा विभाग को भी इस तरह का हलफनामा दिया गया था लेकिन इस मामले ने चिकित्सा विभाग और डॉक्टर सबीना खान की पोल खोल कर रख दी है, मामले से साफ हो गया है कि सोहेल खान आज भी अस्पताल में कार्यरत है।
लगातार सामने आ रहे मामलों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नई तहरीर में मरीजों को बहेड़ी से एंबुलेंस के जरिए लाने, केवल फ्रैक्चर होने के बावजूद ICU में भर्ती करने, करीब एक घंटे बाद छुट्टी के लिए ₹41 हजार मांगने, दवाइयों और बिलिंग तथा कथित मैनेजर के व्यवहार जैसे आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
अब जरूरत केवल इस एक शिकायत की जांच की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि क्या मरीजों को एंबुलेंस के जरिए एक निश्चित अस्पताल में लाने, ICU में भर्ती करने और इलाज के नाम पर आर्थिक वसूली का कोई व्यवस्थित तंत्र तो नहीं चल रहा। यदि ऐसा है तो इसकी निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।