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Sunday, March 8, 2026
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अशराफ़-पसमांदाओं के बीच चली गोलियां

भारत में मुसलमानों के बीच अशराफ़ यानी ऊंची जातियों और पसमांदा यानी पिछड़ी व वंचित जातियों के बीच भेदभाव की लकीर छुपाने की काफी कोशिश होती है, लेकिन ये बार-बार दिख ही जाती है। शायद यही भेदभाव भांपकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पसमांदा समाज को इतना तवज्जो दे रहे हैं। असलियत क्या है? इसका अंदाज़ा गणतंत्र दिवस पर दो घटनाओं से लगाया जा सकता है। (Bullets fired Ashraf-Pasmandas)

पहली घटना दिन की है, जब गणतंत्र दिवस समारोह में उत्तरप्रदेश सरकार में मंत्री पसमांदा समाज के दानिश आज़ाद अंसारी को ज़मींदार परिवार में जन्मे पूर्व मंत्री सैयद मोहसिन रज़ा ने उनकी जगह पर बैठने नहीं दिया और डपटकर दूसरी जगह बैठने को मजबूर कर दिया। जबकि दानिश अंसारी के चेहरे को दिखाकर पसमांदा समाज में भाजपा उत्तरप्रदेश में पिछड़ी मुस्लिम बिरादरियों को साथ आने को कई सम्मेलन कर चुकी है।

दूसरी घटना गणतंत्र दिवस पर रात तकरीबन 11 बजे उत्तरप्रदेश के बरेली जिले में हुई। जब, अशराफ का हिस्सा, शेखों और पसमांदा का हिस्सा, फकीरों में गोली चल गई। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि रात के वक्त मेल में डांस पार्टी देखने मौजूदा प्रधान के समर्थक पहुंचे तो शेख बिरादरी वालों ने उनपर कुछ ऐसे कमेंट कर दिए कि नोकझोंक शुरू हो गई। मारपीट की नौबत आई तो एक पक्ष ने फायरिंग कर दी, जवाब में दूसरी ओर से भी फायरिंग हो गई। गोली चलने की आवाज सुनकर मेले में अफरातफरी का माहौल हाे गया, एक किस्म की भगदड़ हो गई। (Bullets fired Ashraf-Pasmandas)

मेला बहुत बड़े क्षेत्र में नहीं लगता तो अप्रिय घटना होने से बच गई और गनीमत रही कि फायरिंग करने वाले पक्षों में भी किसी को गोली नहीं लगी। कुछ लोगों के मामूली चोटिल होने की बात कही जा रही है। पुलिस ने भी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। जिस तरह का माहौल इस गांव में है, अशराफ-पसमांदा के बीच यह जंग हाल फिलहाल खत्म होने वाली नहीं है। (Bullets fired Ashraf-Pasmandas)


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