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Wednesday, June 24, 2026
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बड़े प्रोजेक्ट, लेकिन युवाओं को कितना रोजगार? बरेली की नई इंडस्ट्रियल टाउनशिप योजना की जमीनी पड़ताल

रिपोर्ट: नवदीप शर्मा

बरेली। जिले में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए 300 एकड़ (लगभग 126 हेक्टेयर) क्षेत्र में एक आधुनिक इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) द्वारा तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जिले के आर्थिक विकास, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है(Major Projects In Bareilly)
हालांकि, इस परियोजना को लेकर स्थानीय युवाओं और किसानों के मन में कई सवाल भी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस विकास का लाभ किसे मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के कितने अवसर प्राप्त होंगे?
प्रस्तावित इंडस्ट्रियल टाउनशिप में विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है। इसमें स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, भूमिगत विद्युत नेटवर्क, गैस पाइपलाइन, ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन, चौड़ी सड़कें, सीवरेज एवं ड्रेनेज सिस्टम, फायर स्टेशन तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं शामिल होंगी। परियोजना के लिए रसूला चौधरी, भिटौरा नौंगवा उर्फ फतेहगंज पश्चिमी, चिटौली और रहपुरा जागीर क्षेत्र में भूमि क्रय की प्रक्रिया चल रही है।
इस परियोजना को लेकर हमारी टीम ने स्थानीय युवाओं और किसानों से बातचीत की। अधिकांश युवाओं का मानना है कि यदि उद्योग स्थापित होते हैं और स्थानीय स्तर पर भर्ती को प्राथमिकता दी जाती है तो इससे रोजगार की स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है। कई युवाओं ने कहा कि जिले से रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों और राज्यों की ओर पलायन एक बड़ी समस्या है। ऐसे में यदि उद्योगों में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों प्रकार की नौकरियां उपलब्ध होती हैं तो स्थानीय युवाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। (Major Projects In Bareilly)
वहीं कुछ युवाओं ने यह आशंका भी जताई कि अक्सर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में बाहरी राज्यों या बड़े शहरों से प्रशिक्षित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में स्थानीय युवाओं के लिए केवल सीमित अवसर ही बचते हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन को उद्योगों के साथ-साथ कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू करने चाहिए ताकि स्थानीय युवा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित होकर रोजगार प्राप्त कर सकें।
दूसरी ओर, भूमि अधिग्रहण और औद्योगिक विस्तार का प्रभाव किसानों पर भी पड़ने वाला है। जिन गांवों की भूमि परियोजना के लिए चिन्हित की गई है, वहां के किसानों की राय मिश्रित दिखाई दी। कुछ किसानों का कहना है कि यदि उन्हें उचित मुआवजा और परिवार के सदस्यों को रोजगार के अवसर मिलते हैं तो वे इस विकास का स्वागत करेंगे। उनका मानना है कि उद्योग आने से क्षेत्र में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का भी विस्तार होगा, जिससे गांवों का समग्र विकास संभव होगा।
हालांकि कुछ किसानों ने खेती योग्य भूमि कम होने की चिंता भी व्यक्त की। उनका कहना है कि कृषि उनकी आजीविका का मुख्य आधार है और भूमि कम होने से भविष्य में खेती पर असर पड़ सकता है। किसानों का मानना है कि विकास और कृषि के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि दोनों क्षेत्रों का हित सुरक्षित रह सके।
इस संबंध में संयुक्त आयुक्त उद्योग, बरेली मंडल, बरेली श्रीनाथ पासवान ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में बरेली जिले में 75,401 एमएसएमई (MSME) इकाइयों की स्थापना हुई है। इन इकाइयों में लगभग 1,655 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है तथा 4,92,743 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और उद्योग विभाग लगातार निवेश को बढ़ावा देने तथा रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है और भविष्य में भी निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वहीं बीडीए से जुड़े अधिकारी दीपक कुमार (पीसीएस) ने बताया कि विकास प्राधिकरण द्वारा इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए लगभग 126 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक औद्योगिक वातावरण तैयार करना है, जिससे निवेशकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और जिले में आर्थिक गतिविधियां बढ़ें। उन्होंने परियोजना की विभिन्न विशेषताओं और भविष्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से जानकारी दी।

 

कुल मिलाकर बरेली की प्रस्तावित इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकास, निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं लेकर आई है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह परियोजना केवल औद्योगिक विकास तक सीमित रहती है या वास्तव में बरेली के युवाओं और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनती है।
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