बरेली कलेक्ट्रेट में पांच पत्रकारों के खिलाफ 25 सितंबर को एडीएमई के स्टेनो संजीव कुमार कश्यप ने रंगदारी मांगने और वसूलने का मुकदमा दर्ज कराया, यह मामला अब दूर-दूर तक चर्चा में है। आरोपों के अनुसार, पत्रकारों ने सीसीटीवी कैमरों से लैस और पुलिस सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साए में दिन के उजाले में, सैकड़ों लोगों की आवाजाही के बीच 3000 रुपए प्रति व्यक्ति रंगदारी मांगी और अगले दिन 2000 रुपए प्रति व्यक्ति रंगदारी वसूल ली। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि इन पांचों पत्रकारों की निजी प्रोफाइल कैसी है!
पता चला कि पांच में से दो इंजीनियर हैं और एक छात्र। चार गांव के रहने वाले हैं। शहर में सिर्फ एक का पैतृक मकान है। शहर में रोज पत्रकारिता करने के लिए उन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना होता है या पूलिंग लिफ्ट। पांच में से एक का पैरालाइसिस का इलाज चल रहा है और एक की ब्रेन ट्यूमर सर्जरी हो चुकी है। सबकी बैकग्राउंड का संक्षिप्त ब्योरा क्या है, आप भी जानिए रंगदारी के आरोप में पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे पांचों पत्रकारों के बारे में ।
आरोपी पत्रकार – संतोष शाक्य

बरेली की बहेड़ी तहसील के गांव के रहने वाले साधारण किसान परिवार के संतोष शाक्य मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक हैं। अविवाहित हैं, उम्र 30-35 साल के बीच। डिजिटल माध्यम में पत्रकारिता और बौद्धिक लेखन में पारंगत हैं। डिजिटल मार्केटिंग की आय और परिवार से मिले राशन से जीवनयापन होता है। पढ़ाई कर रही दो बहनों के साथ किराए के कमरे में रहते हैं।
संतोष शाक्य की यह वीडियो दिसंबर 2025 की है, जिन दिनों सनराइज अस्पताल विवाद चल रहा था और इंडस न्यूज के साथी अचानक सुबह के समय उनके कमरे पर पहुंचे थे-
फक्कड़ मिजाज और सादे रहन सहन वाले संतोष ने बीते आठ-नौ साल से सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर खबरें, विश्लेषण, इंटरव्यू करके देशव्यापी बड़े दायरे में अलग पहचान बनाई है। तीन साल से इंडस न्यूज टीवी के साथ भी सामाजिक मुद्दों पर काम किया। ‘क्लियर कट’ नाम से उनका स्पेशल शो भी चला।
कुछ साल पहले ब्रेन ट्यूमर की वजह से सर्जरी हुई, जिसकी वजह से कुछ दवाएं और परहेज आज भी करते हैं। शहर में किराए के जिस कमरे में रहते हैं, वहां उनके कमरे में किताबों के अलावा बाबा साहेब आंबेडकर, छत्रपति शिवाजी, भगवान बुद्ध, ज्योतिबा फुले आदि की उपहार में मिली तस्वीरें हैं। बहुजन कहे जाने वाले एससी, एसटी और ओबीसी समाज की तरक्की के लिए चिंतन करना और उसको शब्दों में पिरोकर पेश करना उनकी दिलचस्पी है।
संतोष शाक्य के शो ‘क्लियर कट’ का एक हिस्सा-
शहर की स्थानीय खबरों की कवरेज से उनका मतलब नहीं रहा, इंडस न्यूज टीवी भी पैन इंडिया कंटेंट प्रसारित करने पर जोर देता है। स्थानीय खबरों की ओर उनका रुख 28 नवंबर 2025 की घटना के बाद तब हुआ, जब सनराइज अस्पताल में टीटू वाल्मीकि की मौत के मामले में उन्होंने रैंडम कवरेज की और वहां के मैनेजर सुहेल खान ने उन पर हमला कर दिया।
इसके बाद पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन, राजनीतिक नेताओं, मेनस्ट्रीम मीडिया से जो उम्मीदें उनको थीं, वो बिखरती चली गईं। उन्हें अहसास हुआ कि इस सिस्टम में कैसे सब जोंक बने हुए हैं और न्याय मिलना पर्वत को धकेलने जैसा है।
28 नवंबर 2025 को संतोष शाक्य की सनराइज अस्पताल की लाइव कवरेज-
फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वंचितों की आवाज बनने की कोशिश की। स्थानीय रिपोर्टिंग का हुनर नहीं था, लेकिन समझ तो थी ही। बीते दो-तीन महीने से लोकल रिपोर्टिंग करने वालों से मिलना, उनके साथ रिपोर्टिंग करना शुरू किया। स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाली घटनाओं पर उनका विशेष ध्यान गया, क्योंकि टीटू वाल्मीकि, उर्वेश यादव के केस ने भ्रष्ट सिस्टम की झांकी दिखा दी थी। कहीं पर भी अन्याय की आशंका की सूचना मिलने पर संतोष पीड़ितों की आवाज पत्रकारिता के माध्यम से उठाने की कोशिश करने लगे।
कुछ समय पहले उन्होंने इलेक्ट्रिक सिटी बस से कलेक्ट्रेट और पुलिस कार्यालय आना शुरू कर दिया, क्योंकि कोई दुपहिया वाहन नहीं है और ऑटो से आने-जाने में ज्यादा खर्च होगा, सिटी बस से शहर के गड्ढों में झटकों से ब्रेन सर्जरी के बाद की पीड़ा भी कम सहन करना होगी। कई खबरों के मामलों में डीएम-एसएसपी से भी मिले। कलेक्ट्रेट पर आने वाले रिपोर्टरों से परिचय बना।

इसी बीच 22 सितंबर को स्टेनोग्राफर से क्यूआर कोड से हैसियत प्रमाणपत्र की फीस 5000 रुपए संबंधी सवाल पूछना अपराध बन गया और पांच पत्रकारों पर एफआईआर में उनका नाम भी शामिल हो गया।
इंडस न्यूज टीवी के विशेष संवाददाता संतोष इस समय एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के सिलसिले में उत्तरप्रदेश से बाहर गए हैं। उनकी गैरहाजिरी में इंडस न्यूज टीवी की बरेली टीम सक्रिय है। इंडस न्यूज टीवी के कंटेंट को हर महीने तीन से पांच करोड़ लोग देखते हैं।
आरोपी पत्रकार – पवन त्रिपाठी

40 वर्षीय पवन त्रिपाठी का बरेली शहर में ही पैतृक मकान है, दो भाईयों में छोटे और अविवाहित हैं। पवन के भाई पंकज त्रिपाठी परिवार के साथ मुरादाबाद में रहकर पीतल का कारोबार करते हैं। पंकज ने इंडस न्यूज टीवी को बताया कि एफआईआर की सूचना मिलने पर उन्हें चिंता हुई, जबकि पंकज खुद ही इतने सक्षम हैं कि उन्होंने कई अच्छी नौकरियां करने के बाद पत्रकारिता में हाथ आजमाना शुरू किया।
समाचार प्लस ओटीटी के पत्रकार पवन ने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग में एमटेक किया है। एमटेक करने के बाद 2008 में भारत पेट्रोलियम के महाराष्ट्र के खपोली प्लांट में शिफ्ट इंचार्ज रहे, उसके बाद 2009 में तमिलनाडु के मदुरै में प्लांट इंचार्ज रहे और फिर 2011 में आगरा में भी प्लांट इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने सवा लाख रुपए सैलरी वाली नौकरी छोड़ने का फैसला किया और पत्रकारिता में दिलचस्पी पैदा हुई। पहले स्वतंत्र रूप से लिखना शुरू किया, फिर मीडिया संस्थानों से जुड़े।

पांच साल पहले पवन त्रिपाठी को ब्रेन हेमरेज हुआ, जिसका इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ। कुछ दिन पहले, रक्षाबंधन के समय पैरालाइसिस अटैक हुआ, जिसका इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य सुधार के बाद रिपोर्टिंग में लौटे और 22 सितंबर को उन्होंने अवधेश की डीएम से स्टेनो की शिकायत पर बाइट बनाई थी, एसपी विजिलेंस, एंटी करप्शन सेल में प्रकरण बताने और फिर स्टेनो से पक्ष जानने अन्य पत्रकारों के साथ गए थे। इसके तीन दिन बाद स्टेनो द्वारा दर्ज कराई एफआईआर में उनका भी नाम आरोपियों में शुमार हो गया।
आरोपी पत्रकार- अवधेश कुमार

22 साल के अवधेश बहेड़ी के गांव के रहने वाले हैं और मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया है। अविवाहित हैं। अभी भी पत्रकारिता की पढ़ाई करने के साथ स्वतंत्र तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं।
हैसियत प्रमाणपत्र का प्रकरण इन्हीं का था। प्रमाणपत्र इनके पिता का था, जिसे जारी करने से पहले स्टेनो संजीव कश्यप ने 5000 रुपए एक समिति के क्यूआर कोड पर जमा करने की शर्त लगा दी। अवधेश ने थर्ड आई कैमरे से स्टेनों के साथ बातचीत रिकॉर्ड कर ली, इसके बाद डीएम को लिखित शिकायत की उसी दिन, बाद में अन्य पत्रकारों को प्रकरण बताकर कैमरे पर अपनी बाइट दी।
एसपी विजिलेंस और एंटी करप्शन दफ्तर जाने वालों में यह भी साथ थे। तीन दिन बाद दर्ज एफआईआर में स्टेनो ने अवधेश को भी रंगदारी मांगने वालों में आरोपी बना दिया।
आरोपी पत्रकार- मनोज गौतम

क्यारा ब्लॉक के बारी नगला गांव के रहने वाले अनुसूचित जाति पृष्ठभूमि के मनोज लंबे अरसे से सामाजिक न्याय और जन सरोकार से जुड़े मुद्दे पत्रकारिता के जरिए उठाते रहे हैं। शादीशुदा हैं और पारिवारिक जीवन है।
इसी साल एक जनवरी से अब तक सर्वश्रेष्ठ मीडिया हिंदी साप्ताहिक के प्रमुख रिपोर्टर हैं और स्टेट क्राइम ब्यूरो की जिम्मेदारी है। उनका इरादा गांव का प्रधानी पद का उम्मीदवार बनना भी रहा है।
https://www.facebook.com/share/v/14uFgxXxPku/

इन्होंने ही स्टेनो संजीव कश्यप के साथ अवधेश कुमार की स्पाई कैमरे से बातचीत को अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रकाशित कर दिया था और अभी, 29 सितंबर को सर्वश्रेष्ठ मीडिया का ताजा अंक आया तो उसमें पूरी रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इनका नाम भी एफआईआर में दर्ज किया गया है।
आरोपी पत्रकार- अमल सैनी

जेल जाने से पहले कैंट एरिया में परगवां गांव के रहने वाले 26 साल के अमल सैनी पंजाब के एएनबी न्यूज चैनल के लिए काम करते हैं। शैक्षिक योग्यता की जानकारी नहीं है, लेकिन कम उम्र में पत्रकारिता शुरू कर दी, इसके पर्याप्त तथ्य हैं।
बल्कि कह सकते हैं कि अमल ने 19 साल की उम्र में पत्रकारिता शुरू कर दी थी। वहीं पुलिस रिकॉर्ड में पहला मुकदमा भी उसी समय दर्ज हुआ। पुलिस अमल को एसएसपी कार्यालय के बाहर आत्मदाह के लिए उकसाने और रंगदारी मांगने के आरोप में जेल भेज चुकी है। गिरफ्तारी के बाद तीन और एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें अमल को मुख्य या प्रमुख आरोपी बनाया गया है। स्टेनो द्वारा कराई गई एफआईआर में अमल सैनी को मुख्य आरोपी बताया गया है।
पांचों ही लोगों के बीच लंबा जुड़ाव है, ऐसी जानकारी किसी स्रोत से नहीं मिली। रोजमर्रा की रिपोर्टिंग में सभी के सूचना आदान प्रदान और मुलाकात के संबंध होते हैं। हाल के दिनों की साझी रिपोर्टिंग की कुछ क्लिपिंग भी सोशल मीडिया पर शेयर की गई हैं, जो कि सामान्य बात है।
सामान्य न्यूज रिपोर्टिंग का अच्छा अनुभव अमल सैनी के पास है, लगभग आठ साल का। प्रज्ञा मिश्रा के चैनल से लेेकर एएनबी नेशनल तक। अवधेश अभी पत्रकारिता करने का प्रयास कर रहे हैं। संतोष शाक्य दो तीन महीने से सामान्य न्यूज रिपोर्टिंग में उतरे हैं, जिसमें स्वास्थ्य मामलों की रिपोर्टिंग ही अमूमन की है। पवन त्रिपाठी पांच साल से इस फील्ड में हैं। मनोज गौतम भी लगभग इतने ही समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
कुछ दिन पहले की एक तस्वीर इनको आपस में जोड़ती है, वह है भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के जन्मदिन पर उनसे मिलना और साथ में तस्वीर खिंचाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना। पांचों पर एफआईआर से पहले की यही एक साझा तस्वीर है। इस तस्वीर में पवन त्रिपाठी और अवधेश नहीं हैं।

यह भी पढ़ें: Killing The Messenger: बरेली में 5 पत्रकारों पर FIR की पड़ताल: Read & Watch Facts
यह भी पढ़ें: बरेली कलेक्ट्रेट में रंगदारी: QR कोड से 5000 की शिकायत से 10000 में निपटारे और 5 पत्रकारों पर FIR की पूरी कहानी के असली सबूत क्या हैं?
(आप हमें फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्विटर पर फॉलो कर सकते हैं।)


