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Friday, August 7, 2026
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बरेली: द्वारिकेश चीनी मिल द्वारा किसान गोष्ठी का आयोजन

बरेली के फरीदपुर में द्वारिकेश चीनी मिल द्वारा गुरुवार को ग्लोरियस डिग्री कॉलेज में एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के दूर-दराज से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और उन्होंने खेती की पैदावार बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की (Dwarikesh Sugar Mill Organised a Seminar)

रिपोर्ट: राजीव कुमार यादव


गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना और गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में फैक्ट्री के अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान भी बताए।

गोष्ठी के दौरान अधिकारियों ने किसानों को बताया कि यदि गन्ने की खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो उत्पादन में काफी वृद्धि संभव है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अच्छी गुणवत्ता वाले गन्ना बीज का प्रयोग करें और बुवाई करते समय दवाइयों का प्रयोग अवश्य करें, ताकि फसल रोगों से सुरक्षित रहे और पैदावार बेहतर हो। अधिकारियों ने यह भी बताया कि गन्ने में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना बहुत आवश्यक है। साथ ही गन्ने की तीन बार बंधाई करने की सलाह दी गई ताकि फसल गिरने से बची रहे। जब गन्ना खेत में सीधा और मजबूत खड़ा रहेगा तभी उसकी पैदावार अधिक होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा (Dwarikesh Sugar Mill Organised a Seminar)

किसानों के सम्मान और प्रोत्साहन के लिए मिल की ओर से गन्ना बीज तथा गन्ने में प्रयोग होने वाली दवाइयों पर सब्सिडी देने की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करने से खेती का काम आसान हो जाता है और उत्पादन भी बढ़ता है। इसी क्रम में किसानों को निराई-गुड़ाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाले यंत्र, गन्ना बुवाई मशीन, लोहिया गन्ना जुताई मशीन और अन्य कृषि उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गई।

किसानों को यह भी समझाया गया कि गन्ने की बुवाई हमेशा उचित दूरी पर करनी चाहिए। यदि गन्ने को लेजर तकनीक से लगभग तीन मीटर की दूरी पर लगाया जाए तो गन्ना मोटा और लंबा होता है और पैदावार में भी काफी बढ़ोतरी होती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसान इस तकनीक से गन्ने की खेती करें तो एक बीघा खेत में लगभग 70 से 100 कुंतल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जबकि एक एकड़ में लगभग 500 से 600 कुंतल तक पैदावार संभव है। इस तरह वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि हाल के वर्षों में क्षेत्र के कुछ किसानों ने गन्ना लगाना कम कर दिया है, क्योंकि कई किस्मों की नस्लें ठीक से टिक नहीं पा रही हैं और रोगों की समस्या भी बढ़ रही है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए द्वारिकेश चीनी मिल ने किसानों की सहायता के लिए लगभग चार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस बजट के माध्यम से किसानों को गन्ना बीज, दवाइयों और कृषि यंत्रों पर सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे बेहतर तरीके से खेती कर सकें (Dwarikesh Sugar Mill Organised a Seminar)

गोष्ठी के अंत में किसानों ने मिल प्रबंधन की इस पहल की सराहना की और कहा कि यदि उन्हें समय-समय पर इस तरह की जानकारी और सहयोग मिलता रहा तो निश्चित रूप से गन्ना उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार कपिल, अनिल कुमार त्यागी, पवन कुमार चतुर्वेदी, दिनेश कुमार शर्मा, उपेंदर कुमार उपाध्याय, आलोक मिश्रा, सर्वेश शर्मा, हर्षवर्धन सिंह, अरविंद त्यागी एवं विजय शंकर सिंह समेत समस्त चीनी मिल के अधिकारी और किसान मौजूद रहे।


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