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Thursday, March 12, 2026
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पहेली बन गई है झारखंड की राजनीति: ट्रेजडी, इमोशंस और सस्पेंस !

रांची। ट्रेजडी, इमोशंस और पॉलिटिकल सस्पेंस ! सब कुछ, रजनीति के जानकार भी अब सोच में पड़ गए हैं की झारखण्ड कई रजनीति में क्या होगा? दरअसल, मुश्किल है हेमंत सोरेन की राजनीति को समझना। वो दिशोम गुरू और झारखंड की रजनीति की दिग्गज शिबू सोरेन की पुत्र हैं। इंजीनियरिंग की स्टूडेंट रहे हैं वो जिस तरह से मौजूदा दौर में सियासी इंजीनियरिंग गढ़ रहे हैं उनसे उनका कद विपरीत पारिस्थिति में राजनैतिक दूरदर्शिता को दिखा रहा है। (Jharkhand Politics Become Puzzle)

इसमें कोई शक नहीं की आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का वह रूप भी देखने को मिलेगा, संभवतः जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं कई होगी। वो आदिवासी समाज से आते हैं इस ताकत को वो भी जानते हैं वो बीजेपी भी।

राजनैतिक नफे नुक्सान की इस खेल में फिलहाल बाजी हेमंत सोरेन की हाथ में है। क्योंकि ताजा घटनाक्रम में अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाये जाने की कयास पर बीजेपी कई मोर्चाबंदी पर फिलहाल बीजेपी को पटखनी दे चुके हैं। बीजेपी में बाबूलाल मरांडी को छोड़कर सबकी बोलती बंद है।

दरअसल, झारखंड की राजनीति एक अबूझ पहेली बनती जा रही है। नववर्ष के पहले दिन से लेकर तीन तारीख तक जो घटनाएं देखने को मिलीं, उसका आखिर क्या मतलब निकलता है। एक जनवरी को सरफराज अहमद के गांडेय सीट छोड़ने वाली बात सामने आते ही ऐसा लगा कि कुछ बड़ा होने वाला है। दिन भर उनके इस्तीफे की वजह ढूंढा जाता रहा।

भाजपा के कई नेताओं ने यहां तक कह दिया कि सारा खेल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का रचा हुआ है।
संभावनाओं के बादल और ज्यादा तब गहरा गये जब सीएम आवास पर सत्ताधारी दलों के विधायकों की बैठक का समय तय होते ही राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन 2 जनवरी की शाम चेन्नई के लिए रवाना हो गये। लेकिन 2 जनवरी को ही कल्पना सोरेन के नाम पर विराम लगाकर सीएम ने नया सस्पेंस खड़ा कर दिया।

उन्होंने दो टूक कह दिया कि यह भाजपा की कोरी कल्पना भर है. कल्पना सोरेन सीएम नहीं बनने जा रही हैं।अब सबकी नजर 3 जनवरी को सत्ताधारी दल के विधायकों की बैठक पर थी। (Jharkhand Politics Become Puzzle)

बैठक के प्रस्तावित समय से करीब 11 घंटा पहले ईडी की चौतरफा रेड ने माहौल को और गरमा दिया, क्योंकि यह रेड सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू के अलावा साहिबगंज के डीसी रामनिवास यादव समेत कई करीबियों के ठिकानों पर पड़ी थी। लेकिन एक तरफ रेड चलता रहा और दूसरी तरफ शाम होते ही सीएम आवास पर विधायकों का जमावड़ा लग गया. इसी बीच एक और नया डेवलपमेंट हुआ।

बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल के नाम लिखी अपनी चिट्ठी सार्वजनिक कर दी। उन्होंने आग्रह कर दिया कि अगर कोई गैर विधायक सरकार बनाने का दावा पेश करता है तो वह असंवैधानिक होगा. इसबीच सीएम आवास पर करीब दो घंटे चली बैठक के बाद जब विधायक बाहर निकले तो बयान आया कि ऑल इज वेल। हेमंत सोरेन ही मुख्यमंत्री रहेंगे।

‘हॉट केक’ बने सरफराज अहमद ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी का दम निकल जायेगा। इधर, सीएम आवास पर मीटिंग खत्म हुई नही कि पूरा अटेंशन ईडी रेड की तरफ शिफ्ट हो गया।

चर्चा शुरु हो गई कि आज अभिषेक उर्फ पिंटू और साहिबगंज के डीसी पर ईडी की गाज गिर सकती है. लेकिन रात करीब 10.30 बजे तक सभी जगहों से ईडी की टीम लौट गई।किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।अब आम लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर चल क्या रहा है। (Jharkhand Politics Become Puzzle)

सियासी तूफान उठा क्यों.अचानक सन्नाटा क्यों पसर गया। ईडी को रेड में आखिर क्या मिला। इस पर ईडी की ओर से कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है. इसको लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। सवाल उठ रहे हैं। वहीं सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि सभी सत्ताधारी दलों के विधायकों से कह दिया गया है कि अगले कुछ दिनों तक रांची में ही रहना है। इसका मतलब साफ है है कि पिक्चर अभी बाकी है…


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