बरेली, 15 जून 2026। बरेली की तहसील बहेड़ी के ग्राम बिजौरिया परगना चौमहला के किसानों ने चकबंदी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और लाखों रुपये की अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए हल्का लेखपाल मुनीश चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी समेत चकबंदी विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी के दौरान किसानों के चकों में मनमाने ढंग से बदलाव किए जा रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई किसानों के चक उनकी सहमति के बिना काटे गए, कम मालियत वाली जमीनों में स्थानांतरित किए गए तथा कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया। किसानों का कहना है कि चकों के आवंटन और परिवर्तन के नाम पर उनसे रिश्वत की मांग की गई और लाखों रुपये की वसूली की गई।
शिकायत पत्र में कई किसानों के नाम दर्ज हैं, जिनके अनुसार उनके खेतों और चकों में बिना उचित कारण फेरबदल किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी अधिनियम के नियमों की अनदेखी कर भूमि आवंटन में अनियमितताएं की गई हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। शिकायत पत्र पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठा निशान भी दर्ज हैं।
संबंधित क्षेत्र के सहायक चकबंदी अधिकारी का पक्ष
हमने इस मामले को लेकर क्षेत्रीय सहायक चकबंदी अधिकारी से बात की। उनका कहना था कि उन्होंने किसी प्रकार की कोई वसूली नहीं की है। जब उनसे कहा गया कि वसूली के आरोप उन पर नहीं बल्कि लेखपाल पर लगाए गए हैं, तो वह इस संबंध में कोई स्पष्ट और सटीक जवाब नहीं दे पाए।
क्या बोला आरोपी चकबंदी लेखपाल?
वहीं, जब हमने लेखपाल मुनीश चौधरी से बात की तो उनका कहना था कि चक काटने या बनाने का काम उनके द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि चक सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा बनाए जाते हैं। हालांकि, जब उनसे किसानों द्वारा लगाए गए वसूली के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस संबंध में फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
डीडीसी का पक्ष अभी नहीं मिल सका..
हमने इस पूरे मामले को लेकर उप संचालक चकबंदी से भी संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे हमारी बात नहीं हो सकी। दो-तीन बार उनके कार्यालय जाकर संपर्क करने की कोशिश की गई, परंतु वह उपलब्ध नहीं मिले। जैसे ही उनका पक्ष प्राप्त होगा, उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।