बरेली: आयुष्मान कार्ड के बावजूद पैसे मांगने का आरोप, मेधांश अस्पताल में इलाज को लेकर विवाद
बरेली, 14 अगस्त 2026। सुभाष नगर स्थित मेधांश अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज के इलाज को लेकर विवाद सामने आया है। मरीज के परिजन जितेंद्र पाल ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बावजूद पैसे मांगने और पैसे देने में असमर्थता जताने पर इलाज रोकने तथा मरीज को अस्पताल से रेफर करने का आरोप लगाया है।

जितेंद्र पाल के मुताबिक, उन्होंने अपनी बीमार मां श्यामा देवी को 13 अगस्त की दोपहर करीब 2 बजे मेधांश अस्पताल में भर्ती कराया था। उनका कहना है कि भर्ती के समय अस्पताल को बताया गया था कि मरीज आयुष्मान कार्ड धारक है और अस्पताल की ओर से आयुष्मान योजना के तहत इलाज किए जाने की बात कही गई थी।
जितेंद्र पाल का आरोप है कि भर्ती के बाद अस्पताल की ओर से विभिन्न जांच और इलाज के नाम पर उनसे लगातार पैसे मांगे जाने लगे। उनका यह भी आरोप है कि छोटी-छोटी जांच तक अस्पताल के बाहर से कराने के लिए कहा गया और उसका खर्च भी उनसे मांगा गया। जितेंद्र के मुताबिक, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण जब उन्होंने पैसे देने में असमर्थता जताई तो मरीज का इलाज रोक दिया गया और उन्हें अस्पताल से बाहर जाने के लिए कहा जाने लगा।
जितेंद्र पाल ने अस्पताल प्रशासन पर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि अस्पताल के लोगों ने कथित तौर पर उनसे कहा कि “जो करना है कर लो, जहां शिकायत करनी है कर लो, कुछ नहीं कर पाओगे।” हालांकि, इस कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अस्पताल के दस्तावेज में अलग वजह
मामले में उपलब्ध अस्पताल के दस्तावेज भी सामने आए हैं। अस्पताल की जांच रिपोर्टों में मरीज का नाम श्यामा देवी दर्ज है और दस्तावेजों में उन्हें आयुष्मान भारत के तहत दर्ज किया गया है। 14 अगस्त की अस्पताल की जांच रिपोर्टें भी उपलब्ध हैं।

वहीं अस्पताल के Patient Referral Form में मरीज को हायर सेंटर रेफर करने का कारण अलग दर्ज किया गया है। रेफरल फॉर्म में लिखा है कि “Patient attendant non cooperative and wants to shift to higher centre”, यानी मरीज के अटेंडेंट के सहयोग न करने और मरीज को उच्च केंद्र ले जाने की इच्छा का उल्लेख किया गया है। फॉर्म में मरीज को ऑक्सीजन के साथ एंबुलेंस से ले जाने की जरूरत भी दर्ज है।
इस तरह मरीज के परिजन जहां पैसे मांगने और भुगतान न कर पाने पर इलाज रोकने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं अस्पताल के रेफरल दस्तावेज में रेफरल का कारण अटेंडेंट के सहयोग न करने और हायर सेंटर शिफ्ट करने की इच्छा बताया गया है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
मामले की जानकारी मिलने पर जब अस्पताल पहुंचकर अस्पताल संचालिका डॉ. मृंदा जौहरी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वह अस्पताल में मौजूद नहीं थीं। अस्पताल प्रबंधन या संचालिका का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। वहीं, यदि मरीज के परिजन इस मामले में सक्षम अधिकारी के समक्ष शिकायत करते हैं तो जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।