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Thursday, March 12, 2026
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धार्मिक स्थलों की खुदाई ज्ञान के लिए तो ठीक है, लेकिन भौतिक परिवर्तन के लिए ठीक नहीं – तपेंद्र शाक्य, पूर्व आईएएस

इस देश में तमाम बौद्ध स्थलों को कब्जा करके उन पर दूसरे धर्मावलंबियों ने अपने धार्मिक स्थल बना लिए हैं।

पहले तो इतिहास जहाँ तक आया है, उसको खोदना ज्ञान के लिए तो ठीक है, लेकिन भौतिक परिवर्तन के लिए ठीक नहीं है। आप को इतिहास जानने का तो अधिकार है, ग़ैर विवादास्पद स्थलों पर भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन का भी औचित्य समझ में आता है, लेकिन धार्मिक स्थलों का उत्खनन या नए सिरे से उनका सर्वे और समीक्षा करना या उसके भौतिक स्वरूप में परिवर्तन‌ यह भारतीय एकता और अखंडता के लिए बहुत ही ख़तरनाक खेल है।

इतिहास को उलटने का कोई मतलब नहीं है और यह संभव भी नहीं है और यह एक मूर्खतापूर्ण, व्यर्थ का,‌ परिणाम शून्य और अराजक कार्यवाही है और इतिहास में घटी घटनाओं को आज के समय परिवर्तित करना बेहद ख़तरनाक शुरुआत होगी।

प्राचीन भारत राजाओं महाराजाओं सम्राटों बादशाहों सुल्तानों नवाबों ज़मींदारों का युग था और वहाँ एक व्यक्ति निर्णय लेता था, न हिंदु (वैदिक, शैव, वैष्णव धर्म) समुदाय निर्णय लेता था,‌‌ न बौद्ध समाज, न मुस्लिम समाज और न जैन समाज। एक व्यक्ति का निर्णय होता था, न कि समुदाय का निर्णय।

यदि उलटना ही है,तो भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा सारे संभावित धार्मिक स्थलों का,जिन्हें तोड़कर/क़ब्ज़ा करके अन्य धर्मावलंबियों के द्वारा अपने धार्मिक स्थल बनाए जाने का ज़रा भी संदेह है,उत्खनन कराया जाए और यह उत्खनन भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा कराया जाए।

इस उत्खनन के अनुश्रवण और समीक्षा के लिए जैन, बौद्ध, सिक्ख, हिन्दू (वैदिक, शैव, वैष्णव धर्म), मुस्लिम सभी समुदाय के पुरातत्वविद प्रतिनिधियों को लेते हुए एक अनुश्रवण समिति का गठन हो। उत्खनन के बाद जिस धार्मिक समुदाय का धर्मस्थल साबित हो उसे सौंप दिया जाए।

पूरे देश को लग करके पहले यही समस्या हल कर दिया जाए, बाद में अशिक्षा,‌ बेरोज़गारी, ग़रीबी, महँगाई, बिगड़ते भाई चारा और प्रेम मोहब्बत के माहौल को बाद में ठीक किया जाए। सभी लोग मिलकर पहले इतिहास ही सुधार लें, देश बाद में सुधारेंगे। 


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