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Sunday, August 16, 2026
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डॉ. अशोक विश्वास पर FIR दर्ज, इंडस न्यूज़ टीवी की खबर का असर, प्रद्युम्न कुमार की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

बरेली। हाफिजगंज थाना क्षेत्र में कथित रूप से बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के क्लीनिक संचालित करने के मामले में आखिरकार पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। इंडस न्यूज टीवी द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अब कार्रवाई हुई है। हाफिजगंज थाने में कथित डॉ. अशोक विश्वास के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
शिवेंद्र कुमार, प्रधुमन कुमार का भाई
मामला हाफिजगंज निवासी प्रद्युम्न कुमार की शिकायत से जुड़ा है। प्रद्युम्न कुमार ने आरोप लगाया था कि डॉ. अशोक विश्वास बिना वैध चिकित्सकीय डिग्री के क्लीनिक संचालित कर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। शिकायत में गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयां और इंजेक्शन देने तथा मरीजों से उपचार के नाम पर धन वसूलने जैसे आरोप लगाए गए थे।
शिकायत के बाद मामला IG​RS के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचा। बरेली मंडल के अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की ओर से मामले की जांच कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कथित क्लीनिक का निरीक्षण किया और उसे सील कर दिया।
शिकायतकर्ता ने बाद में आरोप लगाया कि क्लीनिक सील होने के बावजूद कथित रूप से घर से चिकित्सा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोबारा निरीक्षण किया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की आख्या के अनुसार घर पर क्लीनिक संचालित किए जाने का कोई साक्ष्य टीम को नहीं मिला।
इसके बावजूद पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। FIR के लिए भेजी गई रिपोर्ट में डॉ. अशोक विश्वास के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की गई थी।
कथित डॉ अशोक विश्वास, आरोपी
इसके बाद 15 अगस्त 2026 को हाफिजगंज थाने में FIR संख्या 0462 दर्ज की गई। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 की धारा 15(3) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR में जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक/अवर निरीक्षक मदन गोपाल को सौंपी गई है।

दरअसल, इससे पहले जब मामले को लेकर हाफिजगंज थाना प्रभारी से बात की गई थी तो उनका कहना था कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से FIR दर्ज कराने संबंधी पत्र थाने को प्राप्त नहीं हुआ है और पत्र प्राप्त होते ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामने आई आख्या में अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा FIR दर्ज कराने के निर्देश का उल्लेख था।
अब FIR दर्ज होने के बाद मामले में पुलिस जांच शुरू हो गई है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आरोपी के पास चिकित्सा कार्य करने की वैध योग्यता अथवा पंजीकरण था या नहीं।
यह पूरा मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि यदि किसी व्यक्ति के पास वैध चिकित्सकीय योग्यता नहीं है तो वह मरीजों का इलाज किस आधार पर कर रहा था और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब पुलिस की जांच, स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज और आरोपी का पक्ष इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होगा। इंडस न्यूज टीवी इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर भी लगातार नजर बनाए हुए है।
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