सनराइज अस्पताल मैनेजर सोहेल खान को भीम आर्मी ने संगठन से निकाला, पत्रकारों को धमकी समेत कई विवादों पर गिरी गाज; पुलिस कार्रवाई में संगठन साथ
बरेली। सनराइज अस्पताल के मैनेजर और भीम आर्मी के मंडल उपाध्यक्ष रहे सोहेल खान को आखिरकार संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। भीम आर्मी भारत एकता मिशन, बरेली मंडल के मंडल महासचिव आकाश सागर की ओर से जारी पद-मुक्ति एवं निष्कासन आदेश में सोहेल खान को मंडल उपाध्यक्ष के पद से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने के साथ संगठन की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित किए जाने की बात कही गई है।
संगठन के निष्कासन पत्र में कहा गया है कि सोहेल खान द्वारा संगठन की अनुशासनात्मक मर्यादाओं और संगठनात्मक नियमों का उल्लंघन किया गया। संगठन ने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए उसे संगठन की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि अब सोहेल खान का संगठन के किसी भी पद, जिम्मेदारी अथवा अधिकृत प्रतिनिधित्व से कोई संबंध नहीं रहेगा।
विवादों से लगातार घिरा रहा सोहेल खान का नाम
सोहेल खान का नाम पिछले काफी समय से सनराइज अस्पताल से जुड़े विवादों और गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। सनराइज अस्पताल में टीटू वाल्मीकि की मौत के मामले में भी उस पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी मामले की कवरेज के दौरान पत्रकार संतोष शाक्य के साथ सोहेल खान द्वारा कथित मारपीट/हमले का मामला भी सामने आया था। उस समय उसके खिलाफ कार्रवाई और FIR की मांग उठी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं हो सकी।

इसके बाद 28 अगस्त 2026 को हरीश कुमार द्वारा आरोप लगाया गया कि उनके मरीज को एंबुलेंस के माध्यम से सनराइज अस्पताल लाया गया और अस्पताल में इलाज की आवश्यकता को लेकर विवाद के बीच सोहेल खान द्वारा उनसे करीब 50 हजार रुपये की रकम वसूलने का प्रयास किया गया, जबकि उनके अनुसार मरीज को गंभीर उपचार की जरूरत नहीं थी। परिवार का आरोप था कि थोड़े समय के भीतर ही उनसे बड़ी रकम की मांग की गई और मरीज को बाहर ले जाने में भी परेशानी खड़ी की गई। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मरीज को अस्पताल से बाहर ले जाया गया। इन आरोपों की वास्तविकता जांच का विषय है।

इसके अलावा उर्वेश की मृत्यु के मामले में भी सोहेल खान के खिलाफ FIR दर्ज है, जिसमें इलाज और आयुष्मान योजना से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। सोहेल खान पर पहले से कई मुकदमे दर्ज होने की बात भी सामने आती रही है। ऐसे में उसके खिलाफ लगातार सामने आते विवादों ने सनराइज अस्पताल की कार्यप्रणाली और वहां मरीजों से जुड़े मामलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पत्रकारों को धमकी का मामला बना निर्णायक वजह
हाल में पत्रकारों के साथ गाली-गलौज और धमकी देने का मामला सामने आने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो को लेकर पत्रकारों में आक्रोश था। इसी मामले में पुलिस ने सोहेल खान के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू की। FIR में उसे नामजद आरोपी बनाया गया है और मामले की विवेचना पुलिस अधिकारी को सौंपी गई है।

इसी पूरे घटनाक्रम के बीच अब भीम आर्मी ने संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए उसे बाहर कर दिया है। निष्कासन आदेश में अनुशासनहीनता को आधार बनाया गया है, जबकि संगठन के पदाधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों और गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति के संगठन में शामिल होने की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए।
अब पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग
भीम आर्मी पदाधिकारी ने संकेत दिया है कि सोहेल खान के खिलाफ सामने आए मामलों को लेकर पुलिस प्रशासन से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। संगठन का कहना है कि पीड़ितों और पत्रकार साथियों के साथ न्याय के लिए वह उनके साथ खड़ा रहेगा।

इस पूरे मामले ने सनराइज अस्पताल को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों से जुड़े विवाद, एंबुलेंस के जरिए मरीजों को लाए जाने के आरोप, बिल और उपचार को लेकर शिकायतें, उर्वेश की मौत का मामला और अब पत्रकारों को धमकी का प्रकरण—इन तमाम घटनाओं की कड़ियां क्या महज संयोग हैं या इनके पीछे कोई व्यवस्थित व्यवस्था काम कर रही थी? यह जांच का बड़ा विषय है।
अब सोहेल खान को संगठन से बाहर किए जाने के बाद सवाल सिर्फ उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का नहीं, बल्कि सनराइज अस्पताल की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े तमाम विवादों की निष्पक्ष जांच का भी है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही स्पष्ट होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होती है।