दिल्ली की सांसों में घुला जहर, नेता सियासी लड़ाई में उलझे हर साल वही समस्या-सॉलुशन का कुछ पता नहीं!
पराली जलने और गाड़ियों से हो रहे प्रदुषण की बजह से दिल्ली कि हवा एक बार फिर से जहरीली होने लगी है। नतीजतन गुरुवार सुबह एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 418 तक पहुंच गया और पूरी दिल्ली घने कोहरे की चपेट में आ गई। इसके बाद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमिशन ने दिल्ली और एनसीआर में CNG से चलने वाले और इलेक्ट्रिक को छोड़कर बाकी ट्रकों की एंट्री बैन कर दी है। (Poison dissolved in Delhi breath)

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के कारण नोएडा प्रशासन ने फैसला लिया है कि शुक्रवार से कक्षा एक से लेकर आठ तक के बच्चों की क्लासेस ऑनलाइन लगेंगी। लोगों ने एक बार फिर इसकी शिकायत शुरू कर दी है। एक महिला ने कहा कि उनके बच्चे को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। कुछ लोग सरकार से स्कूल बंद करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, कुछ का कहना है कि स्कूल बंद करना इसका इलाज नहीं है।
दिल्ली में दमघोंटू हवा से लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ हो रही है। पेरेंट्रस का कहना है कि स्कूल बंद होने चाहिए, क्योंकि बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। वहीं, कुछ पेरेंट्स का कहना है कि स्कूल बंद करना समाधान नहीं है, क्योंकि कोरोना के चलते भी पढ़ाई में नुकसान हुआ था।(Poison dissolved in Delhi breath)

सरकार को एयर क्वालिटी को सुधारने पर फोकस करना चाहिए।चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, दावे तो यही किए जा रहे हैं कि प्रदूषण को रोकने के लिए सारे जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. पर अगर कदम उठाए जा रहे हैं तो फिर उनका असर दिख क्यों नहीं रहा है? क्यों पिछले साल की तरह इस साल भी कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी रोकनी पड़ी? क्यों स्कूलों को बंद करने की नौबत आ गई? और क्यों ऑड-इवन स्कीम को लागू करने की बात होने लगी?