Indus News TV Live

Thursday, March 12, 2026
spot_img

आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के चुनिंदा शेर

हम अपना इश्क़ चमकाएँ तुम अपना हुस्न चमकाओ

कि हैराँ देख कर आलम हमें भी हो तुम्हें भी हो (Emperor Bahadur Shah Zafar)

 

न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब ओ हुनर

पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा

हाल-ए-दिल क्यूँ कर करें अपना बयाँ अच्छी तरह

रू-ब-रू उन के नहीं चलती ज़बाँ अच्छी तरह

 

ऐ वाए इंक़लाब ज़माने के जौर से

दिल्ली ‘ज़फ़र’ के हाथ से पल में निकल गई

 

लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में

किस की बनी है आलम-ए-ना-पाएदार में

 

बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला (Emperor Bahadur Shah Zafar)

क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल-ए-बहार में

 

ख़ुदा के वास्ते ज़ाहिद उठा पर्दा न काबे का

कहीं ऐसा न हो याँ भी वही काफ़िर-सनम निकले (Emperor Bahadur Shah Zafar)

 

औरों के बल पे बल न कर इतना न चल निकल

बल है तो बल के बल पे तू कुछ अपने बल के चल

 

ये चमन यूँही रहेगा और हज़ारों बुलबुलें

अपनी अपनी बोलियाँ सब बोल कर उड़ जाएँगी

 

चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना

देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या

 

मेरे सुर्ख़ लहू से चमकी कितने हाथों में मेहंदी

शहर में जिस दिन क़त्ल हुआ मैं ईद मनाई लोगों ने

(रेख़्ता से साभार)


इसे भी पढ़ें : आने वाली पीढ़ी के नाम : बर्तोल्त ब्रेख्त

यह भी पढ़ें: सपा नेत्री सम्युन ख़ान ने दी योगी सरकार को ये चुनौती


(आप हमें फेसबुक पेजइंस्टाग्रामयूट्यूबट्विटर पर फॉलो कर सकते हैं) 

Related Articles

Recent