Indus News Bihar : देश के सबसे बड़े शयन मुद्रा में बनी भगवान बुद्ध की प्रतिमा का रविवार को बौद्धों के थेरवाद और महायान परंपरा के संघ नायकों द्वारा संयुक्त रूप से अनावरण किया गया। शयन मुद्रा की प्रतिमा बुद्धा इंटरनेशनल वेलफेयर मिशन द्वारा वियतनाम के दानदाताओं के सहयोग से बनवाया गया है। (Buddha Statue Bodh Gaya)
जिसे संघ राजा और मोनास्ट्री के प्रभारियों ने संयुक्त रूप से हटाया। उसके बाद पुष्प वर्षा और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया गया। इस दौरान उपस्थित अन्य बौद्ध भिक्षुओं द्वारा सूत्त पाठ किया जा रहा था। गया-बोधगया नदी तटीय मार्ग पर अमवां ठोकर गांव के समीप मिशन का भवन है। इसी भवन के छत पर एक सौ फीट लंबी, 31 फीट ऊंची और 24 फीट चौड़ी शयन मुद्रा की प्रतिमा स्थापित है।
मिशन के संस्थापक सचिव भंते बी. आर्यपाल ने बताया कि प्रतिमा बनाने का कार्य जनवरी 2020 में कोलकाता में शुरू किया गया था। इसका निर्माण दो वर्षों में पूरा किया गया। उसके बाद इसे बोधगया लाकर स्थापित किया गया है। यह प्रतिमा पूर्णतया फाइबर ग्लास से बनायी गई है। (Buddha Statue Bodh Gaya)
प्रतिमा का स्वर्ण लेप का पेंट किया गया है। इसके कोलकाता में बनवाने और बोधगया लाकर स्थापित करने में लगभग 10 लाख रुपए खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि बोधगया बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए पवित्रम स्थल है।
यह बुद्ध का एक तरह से जन्म स्थली है, क्योंकि लुम्बिनी में तो राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म हुआ था। जिन्हें बोधगया में ज्ञान मिली और बुद्ध कहलाए, यानि बुद्ध के रूप में उनका जन्म इसी स्थान पर हुआ था।
उन्होंने कहा कि प्रतिमा अनावरण के मौके पर प्रतिमा निर्माण और मिशन की स्थापना में सहयोग करने वाले दिवंगत दानदाताओं के आत्मा की शांति के लिए सभी भिक्षुओं ने इस अवसर पर विशेष प्रार्थना किया। दिवंगतों की तस्वीर बुद्ध प्रतिमा के समीप रखा था।
भगवान बुद्ध के नई मुद्रा की है प्रतिमा
राजकुमार सिद्धार्थ की ज्ञानभूमि बोधगया में विभिन्न बौद्ध देशों के मंदिर और मोनास्ट्री हैं। सभी मंदिरों में भगवान बुद्ध की संबंधित देशाें की कला एवं संस्कृति के अनुरूप बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है। किसी मंदिर में भूमि स्पर्श, ध्यान और आर्शीवाद मुद्रा की प्रतिमाएं शामिल है। (Buddha Statue Bodh Gaya)
इसके अलावे लगभग एक दशक पूर्व अखिल भारतीय भिक्षु संघ के परिसर में थाईलैंड के दानदाताओं के सहयोग से भगवान बुद्ध की चलायमान मुद्रा की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके बाद अब भगवान बुद्ध की शयन मुद्रा की प्रतिमा का अनावरण हुआ है। चलायमान और शयन मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा देश में अन्यत्र किसी बौद्ध स्थलों में देखने को नहीं मिलता है।