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Thursday, March 12, 2026
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कश्मीर की ख़ूबसूरती का एक दृश्य

सुधीर कुमार


लद्दाख के उस ठण्डे रेगिस्तान से अकेले जूझने के बाद मैं डल लेक की मौज लूटना चाहता था. अब मेरे साथ सिर्फ दो बाइकर थे जिन्होंने मेरी खातिर कश्मीर से वापसी का रास्ता चुना था. लद्दाख यात्रा में सभी बाइकरों के बीच एक भाईचारा बन जाता है. इस भाईचारे का कारण होता है एक अनजाना भय. यही भाईचारा निभाने ये मेरे साथ चले आये थे. (A beauty of Kashmir)

उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जो भी देखना चाहता हूं देख कर उनके साथ आगे निकल जाऊं.
खैर, मैंने जिद पकड़ ली कि मुझे श्रीनगर में समय बिताना है. मेरी श्रीनगर में ठहरने की जिद से हार कर उन्होंने मुझसे वादा लिया कि मैं किसी हाउस बोट के बजाय लाल चौक में रात गुजारूं. उस मोड़ पर हम गले मिले और उन्होंने मुझे अपने डर के हवाले किया.

दिन ढला ही जाता था कि मैं श्रीनगर में दाखिल हुआ. एक चौराहे में स्कूटर सवार ने आशियाने की पेशकश की. कुछ समय बाद मैं उनकी हाउस बोट ‘जहाँगीर’ में था. (A beauty of Kashmir)

आधे महीने के थका देने वाले सफर के बाद मैं अपनी बाइक की शक्ल नहीं देखना चाहता था. सो, कैमरा हाथ में लिया और निकल पड़ा डल की परिक्रमा करने. जैसे ही मुख्य सड़क पर पहुंचा तो सूरज को विदाई देता आकाश सामने था और उसके नीचे पसरी थी डल लेक. मैंने यूँ ही कैमरा उठाया, सेटिंग जांचे बिन क्लिक किया और नतीजा आपके सामने है.

कश्मीर वह जगह है जिसकी खूबसूरती के बारे में मैंने जो भी पढ़ा-सुना था कम लगा. (A beauty of Kashmir)


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