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Monday, March 9, 2026
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सम्राट अशोक का जन्मदिन कब है, जानिए दिलचस्प तथ्य

डॉ.प्रताप चाटसे-

सम्राट अशोक के जन्म से संबंधित उनका जन्म तारा (Birth Star) पुनर्वसु तारा है और उनके राज्याभिषेक से संबंधित अभिषेक तारा (Coronation Star) पुष्य तारा है, इसलिए सम्राट अशोक ने पुनर्वसु और पुष्य तारे से संबंधित दिनों को अधिक महत्व दिया था| सम्राट अशोक अपने 5 वे स्तंभ अभिलेख (PE 5) में आदेश देते हैं कि, पुनर्वसु तथा पुष्य तारों के दिन अष्टमी पर प्राणियों की हत्या न करें| इससे स्पष्ट होता है कि, पुनर्वसु तारा सम्राट अशोक के जन्म का तारा है| ( Asoka. Mookherjee, p. 184) (Emperor Ashoka birthday facts)

चैत्र शुक्ल अष्टमी अर्थात अशोकाष्टमी के दिन पुनर्वसु तारा जब आकाशमंडल में सुरज और चांद की एक धारा में आया था तब चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन सम्राट अशोक का जन्म हुआ था| कलिंग के लोग आज भी सम्राट अशोक के जन्म दिन के तौर पर हर साल चैत्र शुक्ल अष्टमी को रुकुम लिंगराज की रथयात्रा मनाते है|

लिंगराज मंदिर वास्तव में सम्राट अशोक ने बनवाया हुआ विहार है| (Jagannath and Buddha, Ajit Kumar Tripathi, p. 65) सम्राट अशोक ने यह उत्सव अपने जन्मदिन पर कलिंग युद्ध के बाद लोगों को खुशहाल बनाने के उद्देश्य से शुरू कर दिया था|

इस उत्सव के कारण कलिंग के लोग कलिंग युद्ध का अपना दुख भुल गये थे और अशोक के मौर्य साम्राज्य में खुशी से सम्मिलित होकर जीवन जीने लगे थे| इसलिए, चैत्र शुक्ल अष्टमी अर्थात अशोकाष्टमी का कलिंग में महत्व बढ गया था और इस दिन आज भी ओरिसा में सम्राट अशोक के जन्मदिवस उत्सव की याद में कलिंग महोत्सव मनाया जाता है| (Kalinga Mahotsav, Odisa) (Emperor Ashoka birthday facts)

भारत में अपना जन्मदिन मनाने की परंपरा सम्राट अशोक ने शुरू कर दी थी| अपने जन्मदिन के उत्सव में सम्राट अशोक हर पांचवे साल “पंचवार्षिक बौद्ध उत्सव” मनाते थे, जिसमें वे अपनी संपुर्ण संपत्ति तथा साम्राज्य का भिक्खुसंघ को दान देते थे और दान की धार्मिक प्रक्रिया पुरी होने के बाद फिर से वापिस लेते थे|

यह उत्सव सम्राट कनिष्क, सम्राट हर्षवर्धन तथा सिंध और अफगानिस्तान के अनेक बौद्ध राजाओं ने कायम रखा था, जिसका वर्णन चीनी यात्री फाह्यान और ह्युएनत्संग ने किया है| (Records of the Buddhist Kingdom, Fahian, p. 22) फाह्यान और ह्युएनत्संग कहते हैं कि, हर साल कुछ जगहों पर यह उत्सव मनाया जाता था और बुद्ध की रथयात्रा निकाली जाती थी| (Emperor Ashoka birthday facts)

रथयात्रा के बारे में फाह्यान कहते हैं कि खोतान का राजा अपनी प्रजा के साथ रथयात्रा निकलता था| इसी तरह की रथयात्रा जगन्नाथ पुरी में निकाली जाती थी, जिसे “आषाढ शुक्ल द्वितीय रथयात्रा” कहा जाता था| तथागत बुद्ध के जन्मदिन बैसाखी पुर्णिमा के दिन भी संपुर्ण जम्बूद्वीप में बुद्ध की रथयात्रा निकाली जाती थी| (The famous Car festival of Puri, Rabindra Kumar Behiria, p. 106)

इससे स्पष्ट हो जाता है कि, एक वर्ष में अनेक बार अलग अलग कारणों से बुद्ध की रथयात्रा भारत में निकाली जाती थी| चैत्र शुक्ल अष्टमी अर्थात अशोकाष्टमी को सम्राट अशोक के जन्मदिन की याद में रथयात्रा निकाली जाती थी| सम्राट अशोक ने बुद्ध की अस्थियों को कलश (कुंभ) में रखकर बुद्ध की रथयात्रा कलिंग में शुरू कर दी थी| बाद में कलिंग के माली लोगों ने वह जारी रखी थी|

सम्राट अशोक ने भुवनेश्वर में यह रथयात्रा बुद्ध की मौसी महाप्रजापती गोतमी के स्तुप तक यह रथयात्रा निकाली थी| इसलिए, आज भी यह रथयात्रा भुवनेश्वर में “मौसी माँ के घर” तक निकाली जाती हैं| (Jagannath and Buddha, p. 65) (Emperor Ashoka birthday facts)

इससे स्पष्ट हो जाता है कि, अशोकाष्टमी यह सम्राट अशोक का जन्मदिन ही है| लेकिन, सम्राट अशोक का जन्मोत्सव मिटाने के लिए बाद में ब्राह्मणों ने काल्पनिक राम का जन्मोत्सव रामनवमी यह अशोकाष्टमी के दुसरे दिन मनाना शुरू कर दिया| राम का जन्मतारा (Birth Star) भी अशोक की तरह पुनर्वसु है| (वाल्मीकि रामायण, 1.18.8-9)

विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने सम्राट अशोक पर “Asoka” यह बुक लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि, पुनर्वसु तारा को सम्राट अशोक का जन्मदिन का तारा (Birth Star of Asoka) कहा जाता है| (Asoka, Vincent Smith, p. 206-207) उन्होंने बताया है कि, सम्राट अशोक अपने जन्मदिन पर बड़ी संख्या में कैदियों को कारागार से छोडते थे और पशु हत्या पर उस दिन उन्होंने पुर्णतः पाबंदी लगा दी थी|

सम्राट अशोक ने यह बात खुद अपने अभिलेख 5 में लिखकर रखी है| इस तरह से इतिहास में जन्मदिन मनाने की परंपरा सम्राट अशोक ने पहली बार शुरू कर दी थी, ऐसा विंसेंट स्मिथ जी का मानना है| (Emperor Ashoka birthday facts)

सम्राट अशोक अपने अभिलेख 5 में (Edict V) यह लिखते हैं कि, पुष्य तथा पुनर्वसु तारा जब पुर्णिमा के चांद के साथ स्पष्ट दिखाई देता है, उस दिन सभी प्रकार की प्राणीहत्या पर पाबंदी है| इतना ही नहीं, बल्कि इस दिन बुद्ध की रथयात्रा तथा विभिन्न विमानों का अर्थात नाटकों का आयोजन कर सम्राट अशोक अपना जन्मदिन मनाते थे| इतना ही नहीं, बल्कि पुष्य अर्थात तिष्य तारा सालभर में जिस जिस दिन आता है, उन दिनों पर सम्राट अशोक ने प्राणीहत्या पर पाबंदी लगा दी थी और धम्म कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया था| (Inscriptions of Asoka, D. C. Sircar, p. 101)

इससे स्पष्ट होता है कि सम्राट अशोक का जन्मदिन चैत्र शुक्ल अष्टमी अर्थात अशोकाष्टमी है, जब पुष्य तारा चांद के साथ दिखाई देता है| (Emperor Ashoka birthday facts)

अशोकाष्टमी ही सम्राट अशोक का जन्मदिन निश्चित होता है (Asoka, Mookherjee, p. 185) और इसा पूर्व 304 में (304 BC में) चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन सम्राट अशोक का जन्म हुआ था यह हम प्रमाणों के साथ कह सकते हैं| इसलिए, हर साल चैत्र शुक्ल अष्टमी अर्थात अशोकाष्टमी के दिन देशभर में सम्राट अशोक की जयंती मनानी चाहिए| इस साल अशोकाष्टमी 16 अप्रैल 2024 को है और यह 2328वीं सम्राट अशोक जयंती है।

(यह लेख डॉ.प्रताप चाटसे की फेसबुक वॉल से लिया गया है, जो कि बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के प्रमुख पदाधिकारी हैं व बहुजन आंदोलन के कार्यकर्ता हैं। तथ्य व निष्कर्ष डॉ.चाटसे की निजी पड़ताल है।)

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