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Wednesday, June 24, 2026
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बरेली: सनराइज अस्पताल पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई, सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग, पीड़ित परिवारों में बढ़ता आक्रोश

बरेली: बरेली के कुख्यात सनराइज अस्पताल प्रकरण को आठ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई ऐसी कार्रवाई सामने नहीं आई है जिससे यह लगे कि मामले को उसकी गंभीरता के अनुरूप लिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि शिकायतें हुईं, जांच हुई, रिपोर्टें आईं, धरना-प्रदर्शन हुए, लेकिन परिणाम आज भी शून्य दिखाई देता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में कमियां सामने आई थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि कोई कमी नहीं थी तो फिर महीनों तक जांच और आश्वासनों का सिलसिला क्यों चलता रहा?

एक मौत से शुरू हुआ विवाद, फिर सामने आए कई गंभीर आरोप
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब उपचार के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद आयुष्मान योजना के अंतर्गत बड़ी अनियमितताओं, अतिरिक्त धन वसूली, इलाज में लापरवाही और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे।
परिजनों का आरोप है कि गरीब परिवारों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलने के बावजूद उनसे धन लिया गया। मामला सामने आने के बाद व्यापक जांच की मांग उठी और स्वास्थ्य विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
वापस किया गया पैसा क्या कार्रवाई थी?
मामले में कथित रूप से वसूली गई कुछ धनराशि पीड़ित पक्ष को वापस किए जाने की बात सामने आई। लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि धनवापसी को कार्रवाई बताना भ्रामक है।
उनका तर्क है कि यदि आयुष्मान योजना के नियमों के तहत गलत तरीके से ली गई राशि वापस कराई गई, तो यह केवल नियमों का अनुपालन है, दंडात्मक कार्रवाई नहीं। वास्तविक कार्रवाई तब मानी जाती जब यह जांच होती कि पैसा लिया कैसे गया, किसकी जिम्मेदारी थी और इसके लिए कौन उत्तरदायी है।
यही वह बिंदु है जिस पर पीड़ित पक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
क्या अस्पताल की गहन जांच हुई?
मामले का दूसरा और शायद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या अस्पताल की व्यापक प्रशासनिक और चिकित्सकीय जांच की गई?
क्या अस्पताल के रिकॉर्ड, भर्ती प्रक्रिया, बिलिंग प्रणाली, आयुष्मान दावों, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, आपातकालीन सुविधाओं और मानकों की अलग-अलग जांच हुई?
यदि हुई, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
यदि नहीं हुई, तो फिर इतने गंभीर आरोपों के बाद जांच प्रक्रिया अधूरी क्यों छोड़ दी गई?
CMO की भूमिका पर उठ रहे सवाल
पूरे मामले में सबसे अधिक सवाल मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।
पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार समय लेता रहा लेकिन निर्णायक कदम नहीं उठा पाया। कई बार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन धरातल पर कोई बड़ा निर्णय दिखाई नहीं दिया।
स्वास्थ्य विभाग के आलोचकों का कहना है कि यदि विभाग स्वयं अपनी जांचों और अनुशंसाओं पर अमल नहीं करेगा, तो फिर ऐसी जांचों का उद्देश्य क्या रह जाता है?

धरना, ज्ञापन और आश्वासन… लेकिन परिणाम क्या?
मामले को लेकर पीड़ित परिवारों ने धरना दिया, अधिकारियों से मुलाकात की, ज्ञापन सौंपे और लगातार न्याय की मांग उठाई।
परिजनों का कहना है कि उन्हें कई बार कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन समय बीतने के साथ आश्वासन तो रहे, कार्रवाई नहीं।
यही कारण है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा बढ़ रही है कि आखिर प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों हो रही है। जनता जानना चाहती है इन सवालों के जवाब
क्या अस्पताल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है?
क्या अस्पताल को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया?
क्या अस्पताल के पंजीकरण की समीक्षा की गई?
क्या आयुष्मान योजना से जुड़े सभी दावों की जांच हुई?
क्या जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय हुई?
और सबसे महत्वपूर्ण, आठ महीने बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

CMO से मांगा जाएगा जवाब
इंडस न्यूज़ टीवी ने इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया। हालांकि अब तक इस विषय पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
लेकिन यह मामला यहीं समाप्त नहीं होगा।
इंडस न्यूज़ टीवी जल्द ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सीधे और तीखे सवाल पूछेगा। हम जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर आठ महीने बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जांच किस स्थिति में है और स्वास्थ्य विभाग जनता को क्या जवाब देना चाहता है।
यह सिर्फ एक अस्पताल का मामला नहीं
यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। यह सवाल पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही, निरीक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर खड़ा हो चुका है।
यदि गंभीर शिकायतों, जांच रिपोर्टों और जनदबाव के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो जनता यह जानना चाहती है कि आखिर स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तय कौन करेगा।

 

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