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Friday, August 21, 2026
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बरेली: मेधांश अस्पताल पर आयुष्मान धारक मरीज़ से वसूली के आरोप, मरीज़ के परिजन ने की डीएम से शिकायत

बरेली। सुभाष नगर स्थित मेधांश अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज के इलाज को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब मामला जिलाधिकारी तक पहुंच गया है। मरीज के परिजन जितेंद्र पाल ने बुधवार, 20 अगस्त को जिलाधिकारी बरेली को लिखित शिकायत देकर अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान योजना के बावजूद पैसे मांगने, मरीज का इलाज प्रभावित करने, धमकाने और जबरन रेफर करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में अस्पताल संचालिका डॉ. मृंदा जौहरी समेत अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। 

जितेंद्र पाल के मुताबिक, उनकी मां श्यामा देवी की तबीयत खराब होने पर उन्हें 13 अगस्त की दोपहर करीब 2 बजे मेधांश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका कहना है कि मरीज के पास आयुष्मान कार्ड था और अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज किए जाने की बात कही गई थी। अस्पताल के दस्तावेजों में भी मरीज को आयुष्मान भारत के तहत दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आईसीयू में भर्ती करने के बाद उनसे करीब 15 से 20 हजार रुपये की जांच अपने खर्च पर कराने के लिए कहा गया। जितेंद्र पाल ने डॉक्टर को बताया कि उनकी मां का आयुष्मान कार्ड बना हुआ है और इलाज आयुष्मान योजना के तहत होना चाहिए। आरोप है कि इसके बाद अस्पताल के डॉक्टर, मैनेजर, दो नर्स और आयुष्मान मित्र ने उनके साथ अभद्रता की और धमकी देते हुए मरीज को अस्पताल से बाहर ले जाने के लिए कहा।
जितेंद्र पाल ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल के मैनेजर द्वारा 10 हजार रुपये नकद लिए गए, लेकिन इसके बावजूद उनकी मां का इलाज नहीं किया गया। उनका दावा है कि 14 अगस्त को मरीज को अस्पताल से रेफर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी मां को रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज, बरेली में आयुष्मान कार्ड के जरिए भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है।
मामले में सामने आए मेधांश अस्पताल के रेफरल दस्तावेज में मरीज को हायर सेंटर भेजने की वजह “Patient attendant non cooperative and wants to shift to higher centre” दर्ज है। वहीं, मरीज के परिजन का कहना है कि पैसे देने से इनकार करने के बाद इलाज प्रभावित किया गया और मरीज को रेफर किया गया। इस तरह रेफरल को लेकर मरीज के परिजन और अस्पताल के दस्तावेज में अलग-अलग वजह सामने आ रही है।
जितेंद्र पाल ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज की व्यवस्था की जांच करने और शिकायत में नामित डॉक्टर, मैनेजर, नर्सों तथा आयुष्मान मित्र की भूमिका की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
मामले की जानकारी मिलने पर अस्पताल पहुंचकर संचालिका डॉ. मृंदा जौहरी का पक्ष जानने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन वह मौके पर मौजूद नहीं थीं। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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