बरेली। सुभाष नगर स्थित मेधांश अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज से इलाज के नाम पर पैसे मांगने के आरोपों का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। मरीज के परिजन द्वारा जिलाधिकारी से लिखित शिकायत किए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। हालांकि अस्पताल संचालिका डॉ. मृंदा जौहरी का बयान अभी सामने नहीं आया है।
मामला श्यामा देवी के इलाज से जुड़ा है। उनके बेटे जितेंद्र पाल के मुताबिक, मां की तबीयत खराब होने पर उन्होंने उन्हें 13 अगस्त की दोपहर करीब 2 बजे मेधांश अस्पताल में भर्ती कराया था। मरीज के पास आयुष्मान कार्ड था और अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज की बात कही गई थी।
जितेंद्र पाल, शिकायतकर्ता
जितेंद्र पाल का आरोप है कि भर्ती के बाद डॉक्टर की ओर से करीब 15 से 20 हजार रुपये की जांच कराने का पर्चा दिया गया और जांच अपने खर्च पर कराने के लिए कहा गया। उन्होंने अस्पताल को मरीज के आयुष्मान कार्ड की जानकारी दी और आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने की बात कही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद अस्पताल के डॉक्टर, मैनेजर, नर्सों और आयुष्मान मित्र की ओर से उनके साथ अभद्रता की गई तथा मरीज को अस्पताल से बाहर ले जाने के लिए कहा गया।
जितेंद्र पाल ने अपनी लिखित शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल के मैनेजर को 10 हजार रुपये दिए गए, लेकिन इसके बावजूद मरीज का इलाज नहीं किया गया और 14 अगस्त को उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी मां को रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान कार्ड के जरिए भर्ती कराया, जहां उनका इलाज कराया जा रहा है।
इस मामले में उपलब्ध अस्पताल के दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हैं। मेधांश अस्पताल की जांच रिपोर्ट में मरीज को आयुष्मान भारत के तहत दर्ज किया गया है। वहीं अस्पताल के रेफरल फॉर्म में मरीज को हायर सेंटर भेजने की वजह अटेंडेंट के सहयोग न करने और हायर सेंटर ले जाने की इच्छा बताई गई है। यानी मरीज के परिजन और अस्पताल के दस्तावेज में रेफरल की वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
मामले को लेकर जितेंद्र पाल ने 20 अगस्त को जिलाधिकारी बरेली को लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और अस्पताल संचालिका समेत संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन का पलटवार
अब इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आया है। अस्पताल के मैनेजर ने एक मीडिया संस्थान के पत्रकार से बातचीत में मरीज के तीमारदार पर ही आरोप लगाए। मैनेजर का दावा है कि मरीज के साथ आया अटेंडेंट नशे की हालत में था और उसने आयुष्मान मित्र से कथित तौर पर कहा कि आयुष्मान योजना से पांच लाख रुपये निकाल लो, तीन लाख रुपये मुझे दे दो और दो लाख रुपये तुम रख लेना।
विकास सक्सेना, मैनेजर, मेधांश हॉस्पिटल
मैनेजर ने पैसे मांगने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अस्पताल की ओर से कोई रकम नहीं मांगी गई और न ही मरीज के परिजन से कोई पैसा लिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने तीमारदार पर आयुष्मान मित्र से अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है। आयुष्मान मित्र ने भी अस्पताल प्रबंधन के इसी पक्ष को दोहराया है।
आयुष्मान मित्र
हालांकि, मैनेजर और आयुष्मान मित्र द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। वहीं मरीज के परिजन की ओर से जिलाधिकारी को दी गई लिखित शिकायत और अस्पताल के उपचार एवं रेफरल संबंधी दस्तावेज इस मामले में जांच का आधार बन सकते हैं।
फिलहाल दोनों पक्षों के दावे सामने आ चुके हैं। अस्पताल संचालिका डॉ. मृंदा जौहरी का पक्ष अभी सामने आना बाकी है। उनका पक्ष मिलने के बाद उसे भी निष्पक्ष रूप से खबर में शामिल किया जाएगा। पूरे मामले में अब जिलाधिकारी स्तर से होने वाली जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयुष्मान मरीज के इलाज और कथित भुगतान को लेकर वास्तविक स्थिति क्या थी।
शिकायतकर्ता ने अस्पताल प्रबंधन के आरोपों को बताया झूठा
शिकायतकर्ता से अस्पताल प्रबंधन के पलटवार पर प्रतिक्रिया ली गई तो उसने मैनेजर और आयुष्मान मित्र द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया। जितेंद्र पाल का कहना है कि वह न तो शराब के नशे में था और न ही उसने आयुष्मान मित्र से आयुष्मान कार्ड से पांच लाख रुपये निकलवाकर तीन लाख रुपये खुद रखने जैसी कोई बात कही थी। उसका कहना है कि उसे स्वयं यह जानकारी है कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए निर्धारित राशि मरीज या तीमारदार को नकद नहीं दी जाती, बल्कि योजना के नियमों के तहत अस्पताल को भुगतान होता है।