बरेली, 11 जून 2026। समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेताओं ने भाजपा सरकार पर पिछड़ा, दलित और आदिवासी (पीडीए) वर्ग के आरक्षण अधिकारों की अनदेखी करने तथा सरकारी भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं करने के गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान विभिन्न भर्तियों में आरक्षण के कथित उल्लंघन और पेपर लीक जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इस दौरान पार्टी के द्वारा पड़ा आरक्षण घोटाला नाम से पीडीए ऑडिट अंक एक पुस्तिका भी जारी की गई जिसमें विस्तार से परीक्षाओं और भर्तियों में घोटाला होने के आरोप लगाए गए।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछड़े वर्गों के आरक्षण के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है और सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था के साथ घोटाला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संविधान प्रदत्त अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

वहीं प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सपा के आंवला सांसद नीरज मौर्य ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने आरक्षण, भर्ती और सामाजिक न्याय से जुड़े कई मुद्दे संसद में उठाए हैं, लेकिन केंद्र सरकार इन विषयों पर उदासीन बनी हुई है और कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही है। आरक्षण नीति को लेकर पूछे गए सवाल पर नीरज मौर्य ने कहा कि यदि भविष्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो संविधान की मूल भावना और संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार आरक्षण को पूरी तरह लागू किया जाएगा।
कार्यक्रम में मौजूद समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव और बहेड़ी विधायक अता-उर-रहमान ने भी मौजूदा सरकार पर हमला बोलते हुए यह सरकार बाबा साहब के संविधान को खत्म कर देना चाहती है। उन्होंने किसान और खेती के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

कार्यक्रम में मौजूद पूर्व विधायक सुल्तान बेग, पूर्व विधायक आर के शर्मा, पूर्व विधायक विजयपाल सिंह, पूर्व विधायक शहजिल इस्लाम, महानगर अध्यक्ष शमीम सुल्तानी, पूर्व जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव सहित अन्य नेताओं ने भी भाजपा सरकार पर आरक्षण और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोप लगाए। नेताओं का कहना था कि सामाजिक न्याय और समान अवसरों की व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी बरेली के पूर्व जिला अध्यक्ष अगम मौर्य ने पेपर लीक का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस मामले में न तो जिम्मेदारी तय कर रहे हैं और न ही सरकार कोई ठोस कदम उठा रही है।



